कालकोठरी में हेमंत और हवाखोरी में मस्त मंत्री सत्यानंद भोक्ता! विधायक भानु प्रताप का दावा महागठबंधन के नेताओं का रोना-धोना महज दिखावा

    कालकोठरी में हेमंत और हवाखोरी में मस्त मंत्री सत्यानंद भोक्ता! विधायक भानु प्रताप का दावा महागठबंधन के नेताओं का रोना-धोना महज दिखावा

    Ranchi-एक तरफ जहां झामुमो पूर्व सीएम हेमंत की गिरफ्तारी को भाजपा की साजिश बता कर सियासी बिसात बिछाती नजर आ रही है, इस बात का ताल ठोक रही है कि झारखंड की जनता सब कुछ देख-समझ रही है और लोकसभा चुनाव में उसे इसकी कीमत चुकानी होगी, वहीं अब भाजपा की ओर से इस बात का दावा ठोका जाने लगा है कि झामुमो और महागठबंधन के नेताओं का यह प्रलाप महज दिखावा है, उनके चहरे पर कई चेहरें हैं. मुखौटों की भरमार है, सच्चाई तो यह है कि हेमंत की गिरफ्तारी के बाद महागठबंधन के नेताओं के बीच एक खुशी की लहर है, हेमंत की गिरफ्तारी में भी उन्हे एक अवसर दिखलायी पड़ रहा है. अब उनकी हरकतों पर कोई लगाम लगाने वाला नहीं है, वह खूले मन से इस महालूट के अभियान को रफ्तार देने के लिए स्वतंत्र हैं.

    हेमंत का सदमा या हवाई जहाज उड़ाने की खुशी

    दरअसल यह सारे आरोप भाजपा विधायक भानु प्रताप सिंह के हैं, उनका दावा है कि शपथ ग्रहण के तुरंत बाद जिस आनन-फानन में मंत्री सत्यानंद भोक्ता हवाई जहाज उड़ाते हुए चतरा की ओर निकल पड़े, वह तस्वीर ही इस बात का जीता-जागता गवाह है कि हेमंत की गिरफ्तारी के बाद उनकी मनोदशा क्या थी? उपर से चेहरे पर मुर्दानी और मन में लड्डू फूट रहे थें. नहीं तो भला अपने नेता की गिरफ्तारी के बाद कोई इस कदर हवाई जहाज उड़ाने को बेचैन होता है. और यह हालत तब है कि सत्यानंद भोक्ता राजद के इकलौते विधायक हैं, और एक विधायक होने के बावजूद राजद यहां पूरे शान के साथ सत्ता की मलाई खा रहा हैं. सत्यानंद की इस हैसियत को देखकर महागठबंधन के दूसरे विधायकों  में भी ईश्या है, उन्हे भी लगता है कि काश: वह भी अपनी पार्टी के इकलौते विधायक होते, तो उनकी भी सरकार में चांदी होती.

    चतरा सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व, अपना इस्तीफा सौंपे सत्यानंद

    इसके साथ ही सत्यानंद भोक्ता का विधान सभा क्षेत्र का अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होने का मुद्दा भी उठा दिया, उन्होंने कहा कि अब जब कि सत्यानंद भोक्ता का विधान सभा क्षेत्र ही अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो चुका है, इस हालत में उन्हे तत्काल नैतिकता के आधार पर अपना इस्तीफा पेश कर देना चाहिए, ताकि किसी अनुसूचित जाति को भी विधान सभा में पहुंचने का अवसर मिल सके. लेकिन सत्यानंद भोक्ता से इसकी आशा करना बेमानी है, एक तरफ ये लोग भाजपा पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगायेंगे, संविधान की हत्या करने का मनगढ़ंत कहानियां सुनायेंगे, लेकिन जब इनके सामने इसी  लोकतंत्र का सम्मान करने की चुनौती पेश होगी तो ये कन्नी काट जायेंगे

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