जिस भोजपुरी को लोग ‘चीप’ कहते थे, उसे नई पहचान दे रहे हैं उत्पल उदित
बिहार की मिट्टी से निकली आवाज जब संगीत में गूंजती है, तो उसमें सिर्फ सुर नहीं, बल्कि लोकजीवन, भाषा और संस्कृति की कहानी भी सुनाई देती है. उत्पल उदित ने इसी आवाज को नई पहचान देने का प्रयास किया है. भोजपुरी के साथ मैथिली और मगही लोकसंगीत को नए अंदाज में पेश कर वह पुरानी लोकधुनों को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं. कभी जिस भोजपुरी संगीत को हल्के मनोरंजन तक सीमित समझा जाता था, आज वही संगीत नए प्रयोगों के साथ बड़े मंचों तक पहुंच रहा है. यह कहानी है एक ऐसे कलाकार की, जिसने अपनी मिट्टी को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया.












