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नालंदा में पढ़ा चीन का वो विद्वान... जिसकी कहानी आज भी मशहूर हैबिहार8

नालंदा में पढ़ा चीन का वो विद्वान... जिसकी कहानी आज भी मशहूर है

7वीं सदी में चीन से एक विद्वान ज्ञान की तलाश में भारत आया. उसकी मंजिल थी बिहार का नालंदा महाविहार, जहां उसने गुरु शीलभद्र से बौद्ध दर्शन और संस्कृत का अध्ययन किया. ह्वेनसांग की यह यात्रा सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रही, वे भारत से 657 संस्कृत बौद्ध पांडुलिपियां चीन ले गए और वर्षों तक उनके अनुवाद में जुटे. उनकी कहानी आज भी नालंदा और भारत-चीन के प्राचीन ज्ञान-संबंधों की याद दिलाती है.

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400 साल पुराना वन देवी मंदिर… सूर्यास्त के बाद यहां क्यों थम जाते हैं कदम? सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म ने बढ़ाया रहस्यबिहार8

400 साल पुराना वन देवी मंदिर… सूर्यास्त के बाद यहां क्यों थम जाते हैं कदम? सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म ने बढ़ाया रहस्य

बिहार के बिहटा के पास स्थित करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी मान्यताएं एक बार फिर चर्चा में हैं, कहा जाता है कि घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर में दिन के समय श्रद्धालु दर्शन करते हैं, लेकिन सूर्यास्त के बाद यहां रुकने से लोग बचते हैं. स्थानीय लोककथाओं में वन देवी के रात में जंगल में विचरण करने की बातें कही जाती हैं. फिल्मी चर्चा के बाद इस मंदिर की रहस्यमयी कहानी ने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है.

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बिहार के इस बेटे ने दवा की दुनिया में रचा इतिहास, संघर्ष से खड़ी की करोड़ों की कंपनी...बिहार8

बिहार के इस बेटे ने दवा की दुनिया में रचा इतिहास, संघर्ष से खड़ी की करोड़ों की कंपनी...

बिहार के एक छोटे से गांव से निकलकर दवा की दुनिया में अपनी पहचान बनाने वाले संप्रदा सिंह की कहानी किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है. डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले इस किसान परिवार के बेटे ने 1953 में एक छोटी-सी मेडिकल स्टोर से शुरुआत की और आगे चलकर एल्केम लेबोरेटरीज जैसी बड़ी फार्मास्युटिकल कंपनी की नींव रखी. संघर्ष, मेहनत और दूरदृष्टि के दम पर उन्होंने न सिर्फ अपना कारोबार खड़ा किया, बल्कि भारतीय दवा उद्योग को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई.

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बिहार का 15 साल का बेटा… आज क्रिकेट की दुनिया में मचा रहा तहलकाबिहार8

बिहार का 15 साल का बेटा… आज क्रिकेट की दुनिया में मचा रहा तहलका

बिहार के समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से निकला 15 साल का वैभव सूर्यवंशी आज क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिस उम्र में बच्चे क्रिकेट को सिर्फ खेल समझते हैं, वैभव ने उसी उम्र में इसे अपना जुनून बना लिया.कम उम्र, सीमित सुविधाएं और लंबी प्रैक्टिस के बावजूद उन्होंने मेहनत का साथ नहीं छोड़ा. रणजी ट्रॉफी से लेकर आईपीएल और अंडर-19 क्रिकेट तक, वैभव का सफर रिकॉर्ड और उपलब्धियों से भरा है. उनकी कहानी बताती है कि अगर जुनून सच्चा हो, तो उम्र कभी सफलता के रास्ते में दीवार नहीं बनती.

