दनिया का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर, जहां पहुंचते ही बदल जाती है किस्मत......

  • September 3, 2026 10:30 pm
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हिमालय की ऊंची चोटियों के बीच बसा एक ऐसा कृष्ण धाम, जहां पहुंचना किसी रोमांचक सफर से कम नहीं. किन्नौर के युल्ला कांडा में स्थित इस मंदिर से जुड़ी हैं पांडवों, पवित्र झील और मनोकामना पूरी होने की अनोखी मान्यताएं. जन्माष्टमी पर यहां होने वाली खास परंपराएं इसे और भी रहस्यमयी बना देती हैं. आखिर क्या है इस मंदिर की कहानी और क्यों इसे किस्मत बदलने वाला धाम माना जाता है?

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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित युल्ला कांडा अपने बेहद खूबसूरत प्राकृतिक नजारों के साथ भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. ऊंचे हिमालयी क्षेत्र में मौजूद इस मंदिर तक पहुंचना अपने आप में एक रोमांचक अनुभव है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को पहाड़ी रास्तों पर ट्रैकिंग करनी पड़ती है. चारों ओर बर्फीली चोटियां, हरियाली और शांत वातावरण इस जगह को बेहद खास बनाते हैं. मान्यताओं और प्राकृतिक खूबसूरती का अनोखा संगम होने के कारण युल्ला कांडा को किन्नौर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिना जाता है.

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युल्ला कांडा का सफर आम मंदिरों से बिल्कुल अलग है. यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को हिमालय के दुर्गम रास्तों से होकर लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है. ऊंचाई और कठिन पहाड़ी रास्ते इस यात्रा को चुनौतीपूर्ण बनाते हैं. लेकिन भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन की आस्था लोगों को इस मुश्किल सफर के लिए प्रेरित करती है. रास्ते में दिखाई देने वाले पहाड़, घाटियां और प्राकृतिक दृश्य यात्रियों की थकान कम कर देते हैं. यही वजह है कि युल्ला कांडा की यात्रा धार्मिक अनुभव के साथ-साथ एक यादगार हिमालयी ट्रेक भी बन जाती है.

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युल्ला कांडा की सबसे खास बात यहां मौजूद मंदिर और उसके आसपास की पवित्र झील है. मंदिर का संबंध स्थानीय धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं से जुड़ा हुआ है. शांत पहाड़ों के बीच स्थित झील इस पूरे क्षेत्र की खूबसूरती को और बढ़ा देती है. स्थानीय लोगों के बीच इस झील को लेकर कई धार्मिक कथाएं प्रचलित हैं. श्रद्धालुओं के लिए यह जगह सिर्फ एक मंदिर नहीं, बल्कि आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम है। झील के किनारे पहुंचकर आसपास का वातावरण बेहद शांत और आध्यात्मिक महसूस होता है.

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युल्ला कांडा की झील को लेकर स्थानीय मान्यता बेहद दिलचस्प है. कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास के दौरान इस झील का निर्माण किया था और इसे भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित किया था. मान्यता है कि भगवान कृष्ण ने पांडवों को यहां दर्शन भी दिए थे. हालांकि ये बातें धार्मिक और स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं, लेकिन यही कथाएं युल्ला कांडा को श्रद्धालुओं के बीच खास बनाती हैं. इसी वजह से इस स्थान को लेकर लोगों की आस्था पीढ़ियों से बनी हुई है और दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.

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ऊंचे पहाड़ों के बीच स्थित युल्ला कांडा की प्राकृतिक खूबसूरती इसे किसी स्वर्ग से कम नहीं लगने देती. स्थानीय मान्यताओं के कारण कुछ लोग इस जगह को ‘स्वर्ग का द्वार’ भी कहते हैं. यहां का शांत वातावरण, पवित्र झील और हिमालयी दृश्य श्रद्धालुओं को अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव देते हैं. मंदिर तक पहुंचने का कठिन रास्ता भी इस यात्रा को खास बनाता है. मान्यता, प्रकृति और रोमांच—तीनों का मेल युल्ला कांडा को हिमाचल के अनोखे धार्मिक स्थलों में शामिल करता है.

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युल्ला कांडा में जन्माष्टमी का उत्सव बेहद खास माना जाता है. इस अवसर पर किन्नौर और हिमाचल प्रदेश के दूसरे हिस्सों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. पहाड़ों के बीच होने वाला यह धार्मिक आयोजन स्थानीय संस्कृति और परंपराओं की खूबसूरत झलक दिखाता है. जन्माष्टमी के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और पूरा क्षेत्र भक्तिमय माहौल में बदल जाता है. दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ भगवान कृष्ण के दर्शन का अवसर नहीं, बल्कि किन्नौर की अनोखी धार्मिक परंपराओं को करीब से देखने का अनुभव भी होता है.

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जन्माष्टमी से जुड़ी एक अनोखी स्थानीय परंपरा भी युल्ला कांडा को खास बनाती है. मान्यता के अनुसार श्रद्धालु किन्नौरी टोपी को उल्टा करके मंदिर के पास स्थित झील में डालते हैं. ऐसी आस्था है कि अगर टोपी पानी में डूबे बिना झील के दूसरे छोर तक पहुंच जाए, तो इसे मनोकामना पूरी होने और आने वाला साल शुभ रहने का संकेत माना जाता है. यह परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है और किन्नौर की धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती है

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युल्ला कांडा में जन्माष्टमी उत्सव की परंपरा बुशहर रियासत के समय से चली आ रही बताई जाती है. स्थानीय परंपरा के अनुसार राजा केहरी सिंह के समय शुरू हुआ यह आयोजन आज एक बड़े मेले का रूप ले चुका है. किन्नौर के साथ हिमाचल के दूसरे क्षेत्रों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. कठिन ट्रैकिंग के बावजूद लोगों की आस्था उन्हें इस ऊंचाई तक खींच लाती है. यही आस्था, अनोखी परंपराएं और हिमालय की खूबसूरती युल्ला कांडा को एक ऐसी जगह बनाती हैं, जहां धर्म और प्रकृति एक साथ दिखाई देते हैं.