भारत में मोटापा कम करने के लिए अभियान की जरूरत, जानें क्या कहता है आंकड़ा

TNP DESK- भारत में मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बन गया है .मोटापा न केवल जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है, बल्कि देश की हेल्थ राशियों पर भी भारी असर डालता है.बीते कुछ सालों में, जीवनशैली में बदलाव, खानपान की आदतें, शारीरिक गतिविधियों की कमी और मानसिक तनाव ने भारत में मोटापे के मामलों तेजी से बढ़ रहा .इसे लेकर अलग अलग स्वास्थ्य संगठन और विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं. आइए जानते हैं कि भारत में मोटापे के खिलाफ अभियान क्यों आवश्यक हो गया है, और इस पर क्या कहते हैं आंकड़े.
मोटापे के बढ़ते आंकड़े
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन (WHO) के अनुसार, भारत में मोटापे की राशियों लगातार बढ़ रही है.जहां 2016 में एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 13% वयस्क मोटापे के सीकर थे, और यह संख्या लगातार बढ़ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसे नियंत्रित नहीं किया गया, तो आने वाले वर्षों में मोटापे से जुड़ी बीमारियों का बोझ देश पर और अधिक बढ़ सकता है.
मोटापे से जुड़ी बीमारियां
डायबिटीज (Diabetes):भारत में डायबिटीज के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ रही है। मोटापा इसका मुख्य कारण है, क्योंकि यह शरीर में इंसुलिन के प्रभाव को कम कर देता है.
हृदय रोग (Heart Disease): मोटापे के कारण हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है, और यह भारत में मौतों के प्रमुख कारणों में से एक है.
हाइपरटेंशन (High Blood Pressure): मोटापा ब्लड प्रेसर का कारण बनता है, जो अन्य कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म देता है.
युवाओं में मोटापा
भारत में युवाओ में मोटापे की समस्या भी बढ़ रही है.आपको जानकारी हो कि स्कूलों और कॉलेजों में मोटे बच्चों की संख्या में 20-30% तक बढ़ी है. इसका सबसे बड़ा कारण फास्ट फूड का बढ़ता सेवन, कम शारीरिक गतिविधि, और मानसिक दबाव है.
मोटापे का कारण
खानपान की आदतें
भारत में फास्ट फूड का सेवन काफी बढ़ गया है . ऐसे खाने की चीजों में अधिक कैलोरी, वसा, चीनी और नमक होते हैं, जो वजन बढ़ने का मुख्य कारण बनते हैं.
कम शारीरिक गतिविधि
शारीरिक गतिविधियों की कमी भी मोटापे के प्रमुख कारणों में से एक है. आजकल की डेली लाइफस्टाइल में लोग लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं और शारीरिक श्रम की गतिविधियां बहुत कम हो गई हैं.
मानसिक तनाव
मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं जैसे कि तनाव और चिंता भी मोटापे का कारण बन सकती हैं. ये समस्याएं अक्सर अधिक खाने की आदतों को जन्म देती हैं, जिससे वजन बढ़ता है.
मोटापे के खिलाफ अभियान की आवश्यकता
स्वास्थ्य प्रणाली पर बोझ
मोटापे से जुड़ी बीमारियों के इलाज में काफी खर्चा आता है.यदि मोटापा पर ध्यान नहीं दिया गया ,तो यह भारतीय स्वास्थ्य प्रणाली पर भारी असर डाल सकता है. जैसे भारत ने 2019 में मोटापे के इलाज पर भारत ने लगभग 4.3 बिलियन डॉलर खर्च किए थे.
रोज़गार और जीवनशैली पर असर
मोटापे से जीवन के काम काज पर भी असर पड़ता है.मोटे व्यक्तियों को कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिससे उनका कार्य करने की क्षमता काम हो जाती है.
लोगो को जागरूक करने की आवश्यकता
ज्यादा तर लोग मोटापे को एक फैशन या बाहरी रूप से दिखने वाला मुद्दा मानते हैं, लेकिन यह एक गंभीर है. लोगों को इसके गंभीर प्रभाव और इस पर ध्यान देने की जरूर होती है. साथ ही दूसरों को भी जागरूक करने की आवश्यकता है.
सरकार और खुद की कोशिश
भारत सरकार ने मोटापे को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या मानते हुए विभिन्न योजनाओं की शुरुआत की है.
नैशनल न्यूट्रीशन मिशन: इस अभियान का उद्देश्य लोगों को स्वस्थ खानपान के बारे में जागरूक करना है. इसके तहत विशेष रूप से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पोषण संबंधी जानकारी दी जाती है.
स्वस्थ जीवनशैली अभियान: सरकार ने शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कार्यक्रम शुरू किए हैं, जैसे कि "फिट इंडिया मूवमेंट" जो लोगों को व्यायाम और खेलों में भाग लेने के लिए प्रेरित करता है.
भारत में मोटापे के बढ़ते मामलों को देखते हुए, यह जरूरी हो गया है कि हम एक ठोस और प्रभावी अभियान चलाएं. लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना, खानपान की आदतों को सुधारना और शारीरिक गतिविधि को बढ़ावा देना जरूरी है. यदि हम अभी कदम नहीं उठाते, तो आने वाले वर्षों में मोटापे से जुड़ी बीमारियों का बोझ स्वास्थ्य प्रणाली पर और अधिक बढ़ सकता है.
रिपोर्ट: प्रिया झा
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