धर्म-कर्म फोटो स्टोरी
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धर्म-कर्म8एक पत्नी और कई पति… आखिर क्या है टोडा जनजाति की यह अनोखी परंपरा?
भारत विविध संस्कृतियों और अनोखी परंपराओं का देश है, जहां हर समुदाय की अपनी अलग पहचान और जीवनशैली है. इन्हीं में से एक है तमिलनाडु की नीलगिरी पहाड़ियों में रहने वाला टोडा जनजातीय समुदाय, जिसकी ऐतिहासिक विवाह परंपरा लोगों को हैरान कर सकती है. यहां कभी एक महिला के कई पति होने की प्रथा के उदाहरण मिलते थे. आखिर इस परंपरा के पीछे क्या वजह थी, बच्चे के पिता की पहचान कैसे होती थी और क्या आज भी यह प्रथा प्रचलित है?
धर्म-कर्म6मां के स्वागत को तैयार देश, दुर्गा प्रतिमाओं को दिया जा रहा आखिरी स्पर्श
मां दुर्गा के स्वागत को लेकर देशभर में तैयारियां अब अंतिम चरण में पहुंच गई हैं. पंडालों की सजावट से लेकर प्रतिमाओं के श्रृंगार तक, हर जगह उत्साह और भक्ति का माहौल नजर आ रहा है. मूर्तिकार दिन-रात मेहनत कर दुर्गा प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं. कहीं चेहरे की बारीकियां उकेरी जा रही हैं, तो कहीं रंग और आभूषणों से प्रतिमा को सजाया जा रहा है. अब भक्तों को मां के भव्य आगमन और दर्शन का बेसब्री से इंतजार है.
धर्म-कर्म9महालया 2026: पितरों को विदाई, मां दुर्गा के स्वागत की शुरुआत… जानें कब है महालया
महालया सिर्फ एक धार्मिक तिथि नहीं, बल्कि पितरों को श्रद्धांजलि देने और मां दुर्गा के आगमन की तैयारी का विशेष अवसर है. सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृ पक्ष का समापन होता है और इसके अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होती है. खासकर बंगाल में महालया की सुबह देवी स्तुति, धार्मिक पाठ और दुर्गा पूजा की तैयारियों से जुड़ी होती है. 2026 में महालया 10 अक्टूबर को मनाई जाएगी. जानिए महालया की तिथि, तर्पण का महत्व और नवरात्र से इसका खास संबंध.....
धर्म-कर्म6पितृपक्ष में क्या बेटियां कर सकती हैं श्राद्ध-पिंडदान? जानिए शास्त्रों में क्या है विधान
पितृपक्ष में पूर्वजों की आत्मिक शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है. आमतौर पर पिंडदान को पुत्र के कर्तव्य से जोड़ा जाता है, लेकिन क्या पुत्र न होने पर बेटियां भी यह कर्म कर सकती हैं? धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक प्रसंगों और अलग-अलग परंपराओं में इस सवाल के कई जवाब मिलते हैं. जानिए बेटियों के पिंडदान को लेकर क्या कहते हैं धर्मशास्त्र और परंपराएं.
धर्म-कर्म8भारत का अनोखा मंदिर, जहां भगवानों पर चलता है मुकदमा! जानिए क्या है भंगाराम देवी की परंपरा
भारत में एक ऐसी अनोखी ‘अदालत’ भी है, जहां इंसानों की नहीं, बल्कि देवी-देवताओं की शिकायतें सुनी जाती हैं. छत्तीसगढ़ के कोंडागांव में मां भंगाराम देवी के दरबार में लोग अपनी परेशानियां लेकर पहुंचते हैं. मान्यता है कि दोषी पाए जाने पर देवी-देवताओं को भी ‘निर्वासन’ की सजा मिलती है. आस्था, लोकविश्वास और परंपरा से जुड़ी यह अनोखी व्यवस्था बस्तर की सांस्कृतिक विरासत की एक अलग तस्वीर पेश करती है.
धर्म-कर्म10मां दुर्गा की मूर्ति में क्यों इस्तेमाल होती है कोठे की मिट्टी? जानिए सदियों पुरानी परंपरा की कहानी
मां दुर्गा की प्रतिमा बनाने में मिट्टी का खास महत्व होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि बंगाल की कुछ दुर्गा पूजा परंपराओं में कोठे के बाहर की मिट्टी को भी ‘पुण्य माटी’ मानने की मान्यता जुड़ी है? आखिर इस मिट्टी को प्रतिमा निर्माण से जोड़ने के पीछे क्या कहानी है? क्या इसका संबंध किसी धार्मिक मान्यता से है या फिर इसमें छिपा है समानता और सम्मान का सामाजिक संदेश? जानिए इस सदियों पुरानी लोकपरंपरा से जुड़ी मान्यताओं की पूरी कहानी.
