जमशेदपुर के आदित्यपुर में स्थित है देश का सबसे बड़ा और पुराना इंडस्ट्रियल एरिया AIDA, जानिए क्यों है ये खास

टीएनपी डेस्क(TNP DESK): झारखंड का कोल्हान क्षेत्र पूरे विश्व में प्रसिद्ध है, इसकी पहचान के पीछे कई वजह है, लेकिन बिजनेश के लिहाज से ये टाटा स्टील कंपनी की वजह से जाना जाता है. वहीं कोल्हान में एक ऐसी जगह भी है, जहां छोटी बड़ी हजार से ज्यादा कंपनियों का संचालन होता है. इन कंपनियों में लाखों लोग दिन रात काम करते है. जिससे उनको रोजगार मिला हुआ है. कहा जाता है कि आदित्यपुर का औद्योगिक क्षेत्र भारत का सबसे पुराना और बड़ा औद्योगिक क्षेत्र है. जहां लगभग 1500 कंपनियां संचालित होती है. जिसमें से हजार से ज्यादा कंपनियां टाटा मोटर्स पर निर्भर है.
यहां की ज्यादा कंपनियां मैकेनिकल सेक्टर से जुड़ी चीजों का प्रोडक्शन करती है
आपको बताये कि 2500 से ज्यादा एकड़ में फैला आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में 1500 से ज्यादा कंपनियां मैकेनिकल सेक्टर से जुड़ी चीजों का प्रोडक्शन कर रही है.जिसमे ज्यादातर कंपनियां टाटा मोटर्स, रेलवे, कास्टिंग, डिफेंस टाटा स्टील, और टाटा हितैची जैसी बड़े सेक्टर के लिए ऑटो पार्टस या अन्य सामानों का उत्पादन करती है, और सफल रुप से पिछले कई सालों से मुनाफे के साथ चल रही है. वहीं लाखों लोगों को रोजगार भी दे रही है.
टाटा स्टील पर निर्भर होने का खामियाजा भी छोटी कंपनियों को भुगतना पड़ता है
वहीं टाटा मोटर्स पर निर्भर होने का खामियाजा भी कई कंपनियों को भुगतना पड़ता है. जब भी टाटा मोटर्स में मंदी का दौर आता है, तो आदित्यपुर के इंडस्ट्रियल एरिया की हजारों कंपनियों के सामने भी मंदी छा जाती है, और इन्हे चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.इसका दुष्प्रभाव होता है कि कंपनी अपने मजदूरों को घर पर बैठा देती है, और हजारों लोग बेरोजगार हो जाते है, और इनके परिवार के सामने भूखे मरने की स्थिति आ जाती है.इन छोटी कंपनियों में काम करनेवाले मजदूर कम पढ़े लिखे होते है, जिसकी वजह से इनके सामने अन्य दूसरी जगह आसानी से काम नहीं मिल पाता है.
ये बड़ी कंपनियों करोड़ों का है टर्न ओवर
इस उद्योग क्षेत्र में जहां हजारों छोटी कंपनियां स्थापित है, तो वहीं कई बड़ी-बड़ी कंपनियों का भी संचालन होता है. जिनका सालाना टर्न ओवर हजारों करोड़ रुपये है. इनमें टाटा ग्रोश शॉप, रामाकृष्णा फोर्जिंन, उषा मार्टिन, ओमनी ऑटो, एलएमटी, जेएमटी, आरएसबी, क्रॉस लिमेटेड और खेतान आदि कुछ शीर्ष कंपनियां शामिल है. इनमे से कुछ झारखंड स्थापना के पहले यानि संयुक्त बिहार वाले समय से काम कर रही है. ये कंपनियां आज भी सफल रुप से अपना संचालन कर रही है, और देश के साथ विदेशों में भी धीरे धीरे अपना विस्तार कर रही है.
उद्योग क्षेत्र के विस्तार के लिए कई बार उठती है मांग
वहीं समय समय पर इन कंपनियों की ओर से उद्योग क्षेत्र के विस्तार के लिए आवाज उठती रहती है.एक ही जगह पर हजारों कंपनियों के होने से काफी ज्यादा कंजेस्टेड हो जाता है.जिससे प्रदूषण जैसी समस्या इतनी ज्यादा बढ़ जाती है, कि लोगों का सांस लेने मुश्किल हो जाता है. जिसको लेकर कंपनी के संचालकों की ओर से भारत सरकार से कई बार इसके विस्तार की मांग उठ चुकी है, लेकिन आज तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है.
छोटी कंपनियों से लोगों को लाभ और नुकसान
आपको बताये कि इंडस्ट्रियल एरिया की छोटी कंपनियों का सबसे ज्यादा फायदा क्षेत्र के कम पढ़े लिखे लोगों को होता है. यहां उन्हे आसानी से रोजगार मिल जाता है, जिसकी वजह से क्षेत्र के गरीब लोग भी जी खा लेते है, लेकिन इन कंपनियों की वजह से कई लोगों को नुकसान भी उठाना पड़ता है, क्योंकि कंपनियों के आस पास वाले क्षेत्र के लोगों को प्रदूषण की वजह से काफी परेशानी होती है, जिसकी कोई व्यवस्था आज तक नहीं की गई है.
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