बिहार का 15 साल का बेटा… आज क्रिकेट की दुनिया में मचा रहा तहलका

  • September 11, 2026 11:08 pm
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बिहार के समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से निकला 15 साल का वैभव सूर्यवंशी आज क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहा है। जिस उम्र में बच्चे क्रिकेट को सिर्फ खेल समझते हैं, वैभव ने उसी उम्र में इसे अपना जुनून बना लिया.कम उम्र, सीमित सुविधाएं और लंबी प्रैक्टिस के बावजूद उन्होंने मेहनत का साथ नहीं छोड़ा. रणजी ट्रॉफी से लेकर आईपीएल और अंडर-19 क्रिकेट तक, वैभव का सफर रिकॉर्ड और उपलब्धियों से भरा है. उनकी कहानी बताती है कि अगर जुनून सच्चा हो, तो उम्र कभी सफलता के रास्ते में दीवार नहीं बनती.

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बिहार की धरती ने भारतीय क्रिकेट को एक नया सितारा दिया है—वैभव सूर्यवंशी. महज 15 साल की उम्र में वैभव अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और बेखौफ अंदाज से क्रिकेट जगत का ध्यान खींच रहे हैं. समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से निकलकर बड़े मैदानों तक पहुंचने का उनका सफर आसान नहीं था. क्रिकेट उनके लिए सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि बचपन से ही जुनून था. छोटी उम्र, बड़ा सपना और उसे पूरा करने की जिद ने वैभव को आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बना दिया है.

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वैभव की क्रिकेट यात्रा के पीछे उनके पिता का भी बड़ा योगदान रहा है. उनके पिता खुद क्रिकेटर बनने का सपना देखते थे, लेकिन परिस्थितियों के कारण उनका सपना पूरा नहीं हो सका. जब उन्होंने बेटे में क्रिकेट के प्रति लगन देखी, तो उन्होंने अपना अधूरा सपना वैभव के साथ जीना शुरू कर दिया. परिवार ने सुविधाओं की कमी को कभी वैभव की मेहनत के रास्ते में नहीं आने दिया. पिता का विश्वास और बेटे का जुनून धीरे-धीरे उस सपने को हकीकत में बदलने लगा.

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वैभव के हाथ में बहुत छोटी उम्र से ही बल्ला आ गया था. क्रिकेट के प्रति उनका लगाव ऐसा था कि बचपन से ही उन्होंने खेल को गंभीरता से लेना शुरू कर दिया. बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें कम उम्र में लंबे सफर भी करने पड़े. बताया जाता है कि महज 8 साल की उम्र में वह नियमित रूप से करीब 100 किलोमीटर तक यात्रा कर अभ्यास के लिए जाते थे. जिस उम्र में बच्चे खेल को सिर्फ मनोरंजन मानते हैं, उस उम्र में वैभव अपने क्रिकेटिंग भविष्य के लिए पसीना बहा रहे थे.

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सुविधाएं सीमित थीं, लेकिन सपनों की कोई सीमा नहीं थी. वैभव के परिवार ने उनकी प्रैक्टिस के लिए घर के पास ही नेट की व्यवस्था कराई, ताकि वह लगातार बल्लेबाजी का अभ्यास कर सकें. यही जगह उनकी मेहनत की असली प्रयोगशाला बन गई. घंटों तक बल्लेबाजी, शॉट्स की प्रैक्टिस और अपनी गलतियों को सुधारने का सिलसिला चलता रहा. इस छोटे से प्रैक्टिस नेट से शुरू हुई मेहनत ने धीरे-धीरे वैभव को बड़े क्रिकेट मैदानों तक पहुंचा दिया.

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बहुत कम उम्र में वैभव ने घरेलू क्रिकेट के सबसे बड़े मंचों में से एक रणजी ट्रॉफी तक का सफर तय कर लिया. महज 12 साल की उम्र में रणजी ट्रॉफी में डेब्यू करना किसी भी युवा खिलाड़ी के लिए असाधारण उपलब्धि थी. उम्र भले ही कम थी, लेकिन उनके सामने अनुभवी गेंदबाज और बड़े मुकाबले थे. वैभव ने इस मौके को सिर्फ एक मैच नहीं, बल्कि अपने करियर की बड़ी शुरुआत बनाया. इतनी कम उम्र में रणजी क्रिकेट तक पहुंचना उनके टैलेंट और लगातार मेहनत की कहानी कहता है.

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वैभव सूर्यवंशी ने अपनी बल्लेबाजी से अंतरराष्ट्रीय जूनियर क्रिकेट में भी जबरदस्त पहचान बनाई. ऑस्ट्रेलिया अंडर-19 टीम के खिलाफ उन्होंने सिर्फ 58 गेंदों में शतक लगाकर अपनी प्रतिभा का बड़ा परिचय दिया. यह भारतीय अंडर-19 क्रिकेट के सबसे तेज शतकों में शामिल उपलब्धियों में से एक रहा. उनकी बल्लेबाजी में आक्रामकता के साथ आत्मविश्वास भी नजर आया. इस पारी के बाद क्रिकेट जगत की नजरें इस युवा बल्लेबाज पर टिक गईं और यह साफ हो गया कि वैभव बड़े मंच के लिए तैयार हैं.

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कम उम्र में ही वैभव ने राजस्थान रॉयल्स के साथ जुड़कर आईपीएल की दुनिया में कदम रखा. बड़े-बड़े अंतरराष्ट्रीय गेंदबाजों के सामने खेलने का दबाव किसी युवा खिलाड़ी को परेशान कर सकता है, लेकिन वैभव का अंदाज अलग दिखा. वह आक्रामक शॉट्स, लंबे छक्कों और निडर बल्लेबाजी के लिए चर्चा में रहे. उनकी सबसे बड़ी खासियत यही है कि वह सिर्फ दबाव झेलने की कोशिश नहीं करते, बल्कि अपनी बल्लेबाजी से विपक्षी टीम पर दबाव बनाते हैं. यही आत्मविश्वास उन्हें खास बनाता है.

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वैभव सूर्यवंशी की कहानी सिर्फ क्रिकेट की कहानी नहीं है, बल्कि सपनों पर भरोसा रखने की कहानी है. छोटे गांव से शुरुआत, सीमित संसाधन, लंबी यात्राएं, लगातार अभ्यास और परिवार का साथ—इन सबने मिलकर एक युवा खिलाड़ी को दुनिया के सामने खड़ा कर दिया. उनकी यात्रा हर उस बच्चे को प्रेरणा देती है, जो छोटे शहर या सीमित सुविधाओं के कारण अपने सपनों को छोटा समझता है. उम्र छोटी हो सकती है, शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन अगर इरादे बड़े हों तो मंजिल भी बड़ी हो सकती है.