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बिहार से निकला अफसर... आज पश्चिम बंगाल पुलिस का सबसे बड़ा चेहराबिहार8

बिहार से निकला अफसर... आज पश्चिम बंगाल पुलिस का सबसे बड़ा चेहरा

समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से निकला एक लड़का... जिसके सपने उसकी परिस्थितियों से कहीं बड़े थे. पढ़ाई के दम पर BIT Sindri तक पहुंचे, फिर वर्दी पहनकर 1996 बैच के IPS अधिकारी बने. पश्चिम बंगाल में अपनी काबिलियत और नेतृत्व से अलग पहचान बनाई. आसनसोल-दुर्गापुर के पहले पुलिस कमिश्नर से लेकर अब 2026 में कोलकाता पुलिस कमिश्नर बनने तक, अजय कुमार नंद का सफर मेहनत, हौसले और जिम्मेदारी की ऐसी कहानी है, जो छोटे शहरों के युवाओं को बड़े सपने देखने की प्रेरणा देती है.

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भूलती कला को मिली नई उड़ान, सुभद्रा देवी ने दुनिया तक पहुंचाई पहचानबिहार8

भूलती कला को मिली नई उड़ान, सुभद्रा देवी ने दुनिया तक पहुंचाई पहचान

जिस कला को समय के साथ लोग भूलते जा रहे थे, एक महिला ने उसे बचाने की ठान ली. बिहार के मधुबनी की सुभद्रा देवी ने कागज, गोंद और मिट्टी जैसी साधारण चीजों से पेपर मेशी कला को नया जीवन दिया. बचपन में सीखी इस कला को उन्होंने सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि 100 से ज्यादा महिलाओं को सिखाकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया. उनकी मेहनत से गांव की यह पारंपरिक कला देश की सीमाओं को पार कर दुनिया तक पहुंची. आज सुभद्रा देवी की कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, बल्कि उस जुनून की कहानी है, जिसने एक भूली-बिसरी कला को नई पहचान दिला दी.

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क्या मजदूरों का भी हो सकता है LinkedIn? बिहार के चंद्रशेखर ने बदली तस्वीर.....बिहार8

क्या मजदूरों का भी हो सकता है LinkedIn? बिहार के चंद्रशेखर ने बदली तस्वीर.....

बिहार के दरभंगा के एक छोटे से गांव से शुरू हुआ एक ऐसा सपना, जिसने उन मजदूरों के लिए उम्मीद की नई राह बनाई, जो हर सुबह काम की तलाश में चौक-चौराहों पर खड़े होते हैं. चंद्रशेखर मंडल ने तकनीक की मदद से मजदूरों और काम देने वालों को सीधे जोड़ने की पहल की. उनका Digital Labour Chowk सिर्फ रोजगार का प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि मजदूरों के हुनर, पहचान और सम्मान को डिजिटल दुनिया से जोड़ने की कोशिश है. कभी काम की तलाश में भटकने वाले मजदूरों को अब एक ऐसे मंच से जोड़ा जा रहा है, जहां उनका हुनर ही उनकी पहचान बन सकता है.

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AI की दुनिया में बिहार का डंका! ‘झा’ भाइयों ने सिलिकॉन वैली को दी टक्करबिहार10

AI की दुनिया में बिहार का डंका! ‘झा’ भाइयों ने सिलिकॉन वैली को दी टक्कर

दुनिया AI की बात करती है, तो नजरें सिलिकॉन वैली पर टिक जाती हैं… लेकिन अब इस कहानी में बिहार का नाम भी तेजी से चमक रहा है. बिहार से निकले जुड़वां भाइयों मुकुंद झा और माधव झा ने AI की दुनिया में ऐसा कदम रखा है, जिसने टेक्नोलॉजी की दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया. उन्होंने Emergent AI जैसा स्टार्टअप खड़ा किया, जो सॉफ्टवेयर बनाने के पारंपरिक तरीके को बदलने की कोशिश कर रहा है. छोटे शहर से ग्लोबल टेक की दुनिया तक पहुंचने वाले इन भाइयों की कहानी सिर्फ सफलता की नहीं, बल्कि बड़े सपने देखने और उन्हें हकीकत में बदलने के जुनून की कहानी है.

