नालंदा में पढ़ा चीन का वो विद्वान... जिसकी कहानी आज भी मशहूर है
7वीं सदी में चीन से एक विद्वान ज्ञान की तलाश में भारत आया. उसकी मंजिल थी बिहार का नालंदा महाविहार, जहां उसने गुरु शीलभद्र से बौद्ध दर्शन और संस्कृत का अध्ययन किया. ह्वेनसांग की यह यात्रा सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं रही, वे भारत से 657 संस्कृत बौद्ध पांडुलिपियां चीन ले गए और वर्षों तक उनके अनुवाद में जुटे. उनकी कहानी आज भी नालंदा और भारत-चीन के प्राचीन ज्ञान-संबंधों की याद दिलाती है.















