रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग?

  • August 11, 2026 8:21 pm
  • 8 Photos
  • 22 Views

दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर रांची विधानसभा तक छात्रों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है. दोनों आंदोलनों की वजह परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और पारदर्शिता की मांग रही, लेकिन मुद्दे और आंदोलन का स्वरूप अलग-अलग रहा. एक ओर दिल्ली में NEET-UG को लेकर सवाल उठे, तो दूसरी ओर रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र सरकार से जवाब मांग रहे हैं.आखिर जंतर-मंतर और रांची के इन दोनों छात्र आंदोलनों में क्या फर्क है?

रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग?
Photo 1 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 1

देश में परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर छात्रों का आक्रोश अलग-अलग जगहों पर सामने आया है. दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर रांची विधानसभा तक छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया. दोनों आंदोलनों में परीक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठे, लेकिन इनके मुद्दे, जिम्मेदार संस्थाएं और प्रदर्शन का तरीका अलग रहा. दिल्ली में NEET-UG 2026 से जुड़े कथित पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था को लेकर विरोध हुआ, जबकि रांची में JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन कर रहे हैं.

Photo 2 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 2

दिल्ली में आंदोलन का मुख्य केंद्र NEET-UG 2026 की परीक्षा व्यवस्था और कथित पेपर लीक को लेकर उठे सवाल रहे. प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रक्रिया में जवाबदेही की मांग की और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का प्रमुख हिस्सा बनी. दूसरी ओर, रांची में छात्रों का आंदोलन झारखंड की JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर है. छात्र 14वीं JPSC परीक्षा समेत कई भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया को लेकर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और स्पष्ट होनी चाहिए.

Photo 3 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 3

दिल्ली का आंदोलन कई दिनों तक जारी रहा और धीरे-धीरे इसका स्वरूप बड़ा होता गया. 20 जुलाई को 'चलो संसद' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी. बैरिकेडिंग तोड़ने की कोशिश के बाद पुलिस ने वाटर कैनन और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. इसके बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत के कई दौर हुए. प्रदर्शन के दौरान कुछ पोस्टरों और नारों में तीखी राजनीतिक भाषा, व्यंग्य और मीम का भी इस्तेमाल हुआ. बाद में प्रदर्शनकारियों की ओर से नकारात्मक और आपत्तिजनक नारों से बचने की अपील की गई.

Photo 4 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 4

रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन कई दिनों से जारी है. 29 जुलाई को छात्रों ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मार्च किया था. इसके बाद सरकार और छात्र संगठनों के बीच बातचीत हुई, लेकिन छात्रों के मुताबिक उनकी सभी मांगों पर सहमति नहीं बनी. बातचीत के बावजूद गतिरोध जारी रहा और छात्रों ने 10 अगस्त को विधानसभा मार्च का ऐलान किया. इस मार्च में बड़ी संख्या में छात्र शामिल हुए और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई की मांग करते हुए विधानसभा की ओर बढ़े.

Photo 5 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 5

10 अगस्त को हजारों छात्र विधानसभा मार्च के लिए पहुंचे. प्रशासन ने विधानसभा परिसर और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए बैरिकेडिंग और प्रतिबंध लगाए थे. प्रदर्शनकारी इन बाधाओं को पार करते हुए आगे बढ़े और विधानसभा के मेन गेट तक पहुंच गए. स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया. कई रिपोर्टों में प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज की भी जानकारी सामने आई. इस दौरान पुलिस और छात्रों के बीच टकराव की स्थिति बनी. विधानसभा तक पहुंचने की घटना ने JPSC-JSSC आंदोलन को एक नए चरण में पहुंचा दिया.

Photo 6 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 6

दोनों जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी, लेकिन घटनाक्रम अलग रहा. जंतर-मंतर से जुड़े प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई के बाद कनॉट प्लेस के पास पथराव और पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की घटना की रिपोर्ट सामने आई थी, जिसके बाद FIR भी दर्ज की गई. वहीं रांची में विधानसभा मार्च के दौरान छात्रों ने बैरिकेडिंग पार करने की कोशिश की. पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया और लाठीचार्ज की रिपोर्ट सामने आई. हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार रांची में कनॉट प्लेस जैसी पुलिस वाहनों में तोड़फोड़ की घटना सामने नहीं आई.

Photo 7 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 7

दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पोस्टरों और नारों में राजनीतिक व्यंग्य, मीम और तीखी भाषा देखने को मिली. प्रदर्शनकारियों की ओर से परीक्षा व्यवस्था और सरकार की जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए गए. वहीं रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थी झंडों और अपनी मांगों को लिखी तख्तियों के साथ प्रदर्शन करते नजर आए. यहां छात्रों का मुख्य जोर भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की जांच और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया पर रहा. हालांकि 10 अगस्त को बैरिकेडिंग पार करने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव भी देखने को मिला.

Photo 8 of 8
रांची विधानसभा में JPSC-JSSC के खिलाफ छात्रों का हल्लाबोल, दिल्ली के NEET आंदोलन से कितना अलग? - Photo 8

दोनों आंदोलनों का मूल मुद्दा परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में भरोसे और जवाबदेही से जुड़ा है, लेकिन उनका दायरा अलग है. जंतर-मंतर का आंदोलन NEET-UG 2026 और राष्ट्रीय परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर केंद्रित था, जबकि रांची का आंदोलन झारखंड की JPSC-JSSC भर्ती व्यवस्था को लेकर है. दिल्ली में बातचीत और राजनीतिक घटनाक्रम के बाद आंदोलन वापस लेने की घोषणा हुई, जबकि रांची में छात्रों और सरकार के बीच मांगों को लेकर गतिरोध बना हुआ है. अब रांची आंदोलन का अगला रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती है और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता को लेकर क्या कार्रवाई होती है.