पेपर लीक से कोर्ट तक अटकी भर्ती, हर बार क्यों पिसता है बिहार का छात्र?

  • August 22, 2026 4:07 pm
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बिहार में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भर्ती परीक्षाएं अब सिर्फ परीक्षा और रिजल्ट तक सीमित नहीं रह गई हैं. कहीं पेपर लीक, कहीं OMR में गड़बड़ी, कहीं ऑनलाइन सिस्टम में सेंध तो कहीं नियमों और कोर्ट के विवादों के कारण भर्तियां सालों तक अटकी रहती हैं. छात्र सालों मेहनत, फीस और समय लगाकर परीक्षा देते हैं, लेकिन एक गड़बड़ी पूरी प्रक्रिया को फिर शुरुआत में पहुंचा देती है. सवाल बड़ा है—जब गलती सिस्टम की है, तो हर बार इसकी कीमत छात्रों को ही क्यों चुकानी पड़ती है?

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बिहार में भर्ती परीक्षाओं की समस्या सिर्फ पेपर लीक तक सीमित नहीं है. कहीं परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र वायरल हुआ, कहीं OMR में छेड़छाड़ के आरोप लगे, तो कहीं ऑनलाइन परीक्षा में सुरक्षा सेंध की बात सामने आई. कई भर्तियां कोर्ट-कचहरी में वर्षों तक अटकी रहीं. इसका सबसे बड़ा असर उन छात्रों पर पड़ता है, जो कई साल तैयारी करने, फीस भरने और परीक्षा देने के बाद भी परिणाम का इंतजार करते रह जाते हैं. एक परीक्षा में गड़बड़ी होने पर पूरी प्रक्रिया दोबारा शुरू होती है और छात्रों को फिर उसी तैयारी, फीस और अनिश्चितता के दौर से गुजरना पड़ता है

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BPSC की कई परीक्षाएं विवादों में रही हैं. 67वीं CCE में परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र के डिजिटल रूप में वायरल होने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी और जांच EOU को सौंपी गई. TRE-3 शिक्षक भर्ती में भी परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को प्रश्न-उत्तर उपलब्ध कराने और सॉल्वर गैंग से जुड़े आरोप सामने आए, जिसके बाद परीक्षा रद्द हुई. वहीं Assistant Prosecution Officer परीक्षा में क्वालिफाइंग मार्क्स से जुड़े नियम को लेकर विवाद हुआ और मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा. 2026 में Sanitation Officer परीक्षा भी परीक्षा सुरक्षा और बायोमेट्रिक से जुड़ी गड़बड़ियों के कारण रद्द कर दी गई

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BSSC की परीक्षाओं का इतिहास भी विवादों से अछूता नहीं रहा. Auditor Exam 2012 में स्ट्रॉन्ग रूम से OMR से जुड़ी छेड़छाड़ का मामला सामने आया. Original OMR और अभ्यर्थियों की कार्बन कॉपी के मिलान में कथित गड़बड़ियां सामने आईं. 2017 की पहली Inter-Level CCE में पेपर लीक की जांच आयोग के अधिकारियों तक पहुंची और तत्कालीन सचिव व चेयरमैन की गिरफ्तारी हुई. 2022 की Third Graduate Level CCE में एक शिफ्ट का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद केवल उसी शिफ्ट को रद्द करने पर भी सवाल उठे. लगातार सामने आते विवादों ने परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े किए.

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बिहार में सिर्फ पेपर लीक ही छात्रों की परेशानी नहीं है. कई भर्तियां लंबे समय तक परीक्षा की तारीख का इंतजार करती रहती हैं. BSSC की Second Inter-Level CCE 2023 में 2025-26 तक फॉर्म री-ओपन और संशोधन जैसी प्रक्रियाएं चलती रहीं. छात्रों को लंबे समय तक परीक्षा का इंतजार करना पड़ा. CGL-4 के लिए जुलाई-अगस्त 2026 का संभावित कैलेंडर सामने आया, लेकिन पक्की परीक्षा तारीख को लेकर असमंजस बना रहा. लंबे इंतजार से छात्रों की उम्र, आर्थिक स्थिति और मानसिक दबाव पर असर पड़ता है. कई उम्मीदवार नौकरी की तैयारी के साथ दूसरी परीक्षाओं में भी अनिश्चितता झेलते हैं

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बिहार बोर्ड से जुड़ी परीक्षाओं में भी कई बार गंभीर मामले सामने आए हैं. Matric 2018 में गोपालगंज से हजारों जांची हुई कॉपियां गायब होने का मामला सामने आया. जांच में कॉपियों के कबाड़ी को बेचे जाने की बात सामने आई. STET 2019-20 में कदाचार और परीक्षा केंद्रों से जुड़ी गड़बड़ियों के बाद ऑफलाइन परीक्षा रद्द कर दोबारा ऑनलाइन परीक्षा कराई गई. 2021 में सोशल साइंस का प्रश्नपत्र WhatsApp पर वायरल होने का मामला सामने आया, जबकि 2022 में मोतिहारी में गणित के पेपर लीक की खबर सामने आई. इन घटनाओं ने परीक्षा सुरक्षा और मूल्यांकन व्यवस्था पर सवाल उठाए.

