22 सीढ़ियां और अनगिनत मान्यताएं! क्या है पुरी की ‘बैसी पहाचा’ का रहस्य?

  • September 8, 2026 9:59 pm
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पुरी के विश्व प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर कदम अपने आप में एक कहानी कहता है. मंदिर के सिंह द्वार से भीतर प्रवेश करते ही श्रद्धालु 22 पवित्र सीढ़ियों को पार करते हैं, जिन्हें ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है. इन सीढ़ियों को लेकर सदियों से कई धार्मिक मान्यताएं, लोकविश्वास और आध्यात्मिक रहस्य जुड़े हुए हैं. कहीं इन्हें इंसान की कमजोरियों और सांसारिक बंधनों का प्रतीक माना जाता है, तो कहीं यम शिला से जुड़ी मान्यता भक्तों का ध्यान खींचती है. आखिर क्यों खास हैं ये 22 सीढ़ियां और क्या है इनके पीछे की मान्यता?

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ओडिशा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर अपनी भव्यता और अनोखी धार्मिक परंपराओं के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है. मंदिर में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं को 22 सीढ़ियां पार करनी पड़ती हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में ‘बैसी पहाचा’ कहा जाता है. ये सीढ़ियां सिंह द्वार क्षेत्र से मंदिर के मुख्य परिसर की ओर ले जाती हैं. सदियों से इन सीढ़ियों को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और आध्यात्मिक धारणाएं प्रचलित हैं. भक्तों के लिए बैसी पहाचा सिर्फ मंदिर तक पहुंचने का रास्ता नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ के दर्शन से पहले खुद को आध्यात्मिक रूप से तैयार करने का एक प्रतीक भी मानी जाती है.

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‘बैसी पहाचा’ ओड़िया भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना माना जाता है. ‘बैसी’ का अर्थ 22 और ‘पहाचा’ का अर्थ सीढ़ी है. यानी इसका सीधा अर्थ हुआ 22 सीढ़ियां. ये सीढ़ियां श्री जगन्नाथ मंदिर के सिंह द्वार क्षेत्र में स्थित हैं और मंदिर परिसर की ओर जाने वाले प्रमुख मार्ग का हिस्सा हैं. रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन्हें पार कर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दर्शन के लिए आगे बढ़ते हैं. इन सीढ़ियों से जुड़ी धार्मिक मान्यताएं पीढ़ियों से भक्तों के बीच चली आ रही हैं. इसी वजह से बैसी पहाचा मंदिर की धार्मिक परंपरा और श्रद्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है.

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बैसी पहाचा की 22 सीढ़ियों को लेकर अलग-अलग धार्मिक और लोकमान्यताएं प्रचलित हैं. कुछ आध्यात्मिक व्याख्याओं में इन्हें इंसान की कमजोरियों, सांसारिक इच्छाओं और जीवन के बंधनों का प्रतीक माना जाता है. मान्यता के अनुसार, भक्त जब एक-एक सीढ़ी चढ़ता है तो वह प्रतीकात्मक रूप से अपने भीतर मौजूद नकारात्मक भावों से ऊपर उठने की कोशिश करता है. मोह, अहंकार, क्रोध और सांसारिक आकर्षण जैसी प्रवृत्तियों को पीछे छोड़कर भगवान के प्रति समर्पित होने का भाव इससे जोड़ा जाता है. हालांकि, इन 22 सीढ़ियों का यही एक निश्चित धार्मिक अर्थ है, ऐसा कहना उचित नहीं होगा. इनके अर्थ को लेकर अलग-अलग परंपराएं और व्याख्याएं मिलती हैं.

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बैसी पहाचा से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यताओं में ‘यम शिला’ का उल्लेख मिलता है. लोकविश्वास के अनुसार, इन सीढ़ियों में एक विशेष पत्थर है, जिसे यम शिला कहा जाता है. मान्यता है कि मंदिर में प्रवेश करते समय इस शिला पर पैर रखने से व्यक्ति के पापों से मुक्ति का आशीर्वाद मिलता है. वहीं मंदिर से बाहर निकलते समय इस शिला पर पैर रखने को लेकर एक अलग धार्मिक धारणा है. कहा जाता है कि ऐसा करने से भगवान जगन्नाथ के दर्शन से प्राप्त पुण्य प्रभावित हो सकता है. हालांकि, यह धार्मिक लोकमान्यता है और इसके बारे में अलग-अलग परंपराओं में अलग विवरण मिलते हैं.

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भगवान जगन्नाथ मंदिर की बैसी पहाचा को केवल मंदिर की सीढ़ियों के रूप में देखना इसकी आध्यात्मिक महत्ता को सीमित कर सकता है. भक्तों के लिए इन 22 चरणों को भीतर की यात्रा का प्रतीक भी माना जाता है. बाहर से मंदिर के भीतर प्रवेश करते हुए इंसान अपने मन को शांत करने और सांसारिक चिंताओं को पीछे छोड़ने का भाव रखता है. हर सीढ़ी के साथ भगवान के प्रति श्रद्धा और समर्पण बढ़ने की कल्पना की जाती है. यही वजह है कि बैसी पहाचा को भक्तों की आस्था में खास स्थान मिला है. यह संदेश देती है कि मंदिर की यात्रा के साथ-साथ मन की यात्रा भी जरूरी है.

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कुछ धार्मिक व्याख्याओं में बैसी पहाचा की 22 सीढ़ियों को मानव जीवन से जुड़े दोषों और कमजोरियों से जोड़कर देखा जाता है. इनके अनुसार, इंसान के भीतर मौजूद मोह, अहंकार, क्रोध, लोभ और दूसरी नकारात्मक प्रवृत्तियां उसे आध्यात्मिक शांति से दूर कर सकती हैं. मंदिर की सीढ़ियां चढ़ते समय इन प्रवृत्तियों को पीछे छोड़ने का भाव मन में रखने की बात कही जाती है. इस नजरिए से हर चरण आत्मसंयम, आत्मचिंतन और सकारात्मक बदलाव की ओर बढ़ने का प्रतीक बन जाता है. हालांकि, 22 चरणों से जुड़ी ऐसी व्याख्याएं मुख्य रूप से धार्मिक और लोकपरंपराओं पर आधारित हैं, जिन्हें श्रद्धा के नजरिए से समझा जाता है.

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पुरी की बैसी पहाचा सिर्फ 22 पत्थर की सीढ़ियां नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ की नगरी की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है. हर दिन हजारों श्रद्धालु इन सीढ़ियों को पार करते हुए मंदिर के भीतर पहुंचते हैं. किसी के लिए यह भगवान के दर्शन तक पहुंचने का मार्ग है, तो किसी के लिए आत्मचिंतन और समर्पण का प्रतीक. यम शिला से जुड़ी मान्यता हो या 22 चरणों को मानव जीवन की कमजोरियों से जोड़ने वाली आध्यात्मिक व्याख्या—इन सबने बैसी पहाचा को खास बना दिया है. यही वजह है कि पुरी आने वाले भक्तों के लिए इन सीढ़ियों को पार करना भी आस्था और श्रद्धा से भरा अनुभव माना जाता है.