मां जानकी की जन्मभूमि में विकास को नई रफ्तार, 2028 तक तैयार होगा भव्य मंदिर

  • August 9, 2026 1:16 pm
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मां जानकी की जन्मभूमि पुनौराधाम अब विकास की नई राह पर आगे बढ़ रहा है. यहां भव्य मां जानकी मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जिसे 31 दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. मंदिर के साथ श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. इससे पुनौराधाम की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान और मजबूत होगी. साथ ही, यहां धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.

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सीतामढ़ी के पुनौराधाम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मां जानकी की पूजा-अर्चना की. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई. मुख्यमंत्री ने राज्य की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की. पुनौराधाम को मां जानकी की जन्मभूमि माना जाता है. यह स्थान बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है. पूजा के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ भी मौजूद रही. मुख्यमंत्री ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया. उन्होंने कहा कि पुनौराधाम का विकास सरकार की प्राथमिकता है. मंदिर के विकास से यहां आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी.

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पुनौराधाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण चल रहा है. मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य की प्रगति की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि 31 दिसंबर 2028 तक मंदिर का निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है. इसके बाद मां जानकी को भव्य मंदिर में स्थापित किया जाएगा. मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है. यहां श्रद्धालुओं के लिए कई सुविधाएं तैयार की जाएंगी. मंदिर बनने के बाद पुनौराधाम की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी. इससे देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बढ़ सकती है.

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प्रस्तावित मां जानकी मंदिर परिसर में कई भवन बनाए जाएंगे. अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को मंदिर के मॉडल के जरिए इसकी जानकारी दी. मंदिर के साथ परकोटा, यज्ञ मंडप और अनुष्ठान मंडप बनाया जाएगा. पीठाधीश्वर निवास की भी व्यवस्था होगी. परिसर में म्यूजियम और ऑडिटोरियम भी प्रस्तावित हैं. महिला हाट के जरिए स्थानीय महिलाओं और कलाकारों को भी अवसर मिलेगा. श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाओं की व्यवस्था की जाएगी. इन योजनाओं का उद्देश्य पुनौराधाम को एक बड़े धार्मिक और आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करना है. इससे स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल सकते हैं.

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पुनौराधाम के विकास से बिहार में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. मां जानकी की जन्मभूमि होने के कारण इस स्थान का विशेष धार्मिक महत्व है. मंदिर का भव्य निर्माण पूरा होने के बाद यहां देशभर से श्रद्धालु पहुंच सकते हैं. इससे आसपास के क्षेत्रों में भी आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी. होटल, परिवहन, दुकानों और स्थानीय सेवाओं से जुड़े लोगों को लाभ मिल सकता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि पुनौराधाम के विकास से श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी. साथ ही यह क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन सकता है.

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मुख्यमंत्री ने पुनौराधाम मंदिर परिसर में आयोजित शिल्प प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया. प्रदर्शनी में बज्जिका कला और सिक्की कला से जुड़ी कलाकृतियां प्रदर्शित की गईं. मुख्यमंत्री ने स्थानीय कलाकारों से उनकी कला के बारे में जानकारी ली. इन पारंपरिक कलाओं में बिहार की संस्कृति और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई देती है. स्थानीय कलाकार अपनी मेहनत से सुंदर वस्तुएं तैयार करते हैं. ऐसी प्रदर्शनियों से कलाकारों को अपनी कला दिखाने और बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलता है. पुनौराधाम के विकास में स्थानीय कला और संस्कृति को भी विशेष स्थान देने की कोशिश की जा रही है.

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पुनौराधाम के विकास का असर स्थानीय लोगों पर भी पड़ेगा.मंदिर और आसपास के क्षेत्र में सुविधाएं बढ़ने से रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं. पर्यटन बढ़ने से होटल, दुकान, परिवहन और स्थानीय कारोबार को फायदा मिल सकता है. स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को भी अपनी कला बेचने का बेहतर अवसर मिलेगा. सरकार का लक्ष्य पुनौराधाम को धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन का बड़ा केंद्र बनाना है. भव्य मंदिर बनने के बाद इस क्षेत्र की पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है. 31 दिसंबर 2028 तक मंदिर निर्माण पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.