छत्तीसगढ़ का 1,400 साल पुराना मंदिर UNESCO की रेस में, अद्भुत वास्तुकला ने खींचा ध्यान

  • October 28, 2026 9:47 pm
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छत्तीसगढ़ का प्राचीन शहर सिरपुर अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के कारण एक बार फिर चर्चा में है. महानदी के किनारे बसा यह शहर कभी दक्षिण कोसल की राजधानी और धार्मिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था. यहां हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म से जुड़े कई प्राचीन अवशेष मिले हैं. अब सिरपुर का सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य UNESCO की Tentative List में शामिल है. जानिए इस ऐतिहासिक शहर की खासियत और इसकी विरासत क्यों महत्वपूर्ण है.

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सिरपुर छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में महानदी के तट पर स्थित एक प्रमुख पुरातात्विक स्थल है. इसका इतिहास प्राचीन दक्षिण कोसल क्षेत्र से जुड़ा है. पांचवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच यह इलाका धार्मिक, सांस्कृतिक और स्थापत्य गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा. पांडुवंशी शासकों के दौर में सिरपुर ने खास पहचान बनाई. आज यहां मौजूद मंदिरों, विहारों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों से उस समय के समाज, धर्म और कला की जानकारी मिलती है.

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सिरपुर की सबसे खास बात इसकी धार्मिक विविधता है. यहां की खुदाई में हिंदू मंदिरों के साथ बौद्ध विहारों और जैन धार्मिक स्थलों के अवशेष भी मिले हैं. उपलब्ध पुरातात्विक विवरणों में 22 शिव मंदिर, 5 विष्णु मंदिर, 10 बौद्ध विहार और 3 जैन विहार मिलने का उल्लेख किया जाता है. ये अवशेष बताते हैं कि सिरपुर अलग-अलग धार्मिक परंपराओं और स्थापत्य शैलियों के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र था.

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सिरपुर केवल धार्मिक स्थलों के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है. यहां की पुरातात्विक विरासत एक विकसित प्राचीन नगरी की तस्वीर भी पेश करती है. खुदाई में मंदिरों और बौद्ध विहारों के अलावा आवासीय संरचनाओं, बाजारों और जल प्रबंधन से जुड़े अवशेषों के प्रमाण मिले हैं. ये खोजें उस दौर की नगर व्यवस्था, निर्माण तकनीक और सामाजिक जीवन को समझने में मदद करती हैं. सिरपुर की विरासत प्राचीन भारत की शहरी और सांस्कृतिक उपलब्धियों का महत्वपूर्ण उदाहरण है.

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सिरपुर का लक्ष्मण मंदिर भारतीय मंदिर स्थापत्य का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है. सातवीं शताब्दी के आसपास निर्मित यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और मुख्य रूप से ईंटों से बनाया गया है. इसकी नक्काशी, स्थापत्य शैली और संरचना उस दौर की निर्माण कला की झलक दिखाती है. मंदिर का ऐतिहासिक महत्व इसे सिरपुर की प्रमुख पहचान बनाता है. यह स्मारक मध्यकालीन भारतीय वास्तुकला और धार्मिक परंपराओं के अध्ययन के लिए भी खास माना जाता है.

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सिरपुर का सुरंग टीला अपने विशाल मंदिर परिसर और स्थापत्य विशेषताओं के लिए जाना जाता है. ऊंचे चबूतरे तक पहुंचने वाली सीढ़ियां और मंदिरों की योजना इसे खास बनाती हैं. यहां पंचायतन शैली से जुड़ी स्थापत्य विशेषताएं देखने को मिलती हैं. परिसर के अवशेष प्राचीन निर्माण तकनीक, धार्मिक मान्यताओं और मंदिर नियोजन को समझने में मदद करते हैं. सुरंग टीला सिरपुर की उन ऐतिहासिक धरोहरों में शामिल है, जो इस क्षेत्र की समृद्ध वास्तुकला को सामने लाती हैं.

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UNESCO की Tentative List उन संभावित स्थलों की सूची है, जिन्हें कोई देश भविष्य में World Heritage Site के रूप में नामित करने पर विचार करता है. इसमें शामिल होने का मतलब यह नहीं है कि किसी स्थल को विश्व धरोहर का दर्जा मिल गया है. इसके बाद देश को विस्तृत नामांकन दस्तावेज तैयार करने और संबंधित मूल्यांकन प्रक्रिया से गुजरना होता है. अंतिम निर्णय UNESCO की World Heritage Committee लेती है. इसलिए सिरपुर का सूची में शामिल होना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अंतिम मान्यता नहीं है.

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UNESCO की Tentative List में सिरपुर के सांस्कृतिक और पुरातात्विक परिदृश्य के साथ अंडमान-निकोबार के Baratang का Karst-Mud-Volcano Complex और Barren तथा Narcondam द्वीपों के ज्वालामुखीय स्थल भी चर्चा में हैं. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थी सिरपुर को महानदी, दक्षिण कोसल, धार्मिक विविधता और प्राचीन मंदिर स्थापत्य से जोड़कर याद रख सकते हैं. ध्यान रहे, Tentative List में शामिल होना और UNESCO World Heritage Site घोषित होना दो अलग-अलग चरण हैं.