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क्या आपको पता है? भारत का वो सम्राट जिसने युद्ध छोड़ अपनाया शांति का रास्ताबिहार8

क्या आपको पता है? भारत का वो सम्राट जिसने युद्ध छोड़ अपनाया शांति का रास्ता

सम्राट अशोक की कहानी सिर्फ एक साम्राज्य की कहानी नहीं है… यह एक ऐसे शासक की कहानी है, जिसने तलवार की ताकत से शुरुआत की, लेकिन अंत में अहिंसा, करुणा और शांति को अपनी सबसे बड़ी शक्ति बनाया. पाटलिपुत्र यानी आज के पटना से विशाल मौर्य साम्राज्य पर शासन करने वाले अशोक का जीवन कलिंग युद्ध के बाद पूरी तरह बदल गया. युद्ध की भयावहता ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया और यहीं से शुरू हुई एक ऐसी यात्रा, जिसने बिहार की धरती से शांति और धम्म का संदेश दुनिया के कई हिस्सों तक पहुंचाया.

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एक बिहारी शासक और 5 साल का राज… जिसकी छाप आज तक नहीं मिट सकीबिहार8

एक बिहारी शासक और 5 साल का राज… जिसकी छाप आज तक नहीं मिट सकी

भारत के इतिहास में कई ऐसे शासक हुए, जिनका असर उनके शासनकाल से कहीं आगे तक दिखाई देता है. बिहार के सासाराम से निकले शेरशाह सूरी भी ऐसे ही दूरदर्शी शासक थे. महज करीब पांच साल के शासन में उन्होंने मुद्रा, सड़क, डाक, राजस्व और प्रशासन की ऐसी व्यवस्थाएं खड़ी कीं, जिनका प्रभाव आगे के शासन पर भी पड़ा. आज का ‘रुपया’, ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड और सासाराम का भव्य मकबरा—इन सबके पीछे शेरशाह की कहानी जुड़ी है. आइए जानते हैं उस शासक के बारे में, जिसने कम समय में बड़े बदलावों की नींव रखी.

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मौर्य साम्राज्य: बिहार से निकली वो ताकत, जिसने भारत को एक राष्ट्र की सोच दीबिहार8

मौर्य साम्राज्य: बिहार से निकली वो ताकत, जिसने भारत को एक राष्ट्र की सोच दी

आज का बिहार भले ही कई चुनौतियों से जूझ रहा हो, लेकिन इतिहास में यही धरती भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्तियों में से एक का केंद्र रही है. करीब 2300 साल पहले पाटलिपुत्र यानी आज का पटना, मौर्य साम्राज्य की राजधानी बना था. चंद्रगुप्त मौर्य से लेकर सम्राट अशोक तक, यहीं से एक विशाल साम्राज्य ने भारत के बड़े हिस्से पर अपनी छाप छोड़ी. चाणक्य की रणनीति, चंद्रगुप्त की नेतृत्व क्षमता और अशोक के शांति संदेश ने भारतीय इतिहास की दिशा बदल दी. आइए जानते हैं उस दौर की कहानी, जब बिहार से भारत की सत्ता और नीति को दिशा मिलती थी.

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बिहार का वो गुरु, जिसने भारतीय सिनेमा को दिए कई दिग्गज कलाकारबिहार8

बिहार का वो गुरु, जिसने भारतीय सिनेमा को दिए कई दिग्गज कलाकार

सितारों की चमक के पीछे अक्सर एक ऐसा गुरु होता है, जिसकी पहचान पर्दे पर नहीं, कलाकारों की कला में दिखाई देती है. बिहार के दरभंगा से निकले राम गोपाल बजाज भी ऐसे ही अभिनय गुरु हैं, जिन्होंने थिएटर, NSD और अपने प्रशिक्षण के जरिए भारतीय रंगमंच को समृद्ध किया. उन्होंने कलाकारों को सिर्फ अभिनय करना नहीं सिखाया, बल्कि किरदार को समझना, महसूस करना और उसे सच्चाई के साथ जीना सिखाया.

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