इधर सीआरपीएफ के खिलाफ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का मामला दर्ज, उधर ईडी ने थमाया नौंवा समन, पस्त पड़ेगा हेमंत का हौसला या चारों खाने चित होगी भाजपा

    इधर सीआरपीएफ के खिलाफ प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का मामला दर्ज, उधर ईडी ने थमाया नौंवा समन, पस्त पड़ेगा हेमंत का हौसला या चारों खाने चित होगी भाजपा

    Ranchi-एक तरफ जब पूरे देश में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की धूम मची थी, पूरा राष्ट्र राममय नजर आ रहा था, लोगबाग आस्था के समुन्द्र में डूबकी लगा जीवन को धन्य बना रहे थें, दूसरी तरफ झारखंड में सियासत अपना खेल खेल रहा था, तलवारें दोनों ओर से तनी थी, एक तरफ जहां राज्य सरकार 20 जनवरी को सीएम हेमंत से पूछताछ के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में सीआरपीएफ की इंट्री को सियासी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी. गोंदा थाने में सीआरपीएफ के खिलाफ निषेधाज्ञा का उल्लधंन कर प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश का आरोप लगा कर मामला दर्ज करवा रही थी, वहीं दूसरी ओर ठीक इसके बाद ईडी ने सीएम हेमंत को अपना नौंवा समन जारी कर एक और सियासी भूचाल ला दिया.

    इन दोनों कड़ियों को आपस में जोड़कर देखने की जरुरत

    अब इन दोनों कड़ियों को आपस में जोड़कर देखने परखने की जरुरत है, और यह जरुरत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सत्ता पक्ष का दावा है सीआरपीएफ की इंट्री सीएम हेमंत को गिरफ्तार करने के इरादे से की गयी थी, दावा यह भी है कि जब सीआरपीएफ सीएम हाउस के आसपास मंडरा रही थी, ठीक उसी वक्त एक हवाई जहाज रांची एयरपोर्ट पर किसी का इंतजार कर रहा था, और यह इतंजार किसी और का नहीं होकर सीएम हेमंत का था, दरअसल यह हवाई जहाज सीएम हेमंत को दिल्ली ले जाने के लिए खड़ी की गयी थी, दावा तो यह भी है कि ठीक उसी वक्त ईडी सुप्रीमों अपने दिल्ली कार्यालय में बेचैनी के आलम में सीएम हेमंत के इंतजार कर रहे थें. अब इन दावों में कितनी सच्चाई है यह तो सत्ता पक्ष के लोग और खुद ईडी के अफसरान जानते होंगे. लेकिन इतना साफ है कि जब पूरे देश में राम भक्ति अपने उफान पर था, तब राजधानी की सर्द हवाओं में सियासत भी अपना खेल कर रही थी.

    आखिर किसके इशारे पर प्रतिबंधित क्षेत्र में सीआरपीएफ ने किया प्रवेश

    राज्य सरकार के आरोप अपनी जगह, लेकिन इन आरोप-प्रत्यारोंपों के बाद तो यह सवाल तो हर शहरी के मन में अब उमड़ने लगा है कि आखिर सीआरपीएफ के जवान किसके इशारे पर सीएम आवास की ओर बढ़ रहे थें? उन्हे कूच करने का आदेश कौन दे रहा था? और यदि वाकई यह आदेश दिल्ली से आ रहा था? और गृह मंत्रालय की ओर से इसकी मॉनिटिरिंग हो रही थी? तब दूसरा सवाल यह भी उठता है कि क्या वाकई इस पूरे खेल में ईडी भी एक बतौर एक सियासी मोहरा इस्तेमाल हो रहा था? क्योंकि ईडी तो एक स्वतंत्र संस्था है, और उससे पूरी पारदर्शिता की उम्मीद की जाती है, उसके काम करने के अपने तरीके है, बहुत संभव है, उसके पास कथित जमीन घोटाले में सीएम के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत हो, लेकिन क्या उस पर सीएम हेमंत को गिरफ्तार करने का अधोषित दवाब भी था, जिसे वह राज्य की पुलिस व्यवस्था के असहयोग के कारण पूरी नहीं कर पा रही थी, और इसी कारण से उसके द्वारा गृह मंत्रालय से मदद की गुहार लगायी थी, या फिर कहानी दूसरी ही है, और यह दिल्ली दरबार का दवाब था कि किसी भी कीमत पर इस मामले में उसे सीएम हमेंत की इंट्री करवानी है, साक्ष्य और सबूत बाद में देखा जायेगा, और इसकी जो अंतिम परिणति होगी, वह न्यायापालिका तय करेगी. क्योंकि ध्यान रहे कि ईडी हो या सीआरपीएफ दोनों का ही अंतिम बॉस गृह मंत्रालय ही है. और इस हालत में इसके फैसले में सियासी पेच नहीं हो, इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता.