धर्म-कर्म8कथा से सोशल मीडिया तक… जानिए देश के 5 चर्चित कथावाचकों की खासियत और अनोखी शैली
कथा-वाचन की दुनिया अब पारंपरिक धार्मिक आयोजनों से निकलकर सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुंच चुकी है. भक्ति, संगीत और सरल संवाद शैली के जरिए कई कथावाचक आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं. कोई भागवत कथा के लिए लोकप्रिय है, तो कोई भक्ति संगीत और युवा पीढ़ी से जुड़ने के अंदाज के लिए. आइए जानते हैं भारत के उन 5 चर्चित कथावाचकों के बारे में, जिन्होंने कथा और भक्ति को नए अंदाज में लोगों तक पहुंचाया है.
धर्म-कर्म88 अंग टेढ़े थे, लेकिन ज्ञान के आगे बड़े-बड़े विद्वान झुके! कौन थे अष्टावक्र?
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में महर्षि अष्टावक्र का नाम एक ऐसे महान ज्ञानी के रूप में लिया जाता है, जिनकी पहचान उनके शरीर से नहीं, बल्कि उनके अद्भुत ज्ञान से हुई. जन्म से आठ स्थानों पर टेढ़े शरीर के बावजूद उनकी बुद्धि और आत्मज्ञान असाधारण था. कहा जाता है कि कम उम्र में ही उन्होंने राजा जनक की सभा में महान विद्वानों को शास्त्रार्थ में चुनौती दी. बाद में राजा जनक और अष्टावक्र के बीच हुआ संवाद ‘अष्टावक्र गीता’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ, जिसमें आत्मज्ञान और मुक्ति का सरल मार्ग बताया गया है.
धर्म-कर्म8पितृ पक्ष क्यों है खास? जानें पूर्वजों की पूजा, तर्पण और आशीर्वाद का महत्व
पितृ पक्ष हिंदू धर्म की उन महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है, जब लोग अपने दिवंगत पूर्वजों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं. इस दौरान श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान और भोजन कराने जैसी परंपराएं निभाई जाती हैं. धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में विधि-विधान से किए गए कर्मों से पितरों को संतुष्टि मिलती है और परिवार को उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है, 2026 में पितृ पक्ष का आरंभ 26 सितंबर से माना जा रहा है और सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को होगी. आइए जानते हैं क्या है पितृ पक्ष, इसमें कौन-कौन से कर्म किए जाते हैं और इसका धार्मिक व पारिवारिक महत्व क्या है.
धर्म-कर्म8राधा अष्टमी आज: 12 बजे क्यों किया जाता है राधारानी का पूजन? जानें पूजा का सही समय
आज 19 सितंबर 2026 को राधा अष्टमी का पावन पर्व पूरे देश में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन राधा रानी का प्राकट्य हुआ था. इस अवसर पर मंदिरों और घरों में राधा-कृष्ण की विशेष पूजा, अभिषेक और श्रृंगार किया जाता है. भक्त दोपहर के समय लाडली जू का पूजन कर उन्हें भोग अर्पित करते हैं और आरती करते हैं. आइए जानते हैं राधा अष्टमी पर पूजा का शुभ समय, विधि, भोग और व्रत पारण से जुड़ी जरूरी बातें.
धर्म-कर्म6चार धाम यात्रा: बदरीनाथ धाम में उमड़ी भारी भीड़, जय बदरी विशाल के जयकारों से गूंजा धाम
उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में इन दिनों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है. भगवान बदरी विशाल के दर्शन के लिए देशभर से भक्त यहां पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर ‘जय बदरी विशाल’ के जयकारों से गूंज रहा है और चारों ओर भक्ति का माहौल नजर आ रहा है. हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसे इस पवित्र धाम की तस्वीरें श्रद्धालुओं की आस्था और यात्रा के अद्भुत नजारे को बयां कर रही हैं.
धर्म-कर्म8लालबागचा राजा क्यों हैं इतने खास? मुंबई के बप्पा की कहानी में आस्था के साथ जुड़ी है संघर्ष और मन्नत की अनोखी कहानी
मुंबई का लालबागचा राजा सिर्फ गणपति बप्पा की एक भव्य प्रतिमा नहीं, बल्कि संघर्ष, मन्नत और अटूट आस्था से जुड़ी दशकों पुरानी कहानी है. 1930 के दशक से शुरू हुई यह परंपरा आज लाखों भक्तों की श्रद्धा का केंद्र बन चुकी है. आखिर क्यों भक्त इसे ‘नवसाचा राजा’ कहते हैं और क्या है इसके पीछे की कहानी? आइए जानते हैं लालबागचा राजा की पूरी कहानी..
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