कौन हैं राज पालिवार! जिसके बारे में दिन भर उड़ती रही “कमल” छोड़ “पंजा” थामने की अफवाह, क्या है इसके पीछे की सच्चाई

    कौन हैं राज पालिवार! जिसके बारे में दिन भर उड़ती रही “कमल” छोड़ “पंजा” थामने की अफवाह, क्या है इसके पीछे की सच्चाई

    Ranchi-गीता कोड़ा को पंजा छोड़ने के बाद सियासी गलियारों में हर दिन किसी ना किसी के बारे में पालाबदल की खबरें तैरती रहती है. कई बार यह महज अफवाह साबित होता है, तो कई बार इस कथित अफवाह के बाद मनाने-समझाने का दौर शुरु होता है और आखिरकार बात बन जाती है. इस प्रकार पाला बदल के दावों को खारिज कर पार्टी के प्रति वफादारी का एक बार से एलान किया जाता है. जबकि कई बार नानुकूर का लम्बा दौर चलता है और आखिरकार इस कथित अफवाह पर मुहर लग जाती है, बदली वफादारी का औपचारिक एलान कर दिया जाता है. गीता कोड़ा भी काफी लम्बे वक्त तक इन दावों को सियासी अफवाह बता, अपना सियासी गुणा-भाग करती रही और आखिरकार पंजा छोड़ कमल की सवारी करने का एलान कर दिया. ठीक यही हालत सीता सोरेन की रही. इनके बारे में भी महीनों पहले से यही भविष्यवाणी की जा रही थी, जो आखिरकार सच साबित हुई. नेता प्रतिपक्ष की कुर्सी से चुकने के बाद यही दावा जेपी पटेल के बारे में किया जा रहा था और अब वह सियासी अटकल सच साबित हुआ. अभी भी कई सियासी चेहरों के बारे में यही भविष्यवाणी की जा रही है. और हर बार की तरह इस बार भी इन दावों को खारिज किया जा रहा है. हालांकि आज भी यही खेला धनबाद में खेले जाने की खबर है. दावा किया जा रहा है कि किसी भी पल धनबाद की सियासत का एक बड़ा चेहरा दिल्ली भाजपा मुख्यालय में कमल थामने का एलान कर सकता है. सारी पटकथा पूरी हो गयी है. आज का दिन उनकी जिंदगी के लिए उदासी भरा दिन है. इस दिन के साथ कई यादें जुड़ी है. सीने में गम की परछाईयां और खोने का दर्द है. बहुत संभव है कि आज ही के दिन वह अपनी बदली आस्था का एलान भी कर दें. 

    किसी भी वक्त इस अफवाह को सत्य साबित होने का खतरा मौजूद है

    लेकिन यहां सवाल उस राज पालिवार का है, जिसके बारे में कल दिन भर सियासी गलियारों में पाला बदल की खबरें उड़ती रही. कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने वाजप्ते इसका एलान भी कर दिया, अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्होंने लिखा कि जेपी भाई पटेल के साथ ही झारखंड सरकार के पूर्व श्रम मंत्री राज पालिवार  ने आज कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली. और इसके बाद सोशल मीडिया पर राज पालिवार का नाम तेजी से फैलने लगा. लेकिन इस बार भी राज पालिवार को समझाने मनाने का दौर शुरु हो गया. उसके बाद हर बार की तरह खुद राज पालिवार को मोर्चे पर लगाया गया. राज पालिवार ने पालाबदल की तमाम दावों को  सियासी अफवाह बताया. अपनी छवि को खराब करने की साजिश बतायी. लेकिन क्या सच यही है? दावा किया जाता है कि खतरा अभी टला नहीं है. समझाने मनाने का दौर जारी है. लेकिन इसकी अंतिम परिणति क्या होगी? अभी कुछ भी कहा नहीं जा सकता. यदि राज पालिवार की मुराद पूरी नहीं होती है, तो किसी भी वक्त इस अफवाह को सत्य साबित होने का खतरा मौजूद है. और किसी भी दिन, पल, उसी कांग्रेस कार्यालय से जिसमें बैठ कर जेपी भाई पटेल ने मोदी परिवार से बाहर निकल कर झारखंडी अस्मिता और पहचान का सिंहनाद किया था. राज पालिवार भी उसी दफ्तर से अपनी बदली आस्था का एलान कर सकते हैं.

    कौन हैं राज पालिवार और इस बदलती आस्था का कारण क्या है?

    यहां बता दें कि राज पालिवार वर्ष 2005 और 2014 में मधुपुर विधानसभा से भाजपा के विधायक रहे हैं. लेकिन वर्ष 2019 में उन्हे झामुमो के हाजी हुसैन के हाथों मात खानी पड़ी, लेकिन इस जीत के बाद हाजी हुसैन की मौत हो गयी, और वर्ष 2021 में मधुपुर में उपचुनाव की घोषणा की गयी. राज पालिवार को यह विश्वास था कि इस बार भी भाजपा उन्हे मैदान में उतारेगी. लेकिन दावा किया जाता है कि भाजपा के अंदर से उनके खिलाफ साजिश की शुरुआत हो गयी. दावा किया जाता है कि इसके पीछे मुख्य भूमिका गोड्डा की सियासत का एक बड़े चेहरे की थी. आखिर पार्टी ने राज पालिवार को किनारा कर आजसू नेता गंगा नारायण सिंह को भाजपा में शामिल कर मैदान में उतार दिया. दावा किया जाता है कि इसी घटना के बाद राज पालिवार के अंदर दर्द पसरा है. इधर हाल के दिनों में कांग्रेस की रणनीति राज पालिवार को पंजे की सवारी कर गोड्डा के दंगल में उतारने की है. ताकि कांग्रेस को गोड्डा में एक चेहरा मिल जाये और राज पालिवार को भी अपना हिसाब चुकता करना मौका भी मिल जाये. अब खबर है कि राज पालिवार की इस पाल बदल की खबरें से, वह चेहरा ही सबसे ज्यादा परेशान है, जिसकी अहम भूमिका पालिवार को बेटिकट करने में थी. और उसी चेहरे की कोशिश से फिलहाल राज पालिवार के पालाबदल पर विराम लगा है. लेकिन सवाल यह है कि इस सियासी संधि की उम्र क्या होगी? क्या इस मान मनौवल से राज पालिवार का दर्द कम हो जायेगा? या इसके बदले में कोई बड़ा ऑफर मिलेगा? सियासत में हां को ना और ना को हां में बदलने में देर नहीं लगती. सवाल संधि, समझौता और ऑफर का है. फिलहाल इसी का दौर चल रहा है. लेकिन खतरा टला नहीं है. किसी भी मोदी परिवार का एक और सदस्य अपनी बदली आस्था का एलान कर सकता है, तो दूसरी ओर से आज ही के दिन दिल्ली से पंजा को गच्चा देकर कमल की सवारी का एलान भी हो सकता है.

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