भूलती कला को मिली नई उड़ान, सुभद्रा देवी ने दुनिया तक पहुंचाई पहचान
जिस कला को समय के साथ लोग भूलते जा रहे थे, एक महिला ने उसे बचाने की ठान ली. बिहार के मधुबनी की सुभद्रा देवी ने कागज, गोंद और मिट्टी जैसी साधारण चीजों से पेपर मेशी कला को नया जीवन दिया. बचपन में सीखी इस कला को उन्होंने सिर्फ अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि 100 से ज्यादा महिलाओं को सिखाकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया. उनकी मेहनत से गांव की यह पारंपरिक कला देश की सीमाओं को पार कर दुनिया तक पहुंची. आज सुभद्रा देवी की कहानी सिर्फ एक कलाकार की नहीं, बल्कि उस जुनून की कहानी है, जिसने एक भूली-बिसरी कला को नई पहचान दिला दी.















