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जिस भोजपुरी को लोग ‘चीप’ कहते थे, उसे नई पहचान दे रहे हैं उत्पल उदितमनोरंजन8

जिस भोजपुरी को लोग ‘चीप’ कहते थे, उसे नई पहचान दे रहे हैं उत्पल उदित

बिहार की मिट्टी से निकली आवाज जब संगीत में गूंजती है, तो उसमें सिर्फ सुर नहीं, बल्कि लोकजीवन, भाषा और संस्कृति की कहानी भी सुनाई देती है. उत्पल उदित ने इसी आवाज को नई पहचान देने का प्रयास किया है. भोजपुरी के साथ मैथिली और मगही लोकसंगीत को नए अंदाज में पेश कर वह पुरानी लोकधुनों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं. कभी जिस भोजपुरी संगीत को हल्के मनोरंजन तक सीमित समझा जाता था, आज वही संगीत नए प्रयोगों के साथ बड़े मंचों तक पहुंच रहा है. यह कहानी है एक ऐसे कलाकार की, जिसने अपनी मिट्टी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया.

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सीवान का लड़का, बना ‘क्रूर सिंह’… फिर छा गया बॉलीवुडमनोरंजन8

सीवान का लड़का, बना ‘क्रूर सिंह’… फिर छा गया बॉलीवुड

सीवान का वो लड़का, जिसे बनना था इंजीनियर… लेकिन थिएटर ने बना दिया ऐसा अभिनेता, जिसका ‘यक्कू…’ सुनकर 90s की पूरी पीढ़ी सहम जाती थी. बिना किसी गॉडफादर और शॉर्टकट के बिहार से मुंबई पहुंचे अखिलेंद्र मिश्रा ने छोटे किरदारों से शुरुआत की और ‘क्रूर सिंह’ बनकर घर-घर पहचान बनाई. फिर ‘सरफरोश’, ‘लगान’ और ‘गंगाजल’ जैसी फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से साबित किया कि असली कलाकार वही है, जो हर किरदार में जान डाल दे. आइए जानते हैं सीवान से बॉलीवुड तक पहुंचने वाले इस दमदार अभिनेता की कहानी.

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हर किरदार में दिखती है अपनी ज़िंदगी... यही है "आदर्श बाल विद्यालय" की ताकतमनोरंजन9

हर किरदार में दिखती है अपनी ज़िंदगी... यही है "आदर्श बाल विद्यालय" की ताकत

आदर्श बाल विद्यालय के किरदार, जो सिर्फ़ हँसाते नहीं… ज़िंदगी जीना भी सिखाते हैं . यह सिर्फ़ एक सरकारी स्कूल की कहानी नहीं है. इसके हर किरदार में हमें कोई अपना दिखता है, हर एपिसोड में अपनी ज़िंदगी का कोई हिस्सा नज़र आता है. हँसी के बीच यह सीरीज़ रिश्तों, संघर्ष, उम्मीद और इंसानियत के ऐसे सबक देती है, जो लंबे समय तक याद रहते हैं. आइए जानते हैं, इस कहानी के हर किरदार से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख.

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यादों का सफर... पहले vs अब,  क्या बदला सिर्फ कैमरा... या यादें संजोने का तरीका भी?मनोरंजन10

यादों का सफर... पहले vs अब, क्या बदला सिर्फ कैमरा... या यादें संजोने का तरीका भी?

हर तस्वीर सिर्फ एक फोटो नहीं, बल्कि किसी मुस्कान, रिश्ते और बीते हुए पल की कहानी होती है. समय के साथ कैमरे बदल गए, तस्वीरें लेने का तरीका बदल गया, लेकिन यादों की अहमियत आज भी वैसी ही है. आइए जानते हैं कि फिल्म रोल वाले कैमरे से लेकर स्मार्टफोन और AI एडिटिंग तक, तस्वीरों और यादों का यह खूबसूरत सफर कैसे बदल गया.

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