झारखंड JPSC-JSSC मामला: आंदोलन से परीक्षा रद्द होने तक, जानिए शुरुआत से अब तक क्या-क्या हुआ

  • August 20, 2026 6:44 pm
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झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर शुरू हुआ छात्र आंदोलन देखते ही देखते राज्य का बड़ा मुद्दा बन गया. JPSC में कथित पेपर लीक मामले में CID की कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद, परीक्षाओं के स्थगन, नियुक्तियों में गड़बड़ी के आरोप और छात्रों के विरोध प्रदर्शन तक पहुंचा. इसके बाद आमरण अनशन, सरकार से कई दौर की बातचीत, विधानसभा घेराव, पुलिस लाठीचार्ज और बढ़ते राजनीतिक हस्तक्षेप ने आंदोलन को और तेज कर दिया. आखिरकार 17 अगस्त को सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया. लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में कब क्या हुआ, छात्रों की प्रमुख मांगें क्या थीं और आंदोलन किस तरह इस बड़े फैसले तक पहुंचा? जानिए 21 जुलाई से 17 अगस्त तक झारखंड छात्र आंदोलन की पूरी कहानी.

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21 जुलाई को झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) से जुड़े पेपर लीक मामले ने तूल पकड़ लिया. JPSC कार्यालय में CID की छापेमारी हुई. मामले में उप परीक्षा नियंत्रक समेत आठ लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात सामने आई. घटनाक्रम के बीच JPSC के तत्कालीन अध्यक्ष एल. ख्यांगते ने इस्तीफा दे दिया. इस कार्रवाई ने प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी. इसके बाद छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच यह मांग जोर पकड़ने लगी कि भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई की जाए.

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22 जुलाई को JPSC अध्यक्ष एल. ख्यांगते का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया. इसी दौरान सिविल सेवा मुख्य परीक्षा समेत कुल नौ परीक्षाओं को स्थगित किया गया. इसके बाद 24 जुलाई से JPSC और JSSC की नियुक्तियों में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया. अभ्यर्थियों की मांग थी कि भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी हो और परीक्षाओं में किसी भी तरह की अनियमितता की जांच की जाए. 28 जुलाई को आंदोलन कर रहे छात्रों को मोरहाबादी की बापू वाटिका से हटाकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया. आंदोलन धीरे-धीरे बड़ा होता गया और सरकार पर दबाव बढ़ने लगा.

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छात्र आंदोलन ने 2 अगस्त को नया मोड़ लिया. छात्र नेता देवेंद्र महतो ने अपनी मांगों को लेकर अनशन शुरू कर दिया. उनका आंदोलन JPSC और JSSC की नियुक्ति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों, परीक्षाओं की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की अन्य मांगों को लेकर था. अनशन के बाद आंदोलन को और व्यापक समर्थन मिलने लगा. छात्रों ने सरकार से बातचीत कर उनकी मांगों पर ठोस फैसला लेने की अपील की. अनशन के कारण सरकार पर भी दबाव बढ़ा. छात्रों का कहना था कि सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर स्पष्ट और ठोस निर्णय लिया जाना चाहिए.

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5 अगस्त को सरकार ने छात्रों से बातचीत के लिए चार मंत्रियों का पैनल गठित किया और मुख्यमंत्री की ओर से बातचीत का आमंत्रण भेजा. 6 अगस्त को सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने वीडियो कॉल के जरिए देवेंद्र नाथ महतो से जल ग्रहण कर अनशन समाप्त करने का आग्रह किया. 7 अगस्त को विधानसभा मार्च के दौरान AISA नेत्री नेहा बोरा पर स्याही डाले जाने की घटना हुई और छात्र प्रतिनिधियों की सरकार के साथ बैठक हुई. 8 अगस्त को दूसरे दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला. 9 अगस्त की तीसरे दौर की बातचीत में छह मांगों पर सहमति बनी, लेकिन CGL रद्द करने और CBI जांच की मांग पर बात नहीं बनी.

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10 अगस्त को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव किया. प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया. पुलिस की ओर से लाठीचार्ज किए जाने की बात सामने आई, जिसमें सैकड़ों लोगों के घायल होने का दावा किया गया. छात्र नेता देवेंद्र महतो की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. लाठीचार्ज की घटना ने आंदोलन को और राजनीतिक रंग दे दिया. छात्रों ने कार्रवाई का विरोध किया और सरकार से अपनी मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग दोहराई. इस घटना के बाद छात्र संगठनों और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गईं.

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10 अगस्त की विधानसभा घेराव की घटना के बाद 11 अगस्त को भाजपा ने पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में झारखंड बंद बुलाया. इसी दिन ABVP की ओर से भी विधानसभा घेराव का कार्यक्रम किया गया. आंदोलन अब केवल छात्रों तक सीमित नहीं रह गया था और राजनीतिक संगठनों की सक्रियता भी बढ़ गई. 12 अगस्त को विधानसभा घेराव से जुड़ी घटना के मामले में पुलिस ने 500 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की. इस कार्रवाई को लेकर भी छात्र संगठनों में नाराजगी देखने को मिली. दूसरी ओर, सरकार और आंदोलनकारी छात्रों के बीच समाधान निकालने की कोशिशें जारी रहीं.

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15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आंदोलनकारी छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से फिरायालाल चौक तक तिरंगा रैली निकाली. छात्रों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की. यह रैली आंदोलन के दौरान एक अलग तस्वीर पेश कर रही थी, जहां छात्र अपने विरोध को लोकतांत्रिक तरीके से सामने रखते नजर आए. रैली के जरिए छात्रों ने भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच और लंबित मांगों पर सरकार से स्पष्ट निर्णय की मांग दोहराई. आंदोलन अब कई सप्ताह तक चल चुका था और छात्रों का दबाव सरकार पर लगातार बढ़ रहा था.

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लगातार आंदोलन, बातचीत और बढ़ते दबाव के बीच 17 अगस्त को सरकार ने बड़ा फैसला लिया. JSSC-CGL परीक्षा रद्द करने की घोषणा की गई. लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह एक बड़ी मांग की पूर्ति थी. इससे पहले सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी थी, लेकिन CGL रद्द करने और CBI जांच जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई थी. परीक्षा रद्द होने के बाद आंदोलन में बड़ा बदलाव आया. हालांकि छात्रों की अन्य मांगों और पूरे भर्ती विवाद को लेकर सवाल बने रहे. इस फैसले ने झारखंड के भर्ती परीक्षा विवाद में एक महत्वपूर्ण मोड़ ला दिया.