गोड्डा की पहाड़ी पर बसा मां योगिनी धाम, जहां गुफा में विराजती हैं देवी

  • September 9, 2026 9:46 pm
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झारखंड के गोड्डा में पहाड़ की चोटी पर बसा मां योगिनी धाम आस्था और रहस्य का अनोखा संगम है. गुफा में विराजमान मां योगिनी और शक्तिपीठ से जुड़ी मान्यताएं इस मंदिर को खास बनाती हैं. यहां की सीढ़ियां, प्राकृतिक खूबसूरती और सदियों पुरानी धार्मिक परंपराएं हर श्रद्धालु को अपनी ओर खींचती हैं. जानिए मां योगिनी मंदिर का इतिहास, मान्यताएं और यहां घूमने से जुड़ी खास बातें.

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झारखंड के गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड में स्थित मां योगिनी मंदिर जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है. यह मंदिर पहाड़ी पर स्थित है और यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और पहाड़ी क्षेत्र इसे धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यटन के लिहाज से भी खास बनाता है. गोड्डा जिला प्रशासन के अनुसार, यह स्थल बारकोप क्षेत्र में है और जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर बताया गया है. यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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मां योगिनी मंदिर से जुड़ी सबसे प्रसिद्ध मान्यता शक्तिपीठ की है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान शिव माता सती के शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के अलग-अलग हिस्से किए. मान्यता है कि इसी क्रम में माता सती की जांघ का हिस्सा यहां गिरा था. इसी वजह से इस स्थान को पवित्र शक्तिस्थल माना जाता है. हालांकि, यह विवरण धार्मिक मान्यता और परंपरा पर आधारित है. गोड्डा जिला प्रशासन भी मंदिर को सती से जुड़ी इसी पौराणिक कथा के संदर्भ में बताता है.

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मां योगिनी मंदिर की सबसे खास बात यहां मौजूद गुफा और गर्भगृह है. पहाड़ी पर स्थित मुख्य पूजा स्थल तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु सीढ़ियां चढ़ते हैं और फिर गुफानुमा रास्ते से आगे बढ़ते हैं. जिला प्रशासन के अनुसार, पहाड़ी की चोटी तक पहुंचने के लिए करीब 400 सीढ़ियों का उल्लेख मिलता है, जबकि दूसरे आधिकारिक विवरण में 354 सीढ़ियों का उल्लेख है. इसलिए सीढ़ियों की संख्या अलग-अलग स्रोतों में अलग मिलती है. गुफा के भीतर देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप की पूजा की जाती है. यही रहस्यमयी गुफा इस मंदिर को दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देती है.

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मां योगिनी मंदिर को सिर्फ सामान्य धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि तंत्र साधना से जुड़े महत्वपूर्ण स्थान के रूप में भी जाना जाता है. स्थानीय और धार्मिक परंपराओं में इसे तांत्रिक साधकों के लिए विशेष महत्व वाला स्थान बताया जाता है. मंदिर के आसपास का पहाड़ी और अपेक्षाकृत शांत वातावरण इसकी आध्यात्मिक छवि को और मजबूत करता है. गोड्डा जिला प्रशासन के पर्यटन विवरण में भी मंदिर को तंत्र साधकों के बीच लोकप्रिय बताया गया है. मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ जुटने की जानकारी दी गई है. हालांकि, तंत्र साधना से जुड़े कई विवरण स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं का हिस्सा हैं.

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मां योगिनी धाम की पूजा परंपरा और यहां का प्राकृतिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. मंदिर का मुख्य धार्मिक केंद्र पहाड़ी के ऊपरी हिस्से में स्थित है और गुफा के अंदर देवी के प्रतीकात्मक स्वरूप की पूजा की जाती है. मंदिर के पास मौजूद मनोकामना मंदिर भी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र है. मान्यता के अनुसार, मां के दर्शन के बाद भक्त मनोकामना मंदिर में भी पूजा करते हैं. पहाड़ी, सीढ़ियां, गुफा और आसपास की हरियाली मिलकर इस स्थान को धार्मिक यात्रा के साथ एक अलग पर्यटन अनुभव भी देती है. यही वजह है कि यहां आस्था और प्रकृति दोनों का संगम देखने को मिलता है.

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मां योगिनी मंदिर आने वाले पर्यटकों के लिए गोड्डा और आसपास के क्षेत्र में कई अन्य आकर्षण भी हैं. सुंदर डैम, बासनत्राई और रत्नेश्वर धाम जैसे स्थल यात्रा को और खास बना सकते हैं. सुंदर डैम पथरगामा क्षेत्र के पास एक प्रमुख प्राकृतिक और पर्यटन स्थल है. वहीं बासनत्राई अपनी ऐतिहासिक और लोककथाओं के लिए प्रसिद्ध है. गोड्डा जिला प्रशासन ने इन स्थलों को जिले के प्रमुख आकर्षणों में शामिल किया है. इसलिए मां योगिनी मंदिर की यात्रा को केवल धार्मिक दर्शन तक सीमित न रखकर आसपास के प्राकृतिक और सांस्कृतिक स्थलों के साथ जोड़ा जा सकता है.

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मां योगिनी मंदिर गोड्डा जिले के पथरगामा प्रखंड में स्थित है. जिला प्रशासन के अनुसार, यह जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर और जसीडीह-देवघर राज्य मार्ग के आसपास स्थित है. रेल से आने वाले यात्रियों के लिए हंसडीहा रेलवे स्टेशन एक विकल्प है, जो मंदिर क्षेत्र से करीब 50 किलोमीटर दूर बताया गया है. हवाई यात्रा के लिए रांची और कोलकाता के हवाई अड्डों का उल्लेख जिला प्रशासन करता है. सड़क मार्ग से गोड्डा और आसपास के शहरों से मंदिर तक पहुंचा जा सकता है. यात्रा से पहले स्थानीय सड़क और परिवहन की वर्तमान स्थिति की जानकारी लेना बेहतर रहेगा.

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मां योगिनी मंदिर आज गोड्डा की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है. पहाड़ी पर स्थित मंदिर, गुफा, सीढ़ियों की चढ़ाई और शक्तिपीठ से जुड़ी मान्यताएं इसे खास बनाती हैं. यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह आस्था का केंद्र है, जबकि पर्यटकों के लिए यह झारखंड के कम चर्चित धार्मिक स्थलों को करीब से जानने का अवसर देता है. मंदिर के आसपास के प्राकृतिक स्थल इस यात्रा को और आकर्षक बनाते हैं. अगर यहां सड़क, सूचना बोर्ड, सुविधाओं और पर्यटन प्रबंधन को लगातार बेहतर किया जाए, तो मां योगिनी धाम गोड्डा के प्रमुख धार्मिक पर्यटन केंद्रों में और मजबूत पहचान बना सकता है.