8 अंग टेढ़े थे, लेकिन ज्ञान के आगे बड़े-बड़े विद्वान झुके! कौन थे अष्टावक्र?
भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में महर्षि अष्टावक्र का नाम एक ऐसे महान ज्ञानी के रूप में लिया जाता है, जिनकी पहचान उनके शरीर से नहीं, बल्कि उनके अद्भुत ज्ञान से हुई. जन्म से आठ स्थानों पर टेढ़े शरीर के बावजूद उनकी बुद्धि और आत्मज्ञान असाधारण था. कहा जाता है कि कम उम्र में ही उन्होंने राजा जनक की सभा में महान विद्वानों को शास्त्रार्थ में चुनौती दी. बाद में राजा जनक और अष्टावक्र के बीच हुआ संवाद ‘अष्टावक्र गीता’ के रूप में प्रसिद्ध हुआ, जिसमें आत्मज्ञान और मुक्ति का सरल मार्ग बताया गया है.















