“मोदी का परिवार” बनाम ‘दिशोम गुरु का परिवार” शिबू सोरेन की बड़ी बहु के सामने सबसे बड़ा सवाल! जानिये क्या है सीता की सियासी उलझन?

    “मोदी का परिवार” बनाम ‘दिशोम गुरु का परिवार” शिबू सोरेन की बड़ी बहु के सामने सबसे बड़ा सवाल! जानिये क्या है सीता की सियासी उलझन?

    Ranchi-अपने पति और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के बड़े बेटे दुर्गा सोरेन के खून-पसीने से पुष्पित-पल्लवित झामुमो को अलविदा कहते हुए सीता सोरेन ने भाजपा की सवारी तो करने का फैसला कर लिया. लेकिन लगता है अभी भी सवाल उनके अंदर उमड़-घुमड़ रहे हैं. एक हिचक और एक संकोच अभी भी उनके अंदर बनी हुई है. सियासी पलटी के बावजूद वह ना तो अपने अंदर की झारखंडियत के साथ समझौता करने को तैयार हैं और ना ही एक सीमा से ज्यादा सोरेन परिवार से दूरी बनाने को राजी. इस हिचक की झलक सीता सोरेन के सोशल मीडिया बायो में देखी जा सकती है. जहां दूसरे भाजपा नेताओं में “मोदी का परिवार” बनने की होड़ लगी हुई है. सोशल मीडिया के दूसरे सभी प्लेटफार्मों की तरह ही ट्वीटर भी “मोदी का परिवार” क्रेज में है. और नये-नये भाजपाईयों में तो इसका क्रेज कुछ ज्यादा ही है. लेकिन सीता को “सबका साथ सबका विकास” तो मंजूर है, लेकिन “मोदी का परिवार” के रास्ते पर आगे बढ़ना मंजूर नहीं. बायो बिरसा मुंडा के साथ दुर्गा सोरेन की तस्वीर भी है, जो इस बात की तस्दीक है कि सीता सोरेन ने पार्टी जरुर बदली है, लेकिन जिस झारखंडियत की अलख दुर्गा सोरेन ने जलाई थी, जल जंगल और जमीन की लड़ाई का जो आह्वान किया था, उसकी गूंज फीकी नहीं हुई है.

    मोदी का परिवार से यह संकोच क्यों?

    लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सीता सोरेन के अंदर मोदी का परिवार बनने से यह हिचक और संकोच क्यों है? और यह कोई हिचक है या फिर किसी सियासी रणनीति का हिस्सा? क्या एक बेचैनी यह भी है कि “मोदी का परिवार” का हिस्सा बनते ही झामुमो का वह कोर वोटर जो सीता सोरेन को दिशोम गुरु शिबू सोरेन की बड़ी बहु समझ कर अपना वोट देता था, दूर हो जायेगा? और क्या संताल की सियासत का एक सच यह भी है कि यदि आपको वोट लेना है तो अपने आप को “दिशोम गुरु के परिवार” का हिस्सा दिखलाना होगा. जानकारों का दावा है कि संताल की सियासत और सियासी मुद्दे हैं. राजधानी रांची से बिल्कुल अलग होते हैं. राष्ट्रीय मीडिया में जिन मुद्दों और चेहरों को बड़ा स्पेस मिलता है. कई बार वह मुद्दे और चेहरे संताल की सियासत में हासिये पर खड़े नजर आते हैं. आज भी संताल में दिशोम गुरु के चेहरे की गूंज है. और “दिशोम गुरु का परिवार” ही  वह पहचान है, जिसके बूते पिछले 15 वर्षों से सीता की सियासत चलती रही है. जैसे ही “दिशोम गुरु का परिवार” का यह टैग टूटा, सब कुछ बिखरा नजर आयेगा और शायद, सीता सोरेन की दुविधा और संकोच का कारण भी यही है.

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