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डिजिटल परीक्षा व्यवस्था को सुरक्षित और आधुनिक विकल्प माना जाता है, लेकिन बिहार में ऑनलाइन परीक्षाओं को लेकर भी विवाद सामने आए. CSBC की 2023 कांस्टेबल भर्ती में प्रश्नपत्र की सुरक्षा और ट्रांसपोर्टेशन चेन से जुड़ी गड़बड़ियों के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. वहीं 2024 की CHO भर्ती की CBT परीक्षा में सॉल्वर गैंग द्वारा तकनीकी माध्यमों से परीक्षा में सेंध लगाने के आरोप सामने आए. बड़ी संख्या में गिरफ्तारियां हुईं और परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इन मामलों ने दिखाया कि तकनीक बढ़ने के साथ परीक्षा सुरक्षा के नए खतरे भी सामने आ रहे हैं. छात्रों का सवाल है—सिस्टम कितना सुरक्षित है?

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BTSC की Junior Engineer भर्ती भी लंबे समय तक कानूनी विवाद में फंसी रही. 2019 में निकली 6,379 पदों की भर्ती नियमों और योग्यता से जुड़े विवादों के कारण वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी. 2023 में राज्य सरकार ने चयन प्रक्रिया रद्द कर दी. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. अक्टूबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने पुरानी प्रक्रिया को इतने वर्षों बाद इस तरह रद्द करने के फैसले पर हस्तक्षेप किया. इस मामले ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया—अगर भर्ती प्रक्रिया में वर्षों लग जाएं और फिर नियम बदल जाएं, तो उम्मीदवारों के समय और मेहनत की भरपाई कौन करेगा?

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लगातार विवादों और देरी के बीच छात्रों की कुछ प्रमुख मांगें हैं. वे BPSC TRE-4, सब-इंस्पेक्टर और लाइब्रेरियन जैसी भर्तियों में Single Tier Exam की मांग कर रहे हैं. One Candidate, One Post नियम लागू करने की बात भी उठती रही है, ताकि सीटें खाली न रहें और जरूरत पड़ने पर वेटिंग लिस्ट जारी हो. बिहार के छात्रों के लिए डोमिसाइल नीति और स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता देने की मांग भी महत्वपूर्ण है. इसके अलावा BSSC समेत सभी आयोगों की भर्तियां तय कैलेंडर के अनुसार समय पर पूरी करने और परीक्षा में धांधली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है.

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हर भर्ती विवाद के बाद सबसे ज्यादा नुकसान उस छात्र का होता है, जिसने वर्षों तक तैयारी की होती है. कोचिंग, किताबों, यात्रा और परीक्षा फीस पर खर्च करने के बाद जब परीक्षा रद्द होती है, तो छात्र को फिर से तैयारी करनी पड़ती है. उम्र की सीमा पार होने का डर अलग रहता है. कई उम्मीदवारों के लिए एक भर्ती सिर्फ नौकरी का अवसर नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक स्थिति बदलने का सपना होती है. लेकिन परीक्षा की तारीख, रिजल्ट और कोर्ट के फैसले के इंतजार में कई साल निकल जाते हैं. सवाल यही है—गलती सिस्टम की हो, तो उसकी कीमत छात्र क्यों चुकाए?

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बिहार की भर्ती परीक्षाओं में बार-बार सामने आने वाली गड़बड़ियां केवल प्रश्नपत्र लीक होने की समस्या नहीं दिखातीं, बल्कि पूरी व्यवस्था पर भरोसे का सवाल खड़ा करती हैं. OMR से लेकर ऑनलाइन सर्वर, परीक्षा केंद्रों से लेकर वेंडर और नियमों से लेकर अदालतों तक, हर स्तर पर पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है. एक ईमानदार उम्मीदवार परीक्षा की तैयारी करता है, सिस्टम से निष्पक्षता की उम्मीद रखता है और अपने भविष्य का फैसला परिणाम पर छोड़ता है. अगर परीक्षा ही भरोसेमंद नहीं होगी, तो युवाओं का व्यवस्था पर विश्वास कैसे कायम रहेगा? बिहार के छात्रों की मांग अब सिर्फ नौकरी नहीं, एक निष्पक्ष भर्ती व्यवस्था भी है.