2024 महासंग्राम के पहले छोटे भाई की तीसरी बार घर वापसी ! बड़े -छोटे के इस सियासी खेल में ललन सिंह के सामने सियासी संकट

    2024 महासंग्राम के पहले छोटे भाई की तीसरी बार घर वापसी ! बड़े -छोटे के इस सियासी खेल में ललन सिंह के सामने सियासी संकट

    Patna-एक तरफ सियासी गलियारों में जदयू के अंदर बड़े उलटफेर के दावे किये जा रहे हैं, जदयू राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह का इस्तीफा चैनलों की सुर्खियां बन रही है. दावा किया जा रहा है कि जदयू के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है, और सीएम नीतीश एक बार फिर से पलटी मार कर बिहार की सियासत भूचाल ला सकते हैं.

    वहीं दूसरी ओर यह खबर भी तेजी से फैल रही है कि जदयू की तरह ही एनडीए खेमा में सब कुछ ठीक नहीं है, बड़े भाई का साथ छोड़कर भाजपा के साथ गये उपेन्द्र कुशवाहा का दिल एक बार फिर से सीएम नीतीश के लिए तेजी से धड़क रहा है, और यह धड़कन इतनी तेज है कि खुद नीतीश भी जदयू के अंदर अपने छोटे भाई को सेटल करने के लिए सियासी बैटिंग की शुरुआत कर चुके हैं.

    उपेन्द्र कुशवाहा की वापसी में सबसे बड़ी बाधा ललन सिंह

    दरअसल, ललन सिंह के इस्तीफे को उपेन्द्र कुशवाहा की वापसी से भी जोड़ कर देखा जा रहा है, दावा किया जा रहा है कि उपेन्द्र कुशवाही की वापसी को लेकर सीएम नीतीश पूरी तरह मन बना चुके हैं. लेकिन उपेन्द्र कुशवाहा की वापसी के पहले वह अपने सभी विश्वसनीय सहयोगियों की सहमति भी चाहते हैं, और यही कारण कि उनके द्वारा लगातार ललन सिंह को मनाने की कोशिश की जा रही है, हालांकि उपेन्द्र कुशवाहा के पुराने अनुभव को देखते हुए ललन सिंह अब तक अपनी सहमति देने को तैयार नहीं है, और यही उनकी नाराजगी की  मुख्य वजह है.

    आखिररकार मान जायेंगे ललन सिंह?

    हालांकि दावा यह भी है कि देर- सबेर ललन सिंह सीएम नीतीश का सम्मान करते हुए इस वापसी पर रजामंद हो जायेंगे. वहीं कुछ जानकारों का मानना है कि जितनी बेचैनी उपेन्द्र कुशवाहा में जदयू में लौटने की है, उतनी ही बेचैनी सीएम नीतीश में उपेन्द्र कुशवाहा की वापसी को लेकर भी है, क्योंकि तमाम उठापटक और बार-बार पार्टी छोड़ने के बावजूद आज भी उपेन्द्र कुशवाहा की कुशवाहा वोटरों पर मजबूत पकड़ है. और इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रुप में सम्राट चौधरी की  ताजपोशी के बाद जदयू के लिए अपने लव कुश समीकरण को अभेद रखना एक बड़ी चुनौती है.

    सीएम नीतीश के सामने सियासी बारिश चुनने की चुनौती

    वहीं एक राय यह भी है कि सीएम नीतीश उम्र के जिस मोड़ पर पहुंच चुके हैं,  वहां से अब उन्हे अपने राजनीतिक वारिश की तलाश है, जो जदयू को एक पार्टी के बतौर आगे बढ़ा सकें, और इसके साथ ही उसमें सभी सामाजिक समूहों को एक साथ लेकर आगे बढ़ने की कुब्बत भी हो. लेकिन निश्चित रुप से वह चेहरा लव कुश का हो, ताकि किसी भी  हालात  में जदयू अपना कोर वोट बैंक को मजबूती के साथ बनाये रख सके. इस हालत में  उनके लिए उपेन्द्र कुशवाहा के बेहतर कोई दूसरा चेहरा नहीं होगा. यही उनके दिल में उपेन्द्र कुशवाहा के प्रति नरमी की मुख्य वजह है. हालांकि ललन सिंह भी उनके लिए उतने ही करीब है, लेकिन जदयू का आधार वोट बैंक और उसकी सियासत इस बात की इजाजत नहीं देता कि वह ललन सिंह में अपने भविष्य की तलाश करे. यही ललन सिंह का सियासी संकट और सीएम नीतीश की सियासी दुविधा है, दोनों ही उनके प्यारे हैं, वह किसी भी कीमत पर इसमें से किसी को भी खोना नहीं चाहते.

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