400 साल पुराना वन देवी मंदिर… सूर्यास्त के बाद यहां क्यों थम जाते हैं कदम? सिद्धार्थ-तमन्ना की फिल्म ने बढ़ाया रहस्य

  • September 18, 2026 11:03 pm
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बिहार के बिहटा के पास स्थित करीब 400 साल पुराने वन देवी मंदिर से जुड़ी रहस्यमयी मान्यताएं एक बार फिर चर्चा में हैं, कहा जाता है कि घने जंगलों के बीच स्थित इस मंदिर में दिन के समय श्रद्धालु दर्शन करते हैं, लेकिन सूर्यास्त के बाद यहां रुकने से लोग बचते हैं. स्थानीय लोककथाओं में वन देवी के रात में जंगल में विचरण करने की बातें कही जाती हैं. फिल्मी चर्चा के बाद इस मंदिर की रहस्यमयी कहानी ने लोगों की जिज्ञासा और बढ़ा दी है.

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बिहार के बिहटा के पास स्थित एक प्राचीन वन देवी मंदिर इन दिनों चर्चा में है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर करीब 400 साल पुराना बताया जाता है. घने जंगल और सुनसान माहौल के बीच स्थित इस मंदिर से कई रहस्यमयी कहानियां जुड़ी हैं. मान्यता है कि यहां विराजमान देवी की पूजा लंबे समय से होती आ रही है. दिन में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं, लेकिन सूर्यास्त के बाद यहां का माहौल पूरी तरह बदल जाता है.

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यह रहस्यमयी मंदिर बिहार के बिहटा क्षेत्र के पास स्थित बताया जाता है, जो राजधानी पटना से लगभग 35 किलोमीटर पश्चिम दिशा में है. मंदिर के आसपास कभी घना जंगल हुआ करता था. इसी जंगल से जुड़ी मान्यता के कारण यहां विराजमान देवी को ‘वन देवी’ कहा जाने लगा. आज भले ही आसपास का इलाका काफी बदल चुका है, लेकिन मंदिर से जुड़ी पुरानी लोककथाएं और मान्यताएं अब भी स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं.

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स्थानीय मान्यता के मुताबिक, पुराने समय में मंदिर चारों ओर से घने जंगलों से घिरा हुआ था. जंगल के बीच देवी की पूजा होने के कारण उनका नाम वन देवी पड़ गया. ग्रामीणों के बीच इस मंदिर को लेकर कई पीढ़ियों से अलग-अलग कहानियां सुनाई जाती रही हैं. हालांकि इन कहानियों का बड़ा हिस्सा स्थानीय आस्था और लोकविश्वास पर आधारित है. यही रहस्यमय वातावरण इस मंदिर को दूसरे धार्मिक स्थलों से अलग पहचान देता है.

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मंदिर से जुड़ी सबसे चर्चित मान्यता सूर्यास्त के बाद की है. स्थानीय लोगों के अनुसार, शाम होते ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. पूजा-पाठ पूरा करने के बाद पुजारी भी वहां से चले जाते हैं. रात में मंदिर और इसके आसपास के क्षेत्र में किसी के रुकने की अनुमति नहीं होने की बात कही जाती है. इसी नियम और सुनसान जंगल के कारण शाम के बाद मंदिर का इलाका लोगों के बीच रहस्य और कौतूहल का केंद्र बन जाता है.

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स्थानीय मान्यता है कि सूर्यास्त के बाद वन देवी जंगल में विचरण करती हैं. इसी विश्वास के चलते लोग रात में मंदिर या आसपास के जंगल में जाने से बचते हैं. कुछ लोककथाओं में अदृश्य शक्तियों और रहस्यमय जीवों के पहरे की बातें भी कही जाती हैं. हालांकि इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है. फिर भी पीढ़ियों से चली आ रही मान्यताओं ने इस मंदिर के आसपास रहस्य और डर की एक अलग कहानी बना दी है.

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सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया स्टारर फिल्म ‘The Vvaan: Force of the Forrest’ की कहानी के संदर्भ में वन देवी मंदिर का नाम फिर चर्चा में आया है. फिल्म की कहानी और मंदिर से जुड़ी लोकमान्यताओं के बीच समानताओं को लेकर दर्शकों की दिलचस्पी बढ़ी है. खासतौर पर जंगल, वन देवी और सूर्यास्त के बाद की रहस्यमयी मान्यताओं ने लोगों का ध्यान खींचा है. इससे इस प्राचीन मंदिर को लेकर ऑनलाइन चर्चाएं भी बढ़ी हैं.

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वन देवी मंदिर की कहानी में धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और जंगल से जुड़ी रहस्यमयी कल्पनाएं एक साथ दिखाई देती हैं. दिन के समय यहां पूजा और दर्शन की परंपरा नजर आती है, जबकि शाम के बाद मंदिर से जुड़ी सावधानियां और मान्यताएं चर्चा में रहती हैं. यही विरोधाभास इस स्थान को खास बनाता है. स्थानीय लोगों के लिए यह देवी का पवित्र स्थान है, वहीं बाहरी लोगों के लिए इससे जुड़ी कहानियां जिज्ञासा और रहस्य पैदा करती हैं.

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वन देवी मंदिर से जुड़ी कई कहानियां स्थानीय लोगों की मान्यताओं और पीढ़ियों से चली आ रही लोककथाओं पर आधारित हैं. सूर्यास्त के बाद देवी के जंगल में विचरण करने या अदृश्य शक्तियों की मौजूदगी जैसे दावों का कोई स्थापित वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं है. फिर भी इस मंदिर की प्राचीनता, जंगल का वातावरण और शाम के बाद से जुड़ी परंपराएं इसे रहस्यमयी बनाती हैं. यही वजह है कि आज भी वन देवी मंदिर लोगों की जिज्ञासा बढ़ाता है.