कौन थे नीम करोली बाबा? दुनिया को राह दिखाने वाले उस संत की कहानी...

  • September 5, 2026 6:04 pm
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एक ऐसे संत, जिनका जीवन सादगी, सेवा और आध्यात्मिक शक्ति की कहानियों से भरा रहा. जिनका नाम एक रहस्यमयी ट्रेन घटना से जुड़ा और जिनका आश्रम आज दुनिया के सबसे चर्चित आध्यात्मिक स्थलों में गिना जाता है. कैंची धाम से लेकर स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग तक, नीब करौरी बाबा की कहानी भारत की आध्यात्मिक विरासत और आधुनिक दुनिया के बीच एक अनोड़ा रिश्ता दिखाती है. आखिर कौन थे नीब करौरी बाबा? कैसे एक साधारण तपस्वी लाखों लोगों के लिए ‘महाराजजी’ बन गए और क्यों आज भी देश-दुनिया से लोग उनके आश्रम की ओर खिंचे चले आते हैं? जानिए बाबा के जीवन, उनकी शिक्षाओं, चमत्कारों और कैंची धाम से जुड़ी पूरी कहानी.

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नीब करौरी बाबा भारत के प्रसिद्ध संतों में से एक माने जाते हैं. उनका जन्म उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गाँव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका असली नाम लक्ष्मण नारायण शर्मा बताया जाता है. बचपन से ही उनका मन सांसारिक जीवन से ज्यादा अध्यात्म की ओर आकर्षित था. युवावस्था में उन्होंने घर-बार छोड़ दिया और एक तपस्वी की तरह देश के अलग-अलग हिस्सों में भ्रमण करने लगे. सादगी, सेवा और भक्ति उनके जीवन का आधार बनी. आगे चलकर उनके भक्तों ने उन्हें प्रेम से ‘महाराजजी’ कहकर पुकारना शुरू किया. आज उनके अनुयायी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में हैं.

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नीब करौरी बाबा के नाम से जुड़ी सबसे चर्चित कहानी एक ट्रेन यात्रा की है. कहा जाता है कि एक बार बाबा बिना टिकट ट्रेन में सफर कर रहे थे. टिकट जांचने वाले अधिकारी ने उन्हें उत्तर प्रदेश के नीब करौरी गाँव के पास ट्रेन से उतार दिया. लेकिन उनके उतरने के बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी. काफी कोशिशों के बावजूद ट्रेन वहीं खड़ी रही. लोगों के बीच यह बात फैल गई कि बाबा कोई साधारण संत नहीं हैं. अंत में अधिकारियों ने उनसे माफी मांगी और उन्हें दोबारा ट्रेन में बैठने का अनुरोध किया. बाबा के ट्रेन में बैठने के बाद ट्रेन चल पड़ी. इसी घटना के बाद वे ‘नीब करौरी बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हुए.

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उत्तराखंड के नैनीताल के पास स्थित कैंची धाम नीब करौरी बाबा से जुड़ा सबसे प्रसिद्ध आध्यात्मिक स्थल है. वर्ष 1964 में स्थापित इस आश्रम ने धीरे-धीरे देश-विदेश में अपनी अलग पहचान बना ली. पहाड़ों और हरियाली से घिरा यह स्थान आज हजारों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है. भक्त यहां बाबा का आशीर्वाद लेने और मानसिक शांति पाने आते हैं. कैंची धाम में होने वाला वार्षिक स्थापना दिवस भी बेहद प्रसिद्ध है. बाबा के भक्तों का मानना है कि इस जगह का वातावरण उन्हें भीतर से सकारात्मक ऊर्जा देता है. यही वजह है कि कैंची धाम आज केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि दुनिया भर में आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है.

