Chauth 2026: 29 अक्टूबर को करवा चौथ, 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, जानें दोनों व्रतों का महत्व

  • October 27, 2026 9:44 pm
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अक्टूबर के आखिरी दिनों में करवा चौथ और नवंबर की शुरुआत में अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाएगा. करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी उम्र और खुशहाली के लिए रखा जाता है. दोनों व्रतों की तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने की परंपरा अलग-अलग है. जानिए 2026 में कब रखा जाएगा कौन-सा व्रत और क्या है इसका महत्व.

Chauth 2026: 29 अक्टूबर को करवा चौथ, 1 नवंबर को अहोई अष्टमी, जानें दोनों व्रतों का महत्व
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अक्टूबर के आखिरी दिनों और नवंबर की शुरुआत में दो खास व्रत मनाए जाएंगे. करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं, जबकि अहोई अष्टमी का व्रत संतान की खुशहाली के लिए रखा जाता है. दोनों व्रतों में पूजा के शुभ मुहूर्त और व्रत खोलने की परंपरा का खास महत्व है. जानिए इन दोनों व्रतों की तारीख, पूजा का समय और इनके बीच का अंतर.

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साल 2026 में करवा चौथ का व्रत गुरुवार, 29 अक्टूबर को रखा जाएगा. इस दिन सुहागिन महिलाएं पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं. दिनभर उपवास के बाद शाम को भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है. इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण कर व्रत खोलने की परंपरा है.

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करवा चौथ पर पूजा के शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है. दी गई जानकारी के अनुसार, 29 अक्टूबर को चतुर्थी तिथि सुबह 1:06 बजे से रात 10:09 बजे तक रहेगी. पूजा का शुभ समय शाम 5:38 से 6:56 बजे तक बताया गया है. वहीं, चंद्रोदय रात लगभग 8:12 से 8:17 बजे के बीच हो सकता है. चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद महिलाएं अपना व्रत खोलती हैं.

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अहोई अष्टमी का व्रत रविवार, 1 नवंबर 2026 को रखा जाएगा. यह व्रत मुख्य रूप से माताएं अपनी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से करती हैं. इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है. परंपरा के अनुसार, महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और शाम को पूजा के बाद तारों को देखकर व्रत खोलती हैं. कुछ स्थानों पर चंद्रमा के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा भी है.

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अहोई अष्टमी पर पूजा के लिए शाम का समय महत्वपूर्ण माना जाता है. दी गई जानकारी के मुताबिक, 1 नवंबर को अष्टमी तिथि दोपहर 2:51 बजे शुरू होगी और 2 नवंबर को दोपहर 1:10 बजे समाप्त होगी. पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5:36 से 6:54 बजे तक बताया गया है. तारों के दर्शन शाम करीब 6 बजे हो सकते हैं, जबकि चंद्रोदय रात लगभग 11:40 बजे बताया गया है.

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करवा चौथ और अहोई अष्टमी दोनों व्रत परिवार की खुशहाली से जुड़े हैं, लेकिन इनका उद्देश्य अलग है. करवा चौथ पर महिलाएं पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना करती हैं. इस व्रत में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है. वहीं, अहोई अष्टमी संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्ज्वल भविष्य के लिए रखी जाती है. इसमें तारों के दर्शन के बाद व्रत खोलने की परंपरा प्रचलित है.