    क्या वाकई सीएम हेमंत को गिरफ्तार करने का अघोषित दवाब है

    और यदि वाकई गृह मंत्रालय की ओर से किसी भी कीमत पर सीएम हेमंत को गिरफ्तार करने का अघोषित दवाब है, तो क्या गृह मंत्रालय इसके सियासी निहितार्थ से अपरिचित होगा? क्या उसे इस बात का जानकारी नहीं होगी, कि 2024 के महासंग्राम के पहले सीएम हेमंत को गिरफ्तार करना, उन्हे सियासी तौर पर हीरो बनाने के जैसा है, उनकी गिरफ्तारी के बाद आदिवासी मूलवासियों में जो आंधी उठेगी, उनमें जो आक्रोश पैदा होगा, उनके समर्थक सामाजिक समूहों के बीच जो एकतरफा ध्रुवीकरण होगा, क्या भाजपा उसका मुकाबला करने की स्थिति में होगी, और इसकी बानगी तो 20 जनवरी की घटनाओं से ही समझा जा सकता है, जब रांची की सड़कों पर उनके समर्थकों का काफिला उमड़ रहा था, क्या वह सारे के सारे सिर्फ किराये की भीड़ थी, जिन्हे इस पूछताछ के दौरान गुपचूप तरीके से राजधानी में उतारा गया था, ऐसे तो नहीं लगता, उनके समर्थकों की भाषा और तेवर यह साफ संकेत दे रहा था कि यदि वाकई उनके नेता पर कोई आंच आता है, तो ये चेहरे खामोश नहीं रहने वाले हैं, वह इसका जवाब ना सिर्फ लोकसभा चुनाव में देंगे बल्कि उसके बाद के होने वाले विधान सभा चुनाव में भी उनका यह गुस्सा रंग लायेगा.

    क्या इस बार ईडी कार्यालय जायेंगे हेमंत?

    इस हालत में सीएम हेमंत को गिरफ्तार कर सियासी बलि लेने के लिए तो भाजपा स्वतंत्र  है, क्योंकि आज देश की सारी एंजेसियों की शक्ति उसके पास है, लेकिन लोकतंत्र का मैदान इन एजेंसियों के बुत्ते फतह नहीं किया जाता, वहां तो सामाजिक समीकरण और जनभावना ही काम आता है, जो फिलहाल सीएम हेमंत के साथ खड़ी नजर आती है, अब देखना होगा कि इन तमाम आरोपों में कितना बल है, और इसका अगली परिणति क्या होती है, क्योंकि सीएम हेमंत को इस बार 27 जनवरी से 31 जनवरी के बीच किसी भी दिन आने का बुलावा आया है, और बड़ा सवाल तो यही है कि जब आठ आठ समन के बावजूद सीएम हेमंत ईडी कार्यालय नहीं पहुंचे तो इस बार वह ईडी कार्यालय में दस्तक देंगे ही इसकी भी क्या गांरटी है.

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