झारखंड फोटो स्टोरी
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झारखंड8कांवड़ यात्रा कितने प्रकार की होती है? क्या आप जानते है?
श्रावण मास में लाखों श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव के ज्योतिर्लिंगों और शिवालयों तक पदयात्रा करते हैं. इस पावन यात्रा को कांवड़ यात्रा कहा जाता है. यह केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि श्रद्धा, अनुशासन, तपस्या और समर्पण का अद्भुत संगम है. कांवड़ यात्रा के कई स्वरूप हैं, जिनमें हर एक की अपनी परंपरा, नियम और आध्यात्मिक महत्व है.
झारखंड9झारखंड के युवाओं का सवाल: रोजगार का वादा कब बनेगा हकीकत?
झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए परीक्षा सिर्फ एक टेस्ट नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य की उम्मीद होती है. लेकिन पेपर लीक के आरोप, परीक्षा रद्द होना, भर्तियों का अटकना, जांच और कोर्ट के विवादों ने इस उम्मीद को बार-बार झटका दिया है. वर्षों की मेहनत के बाद जब परीक्षा दोबारा देनी पड़े या भर्ती प्रक्रिया लंबी खिंच जाए, तो सबसे बड़ा नुकसान अभ्यर्थियों का होता है. आखिर कब सुधरेगी झारखंड की भर्ती व्यवस्था और कब मिलेगा युवाओं को उनकी मेहनत का सही हक?
झारखंड10क्या आप सही तरीके से कर रहे हैं शिवलिंग का जलाभिषेक? जानें पूरी प्रक्रिया
श्रावण का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है. इस दौरान भक्त बड़ी श्रद्धा के साथ शिवलिंग पर जल, गंगाजल और बेलपत्र अर्पित करते हैं. लेकिन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, केवल जल चढ़ाना ही पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि जलाभिषेक का सही क्रम और विधि भी महत्वपूर्ण होती है. माना जाता है कि विधिपूर्वक जल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. आइए जानते हैं शिवलिंग पर जल अर्पित करने के सही नियम, क्रम और पूजा की संपूर्ण विधि .
झारखंड10जय जगरनाथ ! भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा से भक्तिमय हुआ रांची
रांची भगवान जगन्नाथ की भक्ति में पूरी तरह डूबी हुई है. जगन्नाथपुर मंदिर से निकलने वाली ऐतिहासिक रथयात्रा को लेकर सुबह 3 बजे से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी. शाम 5 बजे भगवान जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा भव्य रथ पर सवार होकर मौसीबाड़ी के लिए रवाना हुए . आइए जानते हैं रांची में रथयात्रा कैसे निकली और पूरे दिन क्या-क्या खास हुआ.
झारखंड10श्रावणी मेले से हिजला तक: जानिए झारखंड के सबसे बड़े और प्रसिद्ध मेले
झारखंड के मेले सिर्फ भीड़ नहीं, बल्कि सदियों पुरानी परंपराओं की कहानी हैं. यहां हर मेला किसी न किसी आस्था, संस्कृति और लोकजीवन से जुड़ा है. यही वजह है कि हर साल लाखों लोग इन मेलों का हिस्सा बनने दूर-दूर से पहुंचते हैं. आइए जानते हैं राज्य के 10 सबसे प्रसिद्ध मेलों के बारे में.
झारखंड8बोल बम यात्रा: क्यों जाते हैं शिवभक्त देवघर? जानिए इतिहास, मान्यता की पूरी कहानी
सावन का महीना आते ही 'बोल बम' के जयकारों से पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है. करोड़ों श्रद्धालु सुल्तानगंज से पवित्र गंगाजल लेकर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम तक कठिन पैदल यात्रा करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह यात्रा क्यों की जाती है, इसकी शुरुआत कैसे हुई और इसकी धार्मिक मान्यता क्या है? आइए जानते हैं बोल बम यात्रा.
झारखंड5आइए जानते है, रांची के 5 एतिहासिक स्थल के बारे मे
झारखंड की राजधानी रांची केवल प्राकृतिक सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपने ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है. यहां मौजूद मंदिर, पहाड़ियां और झीलें शहर के गौरवशाली अतीत की कहानी बयां करती हैं. जगन्नाथ मंदिर से लेकर टैगोर हिल और रांची झील तक, ये स्थल हर साल हजारों पर्यटकों और श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं.
झारखंड62.27 करोड़ में बिका जगन्नाथपुर मेला का टेंडर, इस बार महंगे हो सकते हैं झूले और फूड स्टॉल
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर रथ मेला का टेंडर इस बार रिकॉर्ड 2.27 करोड़ रुपये में होने से मेले की तैयारियां तेज हो गई हैं. हालांकि, टेंडर राशि में हुई बड़ी बढ़ोतरी का असर इस बार झूलों, फूड स्टॉल, पार्किंग और अन्य दुकानों की कीमतों पर पड़ने की आशंका है, जिससे मेले में आने वाले लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है.
झारखंड11खनिज से उद्योग तक: जानिए कैसे झारखंड के जिले बढ़ा रहे हैं भारत की आर्थिक ताकत
झारखंड भारत का एक खनिज एवं औद्योगिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण राज्य है. यहाँ के 24 जिले अपने-अपने प्राकृतिक संसाधनों, उद्योगों, कृषि, पर्यटन, ऊर्जा उत्पादन तथा व्यापारिक गतिविधियों के माध्यम से भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं. कुछ जिले कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और यूरेनियम जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध हैं, जबकि कुछ जिले इस्पात उत्पादन, बिजली निर्माण, कृषि, वन उत्पाद, पर्यटन और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में देश की सहायता करते हैं. झारखंड के जिलों का यह विविध योगदान भारत के औद्योगिक विकास, ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार सृजन और आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
झारखंड6झारखंड की जनजातियां: प्रकृति, परंपरा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की अनमोल पहचान.
झारखंड जनजातीय बहुल राज्य है, जहाँ 32 अनुसूचित जनजातियाँ निवास करती हैं. इनमें संथाल, उरांव, मुंडा, हो, खरवार और भूमिज प्रमुख हैं, जो अपनी विशिष्ट संस्कृति, भाषा और परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं.
झारखंड6झारखंड के पारंपरिक और धार्मिक त्योहार: संस्कृति और प्रकृति का अद्भुत संगम
झारखंड अपनी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कृषि परंपराओं और धार्मिक विविधता के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ पूरे वर्ष अनेक पारंपरिक और धार्मिक त्योहार उत्साह, श्रद्धा और सामुदायिक एकता के साथ मनाए जाते हैं. ये त्योहार राज्य की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक जीवन को दर्शाते हैं.
झारखंड4नशे की गिरफ्त में युवा पीढ़ी, समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती
झारखंड में रांची, जमशेदपुर और धनबाद जैसे छोटे शहरों और कस्बों में युवाओं के बीच नशे की बढ़ती प्रवृत्ति गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्र भी शराब, गांजा, ब्राउन शुगर और अन्य मादक पदार्थों की ओर आकर्षित हो रहे हैं. इसका असर उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, करियर और पारिवारिक जीवन पर पड़ रहा है. बेरोजगारी, गलत संगत और सोशल मीडिया का प्रभाव इस समस्या को और बढ़ा रहा है. यदि समय रहते समाज, परिवार और प्रशासन मिलकर प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं, तो यह समस्या आने वाली पीढ़ियों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है.
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