लोकसभा चुनाव से पहले सीएम हेमंत की गिरफ्तारी! झामुमो की पिच पर भाजपा की बैटिंग

    लोकसभा चुनाव से पहले सीएम हेमंत की गिरफ्तारी! झामुमो की पिच पर भाजपा की बैटिंग

    Patna-कथित जमीन घोटाले में सीएम हेमंत की गिरफ्तारी को लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज है, दावा किया जा रहा है कि छह छह समन भेजे जाने के बाद अब ईडी पीएमएलए कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लेने की तैयारी में है, ईडी इस तैयारी को बेहद सतर्कता के साथ अंजाम दे रही है, उसके द्वारा इस मामले में कानूनविदों से सलाह भी ली जा रही है.

    पूरे चुनावी मूड में नजर आ रहे हैं हेमंत सोरेन

    यहां ध्यान रहे कि अब तक ईडी की ओर से सीएम हेमंत को छह-छह समन जारी किये गये हैं, सूत्रों का दावा है कि ईडी सीएम हेमंत से बड़गांय राजस्व निरीक्षक भानू प्रताप सिंह के आवास से मिले कागजातों के आधार पर पूछताछ करना चाहती है, दूसरी तरफ सीएम हेमंत का दावा है कि उनकी चल अचल संपत्तियों की पूरी सूची पहले से ही ईडी के पास है, और उनके पास इस मामले में जानकारी देने के लिए कुछ भी नया नहीं है. इसके पहले सीएम हेमंत ईडी समन के खिलाफ हाईकोर्ट से लेकर सर्वोच्च अदालत तक गुहार लगा चुके हैं. लेकिन उन्हे कहीं से राहत नहीं मिली, झारखंड हाईकोर्ट के द्वारा भी उन्हे ईडी के सवालों का सामना करने की सलाह दी गयी है, और हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ वह अभी तक सर्वोच्च अदालत नहीं गये हैं, इसके विपरीत आपकी योजना, आपकी सरकार आपके  द्वारा के माध्यम से पूरे राज्य में दौरा कर रहे हैं. उनकी तैयारियों से लगता है कि वह पूरी तरह से चुनावी मूड में आ चुके हैं, उनका इरादा अब इस लड़ाई को कानूनी रुप से लड़ने के बजाय जनता की अदालत में लड़ने का है, जिस ईडी के समन के आधार पर उन पर गिरफ्तारी की तलवार लटकायी जा रही है, वह अब उसी ईडी को चुनावी मुद्दा बनाने की दिशा में बढ़ते दिख रहे हैं.

    इंडिया गठबंधन को मिल सकता है बड़ा चुनावी मुद्दा

    यहां बता दें कि सीएम हेमंत सहित तमाम विपक्षी दलों का दावा है कि भाजपा जब खुद सियासी मुकाबला नहीं कर पाती तो वह ईडी और सीबीआई को आगे कर लड़ाई लड़ती है, यही कारण है कि आज के दिन करीबन करीबन सारे विपक्षी नेताओं को ईडी का समन भेजा जा चुका है, वह चाहे तेजस्वी यादव हो या अरविंद केजरीवाल या विपक्ष के दूसरे नामचीन चेहरे. और ईडी के समन को अनदेखी करने वालों में सिर्फ सीएम हेमंत ही नहीं है,  खुद अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी भी इसी रास्ते चलते हुए दिख रहे हैं, इन तमाम नेताओं के द्वारा ईडी के समन को दरकिनार कर चुनावी बिगुल फुंकने की तैयारी की जा रही है.

    क्या इस बवाल की कीमत चुकाने को तैयार है भाजपा

    इस हालत में बड़ा सवाल यह है कि क्या वाकई 2024 के महासंग्राम के पहले सीएम हेमंत की गिरफ्तारी करवाने का इरादा रखती है. और यदि ऐसा होता है तो  इसका परिणाम क्या होगा. क्योंकि सीएम हेमंत की तैयारियों और भाव भंगिमा से लगता है कि वह खुद भी अपनी गिरफ्तारी के लिए मानसिक रुप से तैयार है, और  इसके साथ ही वह इस गिरफ्तारी को झारखंड में एक बड़ा सियासी मुद्दा बनाना चाहते हैं.

    उनका मानना है कि उनकी गिरफ्तारी के साथ ही इंडिया गठबंधन के हाथ में एक बड़ा सियासी मुद्दा हाथ लग जायेगा, जिसके सहारे आदिवासी मूलवासी मतों का धुर्वीकरण तेज होगा. और यही कारण है कि चाहे 1932 का खतियान हो या सरना धर्म कोड या फिर पिछड़ों का आरक्षण विस्तार वह लगातार इन मुद्दों को हवा दे रहे हैं. ताकि आदिवासी मूलवासी मतदाताओं को साफ संदेश जाये कि भाजपा ना तो 1932 का खतियान की समर्थक है और ना ही सरना धर्म कोड, वह पिछड़ों के आरक्षण विस्तार की भी विरोधी है.

    तब क्या माना जाय कि भाजपा सीएम हेमंत के पिच पर ही खेल कर अपना हाथ जलाने को तैयार है, कम से कम बाबूलाल मरांडी के बयान से तो यही नजर आता है, अभी हाल में उन्होंने यह भविष्यवाणी की है कि जनवरी माह में झारखंड में बडी अनहोनी हो सकती है, उनका इशारा सीएम हेमंत की गिरफ्तारी की ओर था. लेकिन मूल सवाल यहां उसी अनहोनी की है, क्या भाजपा उस अनहोनी का आकलन कर रही है, जिसका सामना उसे सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के बाद करना पड़ेगा, क्योंकि सीएम हेमंत की गिरफ्तार के बाद राज्य सरकार की सेहत पर कोई असर तो नहीं पड़ेगा, हेमंत के जेल जाने के बाद भी झामुमो की सरकार चलती रहेगी, सिर्फ सीएम का चेहरा बदलेगा, लेकिन उसके बाद राजधानी रांची और दूसरे शहरों में जो तूफान खड़ा होगा, सीएम हेमंत की गिरफ्तारी के बाद इंडिया गठबंधन जिस प्रकार सड़कों पर शक्ति प्रर्दशन करेगा, उसकी एक कीमत तो भाजपा को चुकानी होगी.

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