JPSC-JSSC-CGL भर्ती परीक्षा रद्द, 7 हजार नौकरियों पर संकट; अधिकारी से सड़क पर आ गए अभ्यर्थी

  • August 19, 2026 6:25 pm
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झारखंड में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर सरकार के बड़े फैसले ने हजारों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है. TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के ऐलान के बाद करीब 7 हजार पदों पर संकट की स्थिति बन गई है. JSSC-CGL समेत कई बड़ी भर्तियां जांच के दायरे में हैं, वहीं पहले से नौकरी पा चुके युवाओं को भी अपनी नियुक्ति को लेकर डर सता रहा है. ऐसे में अभ्यर्थी सड़क पर उतरकर सरकार से स्पष्ट आदेश, निष्पक्ष जांच और चयनित उम्मीदवारों की नौकरी सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं

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झारखंड सरकार के फैसले के बाद JPSC और JSSC से जुड़ी कई भर्ती प्रक्रियाएं सवालों के घेरे में आ गई हैं. कैबिनेट बैठक के बाद TDPL कंपनी से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का ऐलान किया गया. इस फैसले से करीब 7 हजार पदों और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर चिंता बढ़ गई है. लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे छात्र संगठनों के आंदोलन के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है. अब अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि जिन परीक्षाओं के परिणाम आ चुके हैं या जिनमें नियुक्तियां हो चुकी हैं, उनका क्या होगा?

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सरकार के फैसले का असर JSSC-CGL समेत कई महत्वपूर्ण भर्ती परीक्षाओं पर पड़ने की बात सामने आ रही है. JSSC-CGL में करीब 2,025 पद शामिल थे. इसके अलावा PGT शिक्षक, तकनीकी पद और फील्ड वर्कर जैसी भर्तियां भी जांच के दायरे में बताई जा रही हैं. इन परीक्षाओं में बड़ी संख्या में युवाओं ने आवेदन किया था और वर्षों की तैयारी के बाद चयन हासिल किया. भर्ती प्रक्रिया रद्द होने की खबर से अभ्यर्थियों के सामने फिर से परीक्षा और चयन की अनिश्चितता खड़ी हो गई है. छात्रों का कहना है कि अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, लेकिन मेहनत से चयनित उम्मीदवारों का भविष्य सुरक्षित रहना चाहिए

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जांच का दायरा केवल JSSC तक सीमित नहीं है. JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा भी इस विवाद के बीच चर्चा में है. इस परीक्षा में 103 पद शामिल थे, जिनमें 28 डिप्टी कलेक्टर और 42 DSP जैसे महत्वपूर्ण पद बताए गए हैं. इसके अलावा सिविल जज, वन अधिकारी और अन्य पदों से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इन पदों के लिए अभ्यर्थियों ने लंबी तैयारी की और कई चरणों की परीक्षा प्रक्रिया पूरी की. अब जांच के कारण चयनित और परीक्षा दे चुके उम्मीदवारों में असमंजस है. उन्हें यह चिंता सता रही है कि जांच का अंतिम असर उनकी भर्ती और नियुक्ति पर कितना पड़ेगा.

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सबसे ज्यादा परेशानी उन युवाओं के सामने है, जिन्हें JSSC-CGL के जरिए नौकरी मिल चुकी है. करीब 1,975 चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर सवाल उठने की बात कही जा रही है. इनमें कई ऐसे उम्मीदवार भी हैं, जिन्होंने सरकारी नौकरी मिलने के बाद अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी थी. अब भर्ती प्रक्रिया पर संकट आने से उनके सामने भविष्य को लेकर बड़ी चिंता खड़ी हो गई है. चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी परीक्षा में अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए. लेकिन जिन उम्मीदवारों ने नियमों के अनुसार परीक्षा दी और चयन हासिल किया, उनकी नौकरी सुरक्षित रखी जानी चाहिए. इसी मांग को लेकर वे लगातार आवाज उठा रहे हैं.

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भर्ती रद्द होने के फैसले के बाद चयनित अभ्यर्थियों ने रांची में प्रदर्शन शुरू कर दिया. उम्मीदवारों का कहना है कि उन्होंने वर्षों तक मेहनत कर परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की. अब अचानक भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठने से उनका भविष्य असमंजस में पड़ गया है. प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी सरकार से लिखित आदेश जारी करने और नियुक्त उम्मीदवारों की नौकरी सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं. उनका सवाल है कि अगर भर्ती प्रक्रिया में कहीं गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए, लेकिन ईमानदारी से परीक्षा पास करने वाले युवाओं को इसकी सजा क्यों मिले? आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी सरकार से स्पष्ट नीति और जल्द समाधान की मांग कर रहे हैं.

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सरकार के फैसले के पीछे TDPL से जुड़ी पुरानी प्रक्रियाओं की जांच अहम मानी जा रही है. वर्ष 2014 से TDPL को दिए गए टेंडरों और उससे जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं. इन मामलों की जांच CID और SIT द्वारा किए जाने की बात कही गई है. जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भर्ती प्रक्रिया में कहीं नियमों का उल्लंघन या अनियमितता हुई थी या नहीं. सरकार का कहना है कि भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखना जरूरी है. इसी वजह से जांच पूरी होने तक संबंधित प्रक्रियाओं पर कार्रवाई की जा रही है. अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे का फैसला तय होने की उम्मीद है.

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भर्ती विवाद के बीच सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए समिति गठित करने का फैसला लिया है. इसका उद्देश्य भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाना है. छात्रों की शिकायतों, परीक्षा प्रक्रिया और एजेंसियों की भूमिका जैसे पहलुओं पर भी नजर रखी जा सकती है. सरकार की कार्रवाई के बाद अब सभी की नजर जांच के नतीजों पर है. यदि जांच में अनियमितताएं साबित होती हैं तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है. वहीं अभ्यर्थी चाहते हैं कि जांच के साथ-साथ उनकी मेहनत और भविष्य को भी ध्यान में रखा जाए. खासकर नियुक्ति पा चुके युवाओं को अपनी नौकरी सुरक्षित रहने की उम्मीद है

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JPSC-JSSC से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं पर उठे सवालों के बाद अब अगला कदम जांच रिपोर्ट और सरकार के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा. एक तरफ सरकार भर्ती व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और कथित अनियमितताओं की जांच पर जोर दे रही है, वहीं दूसरी तरफ हजारों अभ्यर्थी अपनी नौकरी और भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे हैं. चयनित उम्मीदवार कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी भी कर रहे हैं. आने वाले समय में जांच के निष्कर्ष यह तय करेंगे कि किन परीक्षाओं को दोबारा कराया जाएगा और किन नियुक्तियों को लेकर क्या फैसला होगा. फिलहाल अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी मांग है—दोषियों पर कार्रवाई हो, लेकिन ईमानदारी से चयनित युवाओं के साथ अन्याय न हो.