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नीब करौरी बाबा का जीवन जितना सरल था, उनकी शिक्षाएं भी उतनी ही सहज थीं. वे कठिन आध्यात्मिक ज्ञान या जटिल नियमों की बजाय इंसानियत और सेवा को महत्व देते थे. उनकी सबसे प्रसिद्ध सीख मानी जाती है, “सबकी सेवा करो, सबसे प्यार करो, भगवान को याद करो और सच बोलो.” बाबा के लिए भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं थी. वे भूखों को भोजन कराने, जरूरतमंदों की मदद करने और दूसरों के प्रति दया रखने को भी ईश्वर की सेवा मानते थे. उनके संदेश में प्रेम, करुणा और सच्चाई सबसे ऊपर थे. यही सरल विचार आज भी उनके लाखों अनुयायियों को प्रेरित करते हैं.

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नीब करौरी बाबा के जीवन से कई ऐसी घटनाएं जुड़ी हैं, जिन्हें उनके भक्त चमत्कार मानते हैं. कैंची धाम के भंडारे से जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा के अनुसार, एक बार भंडारे में घी कम पड़ गया था, कहा जाता है कि बाबा के निर्देश पर नदी का पानी कड़ाही में डाला गया और वह घी में बदल गया. ऐसी कई कहानियां भक्तों के बीच आज भी सुनाई जाती हैं. कुछ अनुयायियों का दावा है कि बाबा बिना बताए लोगों के मन की बात समझ लेते थे और उनकी परेशानियों का समाधान करते थे. हालांकि इन घटनाओं का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है, लेकिन भक्तों के लिए ये बाबा की आध्यात्मिक शक्ति और आस्था का हिस्सा हैं.

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नीब करौरी बाबा का नाम दुनिया की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री के दिग्गज स्टीव जॉब्स से भी जोड़ा जाता है. जीवन के एक कठिन दौर में जॉब्स भारत आए थे और आध्यात्मिक शांति की तलाश में कैंची धाम पहुंचना चाहते थे. हालांकि उनके पहुंचने से पहले ही बाबा 1973 में महासमाधि ले चुके थे. इसके बावजूद कैंची धाम और भारत की आध्यात्मिक परंपराओं से मिली प्रेरणा ने जॉब्स पर गहरा प्रभाव डाला. बाद में उन्होंने भारत की अपनी यात्रा और यहां मिले अनुभवों को अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा माना. यही वजह है कि आज कैंची धाम की चर्चा दुनिया के टेक्नोलॉजी जगत से भी जुड़ती है.

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नीब करौरी बाबा का प्रभाव केवल भारत तक सीमित नहीं रहा. फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग का नाम भी कैंची धाम से जुड़ा है. जुकरबर्ग ने बताया था कि जब फेसबुक कठिन दौर से गुजर रहा था, तब स्टीव जॉब्स ने उन्हें भारत के कैंची धाम जाने की सलाह दी थी. वर्ष 2015 में भारत यात्रा के दौरान जुकरबर्ग कैंची धाम पहुंचे. उन्होंने बाद में इस अनुभव को अपने जीवन की महत्वपूर्ण यात्राओं में शामिल किया. उनके मुताबिक, इस यात्रा ने उन्हें अपने काम और उद्देश्य को नए नजरिए से देखने में मदद की. इससे कैंची धाम और नीब करौरी बाबा की लोकप्रियता दुनियाभर में और बढ़ गई.

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11 सितंबर 1973 को नीब करौरी बाबा ने अपने नश्वर शरीर का त्याग कर महासमाधि ली. लेकिन उनके अनुयायियों के लिए बाबा की कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. आज भी कैंची धाम और देश के दूसरे आश्रमों में हजारों भक्त उनके दर्शन और आशीर्वाद की भावना लेकर पहुंचते हैं. उनकी तस्वीर, उनकी शिक्षाएं और सेवा का संदेश भक्तों के जीवन का हिस्सा बना हुआ है. बाबा ने लोगों को प्रेम, सेवा, सच्चाई और ईश्वर-स्मरण का रास्ता दिखाया. यही कारण है कि दशकों बाद भी उनकी लोकप्रियता कम नहीं हुई. भक्तों का विश्वास है कि बाबा भले ही शरीर रूप में नहीं हैं, लेकिन उनकी शिक्षाएं आज भी लोगों को सही राह दिखा रही हैं.