JPSC-JSSC आंदोलन के 7 चेहरे! जिनके अनशन से सरकार पर बढ़ा दबाव

  • August 6, 2026 8:16 pm
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झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है. रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शांतिपूर्ण धरने पर बैठे हैं, जबकि कई युवा अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं. इन छात्रों का कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और कथित गड़बड़ियों के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है. इस आंदोलन के केंद्र में सात ऐसे युवा हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष और दृढ़ संकल्प से पूरे राज्य का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. आइए जानते हैं उन सात चेहरों के बारे में, जो इस आंदोलन की सबसे मजबूत आवाज़ बनकर उभरे हैं.

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देवेंद्रनाथ महतो इस छात्र आंदोलन का सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरे हैं. उन्होंने 2 अगस्त से JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की. शुरुआत में उन्होंने अन्न और पानी दोनों त्याग दिए थे, लेकिन तबीयत बिगड़ने पर सोनम वांगचुक की अपील के बाद केवल पानी पीना स्वीकार किया. इसके बावजूद उनका अनशन लगातार जारी है और वे पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया की मांग पर अड़े हुए हैं.

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रामगढ़ के रहने वाले 30 वर्षीय ब्रह्मानंद कुमार महतो बॉटनी में पीएचडी कर चुके हैं, लेकिन आज भी सरकारी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं. वह कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में बारिश और कठिन परिस्थितियों के बीच खुले आसमान के नीचे भूख हड़ताल पर बैठे हैं. उनका कहना है कि योग्य अभ्यर्थियों को उनका हक मिलना चाहिए और भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए.

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रांची की JPSC अभ्यर्थी उम्मे हबीबा इस आंदोलन की प्रमुख महिला आवाज़ बनकर सामने आई हैं. लंबे समय तक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल रहने के बाद उन्होंने भी भूख हड़ताल शुरू कर दी. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को पारदर्शी और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया का अधिकार मिलना चाहिए. उनकी भागीदारी ने आंदोलन को और अधिक मजबूत बनाया है.

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रूपेश कुमार छात्र नेता के रूप में आंदोलन को संगठित करने और अभ्यर्थियों की आवाज़ सरकार तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं. वह भी अन्य प्रदर्शनकारियों के साथ भूख हड़ताल में शामिल हो चुके हैं. उनका कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, समय पर नियुक्ति और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच ही आंदोलन की सबसे बड़ी मांग है.

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अर्चना कुमारी ने भी अन्य महिला अभ्यर्थियों के साथ अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की है. उनका मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं की मेहनत तभी सफल होगी जब भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी. उनका आंदोलन यह संदेश देता है कि अब छात्राओं की भागीदारी भी इस लड़ाई में लगातार बढ़ रही है.

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सबिता कुमारी इस आंदोलन में भूख हड़ताल पर बैठने वाली प्रमुख महिला अभ्यर्थियों में शामिल हैं. उनका कहना है कि वर्षों की मेहनत के बाद भी यदि भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो युवाओं का भरोसा कमजोर होता है. इसलिए वह पारदर्शी भर्ती व्यवस्था, समय पर नियुक्ति और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर आंदोलन में डटी हुई हैं.

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40 वर्षीय राहुल क्रांति कुमार पिछले लगभग 20 वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं. उनका दावा है कि हाई स्कूल TGT परीक्षा में अच्छे अंक मिलने के बावजूद उनका चयन नहीं हुआ. आज वह परिवार का खर्च चलाने के लिए ट्यूशन पढ़ाते हैं. उनकी कहानी उन हजारों अभ्यर्थियों की पीड़ा को सामने लाती है, जो वर्षों की मेहनत के बाद भी नौकरी की उम्मीद में संघर्ष कर रहे हैं.