Big Breaking-पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के विरोध में 21 अप्रैल को रांची में उलगुलान महारैली, इंडिया गठबंधन के नेताओं की होगी मौजूदगी

    Big Breaking-पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के विरोध में 21 अप्रैल को रांची में उलगुलान महारैली, इंडिया गठबंधन के नेताओं की होगी मौजूदगी

    Ranchi-पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के विरोध में झामुमो की ओर से 21 अप्रैल को उलगुलान महारैली का आयोजन किया जायेगा. रांची के प्रभात तारा मैदान में आयोजित इस रैली में इंडिया गठबंधन के तमाम नेताओं की मौजूदगी होने की खबर सामने आ रही है. याद रहे कि सीएम केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद भी दिल्ली में इंडिया गठबंधन की रैली हुई थी, जिसमें इंडिया गठबंधन के तमाम नेताओं के साथ ही कल्पना सोरेन और सीएम चंपाई सोरेन ने भी हिस्सा लिया था. अब उसी तर्ज पर रांची में रैली का आयोजन करने का फैसला किया गया है. दरअसल आज मुख्यमंत्री आवास पर सत्ताधारी दल झामुमो की ओर से एक बैठक आयोजित की गयी थी, जिसके बाद सियासी गलियारों में इस बात की चर्चा तेज थी कि आज झामुमो अपने हिस्से की दूसरी सीटों पर प्रत्याशियों का एलान कर सकता है, लेकिन अब जो खबर आ रही है. उसके अनुसार यह मीटिंग दरअसल रैली की तिथि को निर्धारित करने के लिए की गयी थी.

    हेमंत की गिरफ्तारी को लोकसभा चुनाव का बड़ा सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी

    यहां यह याद रहे कि झारखंड मे पहले चरण का मतदान 13 मई को होगा. उसके पहले 21 अप्रैल को महारैली की आयोजन का एलान इस बात का साफ संकेत कि इंडिया गठबंधन पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी को बड़ा सियासी मुद्दा बनाने की तैयारी में है.ताकि आदिवासी-मूलवासी मतदाताओं की व्यापक गोलबंदी तैयार की जा सकें. ध्यान रहे कि कई सियासी जानकारों का मानना है कि पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के बाद आदिवासी-मूलवासी मतदाताओं के बीच नाराजगी पसर रही है. जिसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है, माना जाता है कि यह रैली आदिवासी-मूलवासी समाज के बीच की उसी नाराजगी को वोट के रुप में कैश करने की कवायद है. क्योंकि जैसे ही राजधानी रांची में नेताओं की जमघट लगेगी और पूरे राज्य में यह संदेश जायेगा कि हेमंत सोरेन निर्दोष हैं, उन पर लगे तमाम आरोप महज सियासी पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर लगाये गये हैं, आदिवासी समाज के बीच पसरती यह नाराजगी और भी रफ्तार लेगा, निश्चित रुप से इसका नुकसान भाजपा को उठाना पड़ सकता है, हालांकि यह नुकसान कितना होगा और किस हद तक आदिवासी-मूलवासी समाज के बीच गोलबंदी होगी, उस पर अलग अलग आकलन भी है, कुछ लोगों का मानना है कि हेमंत की गिरफ्तारी को एक अर्सा गुजर गया, अब उनकी याद लोगों के जेहन से मिटने लगी है, और दूसरे मुद्दे उनके दिमाम में जगह बनाने लगे हैं, लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जब राजधानी रांची से देश भर के नेताओं का एक सूर से हेमंत के पक्ष में आवाज उठेगा, क्या तब भी हेमंत की स्मृति धुंधली होगी या फिर आदिवासी समाज में कथित रुप से फैलता आक्रोश और भी विस्तार लेगा.    

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