'आया मौसम त्योहारों का...', दशहरे के साथ शुरू हुई त्योहारों की रौनक, अब हर तरफ छाएगा जश्न का रंग

  • October 24, 2026 10:30 pm
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दशहरे के साथ त्योहारों की बहार शुरू हो चुकी है. अब कहीं शरद पूर्णिमा की चांदनी में खीर का आनंद लिया जाएगा, तो कहीं करवा चौथ पर चांद का इंतजार होगा. इसके बाद धनतेरस, दिवाली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज की रौनक देखने को मिलेगी. आखिर में छठ महापर्व आस्था और भक्ति का अनूठा रंग बिखेरेगा. आइए जानते हैं, आने वाले त्योहारों की खासियत और उनसे जुड़ी परंपराएं.

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दशहरे के साथ त्योहारों का सिलसिला शुरू हो चुका है. अब आने वाले दिनों में घरों में रौनक, बाजारों में चहल-पहल और अपनों से मिलने की खुशियां देखने को मिलेंगी. शरद पूर्णिमा से लेकर छठ महापर्व तक हर त्योहार की अपनी खास परंपरा और मान्यता है. कहीं चांदनी रात में खीर बनाई जाएगी, तो कहीं दीपों से घर जगमगाएंगे. आस्था, प्रेम और परिवार के साथ खुशियां बांटने का यह मौसम हर किसी के लिए खास होने वाला है.

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दशहरे के बाद शरद पूर्णिमा त्योहारों की रौनक को आगे बढ़ाती है. इस रात चंद्रमा की पूजा और दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है. कई घरों में खीर बनाकर रातभर चांदनी में रखने की परंपरा निभाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ दिखाई देता है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे कोजागरी पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। चांदनी, भक्ति और खीर की मिठास इस पर्व को खास बनाती है.

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करवा चौथ विवाहित महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखने वाला पर्व है. इस दिन कई महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. सुबह सरगी से शुरू होने वाला यह दिन पूजा, सोलह श्रृंगार, मेहंदी और चांद के इंतजार के साथ आगे बढ़ता है. शाम को महिलाएं करवा माता की पूजा करती हैं और चंद्र दर्शन के बाद व्रत खोलती हैं. प्रेम, विश्वास और परंपरा से जुड़ा यह त्योहार रिश्तों की खूबसूरती दर्शाता है.

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धनतेरस के साथ दीपोत्सव की तैयारियां जोर पकड़ने लगती हैं. इस दिन खरीदारी करना शुभ माना जाता है और कई लोग सोना, चांदी, बर्तन या दूसरी उपयोगी चीजें खरीदते हैं. इसके बाद घरों की सफाई, सजावट, रंगोली और दीये जलाने की तैयारियां होती हैं. दिवाली के दिन भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है. मिठाइयां बांटने, परिवार के साथ समय बिताने और घर को रोशनी से सजाने की परंपरा इस पर्व को खुशियों से भर देती है.

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दिवाली केवल दीये जलाने का त्योहार नहीं, बल्कि नई उम्मीदों और खुशियों का प्रतीक भी है. इस दिन घरों, आंगनों और दरवाजों को रंगोली, फूलों और रोशनी से सजाया जाता है. शाम को लक्ष्मी-गणेश पूजन के बाद दीप जलाने और मिठाइयां बांटने का सिलसिला शुरू होता है. बच्चे पटाखों और फुलझड़ियों का आनंद लेते हैं, जबकि बड़े परिवार और दोस्तों के साथ खुशियां साझा करते हैं. रोशनी से जगमगाती रात हर तरफ उत्सव का माहौल बना देती है.

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दिवाली के बाद गोवर्धन पूजा और भाई दूज त्योहारों की खुशियों को आगे बढ़ाते हैं. गोवर्धन पूजा पर भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की जाती है और कई जगह अन्नकूट का भोग लगाया जाता है. यह पर्व प्रकृति, पशुधन और अन्न के महत्व को भी दर्शाता है. इसके बाद भाई दूज पर बहनें अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. भाई-बहन के प्रेम और परिवार के मजबूत रिश्तों को समर्पित ये दोनों पर्व खास होते हैं.

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दिवाली के बाद त्योहारों का उत्साह छठ महापर्व तक पहुंचता है. खासकर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में इस पर्व की अलग ही रौनक देखने को मिलती है. चार दिनों तक चलने वाले छठ में नहाय-खाय, खरना, संध्या अर्घ्य और उषा अर्घ्य की परंपरा निभाई जाती है. व्रती निर्जला उपवास रखकर सूर्य देव और छठी मैया की पूजा करते हैं.नदी, तालाब और घाटों पर डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का दृश्य आस्था और समर्पण का अद्भुत उदाहरण है.

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शरद पूर्णिमा की चांदनी से लेकर छठ के पवित्र अर्घ्य तक, त्योहारों का यह मौसम भारतीय संस्कृति की खूबसूरती दिखाता है. हर पर्व अपने साथ अलग परंपरा, स्वाद और भावनाएं लेकर आता है. कहीं खीर की मिठास है, कहीं दीपों की चमक, तो कहीं भाई-बहन और पति-पत्नी के रिश्तों का उत्सव. इन त्योहारों में परिवार के साथ समय बिताने, जरूरतमंदों की मदद करने और खुशियां बांटने का संदेश भी छिपा है. यही वजह है कि त्योहारों का यह मौसम हर दिल को खास एहसास देता है.