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दरभंगा की आखिरी महारानी कामसुंदरी देवी की कहानी सिर्फ शाही वैभव की नहीं, बल्कि त्याग, संस्कृति और विरासत को संजोने की कहानी है. 600 किलो सोने के ऐतिहासिक दान से लेकर 15,000 से ज्यादा किताबों की ज्ञान-संपदा तक, उनकी जिंदगी दरभंगा राज के गौरवशाली इतिहास से जुड़ी रही. 96 साल की उम्र में उनके निधन के साथ एक युग जरूर खत्म हुआ, लेकिन उनकी विरासत आज भी लोगों को इतिहास और संस्कृति से जोड़ती है.

















