LS POLL 2024- पूर्व भाजपा विधायक राज पालिवार पर झामुमो की "कृपा दृष्टि", क्या गोड्डा में खेल बदलने की तैयारी में है महागठबंधन, जानिये इसके मायने

    LS POLL 2024- पूर्व भाजपा विधायक राज पालिवार पर झामुमो की "कृपा दृष्टि", क्या गोड्डा में खेल बदलने की तैयारी में है महागठबंधन, जानिये इसके मायने

    Ranchi-गोड्डा के दंगल में चौका मारने की तैयारी में भाजपा सांसद निशिंकात के खिलाफ इंडिया गठबंधन का चेहरा कौन होगा? इसको लेकर सियासी गलियारों में कई नामों पर चर्चा तेज है, बावजूद इसके किसी  एक नाम पर सहमति बनती नजर नहीं आ रही है, कभी प्रदीप यादव को मैदान में उतारने के दावे होते हैं, तो कभी महगामा विधायक दीपिका पांडेय सिंह पर दांव लगाने की खबर आती है, बीच बीच में आलमगीर आलम तो कभी पूर्व सांसद फुरकान अंसारी को मोर्चे पर उतारने की खबर आती है, लेकिन इस सबके बीच झामुमो के द्वारा मधुपुर से पूर्व  भाजपा विधायक राज पालिवार को जमीनी जनाधार वाला मजबूत नेता बताये जाने के बाद सियासी गलियारों में एक नयी बहस तेज हो गयी है, इस बयान के मायने तलाशे जाने लगा है, यहां ध्यान रहे कि अभी चंद दिन पहले तक राजपालिवार का कांग्रेस में शामिल होने की खबर आयी थी, दावा किया गया था कि राज पालिवार भाजपा को झटका देते हुए कांग्रेस की सवारी कर सकते हैं, हालांकि बाद में खुद राज पालिवार के द्वारा इन खबरों को खारिज कर दिया गया, लेकिन अब जैसे ही झामुमो ने राजपालिवार को मजूबत और जमीनी जनाधार वाला नेता, इस बात की चर्चा तेज हो गई, भले ही राज पालिवार इन खबरों का खंडन कर रहे हों, लेकिन अंदर कुछ ना कुछ जरुर चल रहा है. क्योंकि सियासत  में कोई किसी की प्रशंसा यों ही नहीं करता.

    कौन है राज पालिवार?

    यहां ध्यान रहे कि राज पालिवार वर्ष 2009 और 2014 में मधुपुर विधान सभा से भाजपा के टिकट पर विधायक रहे हैं. लेकिन वर्ष 2019 में राज पालिवार को कांग्रेस के हाजी हुसैन अंसारी के हाथों मात खाना पड़ा, लेकिन विधान सभा चुनाव के बाद हाजी हुसैन अंसारी की मौत हो गयी. जिसके बाद राज पालिवार को एक बार फिर से विधान सभा में पहुंचने का रास्ता साफ होता दिखने लगा, लेकिन 2021 के उपचुनाव में भाजपा ने राज पालिवार को किनारा करते हुए गंगा नारायण सिंह को उम्मीदवार बना दिया. दावा किया जाता है कि राज पालिवार की विदाई में वर्तमान सांसद निशिकांत की बड़ी भूमिका थी, निशिकांत ने भाजपा आलाकमान को राज पालिवार के बदले गंगा नारायण सिंह को मोर्चे पर उतारने की सलाह दी थी. बताया जाता है कि इसके बाद से राज पालिवार निशिकांत से खुंदक खाये हैं, हालांकि गंगा नारायण सिंह को भी सफलता नहीं मिली और हाजी हुसैन के बेटे हफीजुल हसन के इस सीट को अपने नाम कर लिया. दावा किया जाता है कि गंगा नारायण सिंह की हार से भले ही भाजपा में उदासी छायी थी, लेकिन राज पालिवार के चेहरे पर मुस्कान थी. खबर है कि झामुमो की कोशिश राजपालिवार की इस मुस्कान को स्थायी बनाने की है.

    क्या है सियासी समीकरण

    यहां ध्यान रहे कि मधुपुर विधान सभा भी गोड्डा संसदीय सीट का हिस्सा है, हालांकि बीच-बीच में यहां से झामुमो को सफलता मिलती रहती है, लेकिन हार जीत का फासला बड़ा नहीं होता, यानि समीकरणों में मामूली बदलाव भी हार को जीत में बदल देता है. हालांकि गोड्डा संसदीय सीट के छह विधान सभाओं में से जरमुंडी(बादल पत्रलेख), पोड़याहाट( प्रदीप यादव) और महागामा(दीपिका पांडेय सिंह) पर कांग्रेस, मधुपुर (हफीजुल हसन) पर झाममो का कब्जा है, जबकि देवघर(नारायण दास) और गोड्ड (अमित कुमार मंडल) विधान सभा में भाजपा का कब्जा है. यानि कुछ छह विधान सभा में से तीन पर कांग्रेस, एक पर झामुमो और दो पर भाजपा का कब्जा है. इस हालत में क्या कांग्रेस इस सीट को झामुमो के हवाले करेगी, इस पर एक बड़ा सवाल है. इस बीच दावा किया जा रहा है कि यदि झामुमो की सहमति बनती है, जो झामुमो के बयान से साफ भी हो रहा है, तो राज पालिवार का कांग्रेस में भी इंट्री का रास्ता साफ हो सकता है.   

    कैसे बदल सकता है राज पालिवार से गोड्डा का सियासी समीकरण?

    दरअसल सियासी जानकारों का दावा है कि इंडिया गठबंधन के लिए निशिकांत की पारी पर विराम लगाना उसके वर्तमान सियासी समीकरण से मुमकीन होता नजर नहीं आता. प्रदीप यादव से लेकर फुरकान अंसारी को आगे कर उसने इसकी कोशिश कर ली है, इस हालत में यदि राज पालिवार की इंट्री होती है, तो राजपालिवार के साथ ही भाजपा का एक वोट बैंक भी उनके साथ इंडिया गठबंधन के साथ आ सकता है, यानि भाजपा के मतों में सेंधमारी की जा सकती है, हालांकि यह सेंधमारी कितनी होगी, इस पर सवाल जरुर है, लेकिन इतना तय है कि मधुपुर विधान सभा से भाजपा को अच्छा खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि इसके साथ ही सियासी गलियारों में गोड्डा ससंदीय सीट पर दखल रखने वाले एक और भाजपा विधायक का पाला बदल की चर्चा है, दावा किया जाता है कि राज पालिवार की तरह ही वह भाजपा  विधायक भी निशिकांत से खुंदक खाये हैं. यानि झामुमो-कांग्रेस की रणनीति भाजपा के अंदर निशिकांत के विरोधियों को एक साथ लाने की है. अब देखना होगा कि महागठबंधन की यह रणनीति कब धार पकड़ता है, या  फिर यह सियासी चर्चा बन कर ही रह जाती है, लेकिन जिस तरीके से  झामुमो की ओर से राजपालिवार के समर्थन में प्रशंसा के पूल बांधे जा रहे हैं, उससे महागठबंधन के अंदर एक खिचड़ी बनती जरुर दिख रही है.

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