झारखंड में सियासी सरगर्मी तेज! सीएम आवास पर विधायकों का जुटान, राज्य के अगले मुखिया के तौर पर कल्पना सोरेन के नाम पर मुहर लगने की चर्चा

    झारखंड में सियासी सरगर्मी तेज! सीएम आवास पर विधायकों का जुटान, राज्य के अगले मुखिया के तौर पर कल्पना सोरेन के नाम पर मुहर लगने की चर्चा

    Ranchi-कल सीएम हेमंत से ईडी की पूछताछ के पहले झारखंड में सियासी सरगर्मी अपने उफान पर चढ़ता नजर आ रहा है, सीएम हेमंत भी करीबन 36 घंटों के बाद मीडिया के सामने आ चुके हैं, और इसके साथ ही उनको लेकर चल रही तमाम सियासी चर्चाओं पर विराम लग चुका है. लेकिन इस बीच की बड़ी खबर यह है कि सीएम आवास पर महागठबंधन के विधायकों की बैठक जारी है, करीबन सारे विधायक सीएम आवास पहुंच चुके हैं, इसके साथ ही राज्य के गृह सचिव और मुख्य सचिव भी सीएम आवास पर है. इस बीच खबर आ रही है कि कल सीएम हेमंत की ईडी के सामने पेशी के पहले महागठबंधन की ओर से राज्य के मुखिया के चेहरे में बदलाव का बड़ा फैसला लिया जा सकता है, और राज्य के अगले मुखिया के रुप में कल्पना सोरेन के नाम पर मुहर लगायी जा सकती है. इस बीच पूरे राज्य की निगाहें आज की बैठक पर लगी हुई है.

    कल्पना सोरेन की चर्चा क्यों?

    दरअसल राज्य के अगले मुखिया के बतौर कल्पना सोरेन की चर्चा के पीछे कई तर्क है, पहला तर्क तो यही है कि यदि सीएम हेमंत को कल की पूछताछ के दौरान अवांछित परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, तो उस हालत में राज्य  में संवैधानिक संकट खड़ा हो सकता है, और बहुत संभव है कि इसी संभावित खतरों का आकलन के लिए आज की बैठक बुलाई गयी है, इस संभावना की दूसरी वजह हाल के दिनों में गांडेय विधान सरफराज अहमद का इस्तीफा है, दावा किया जाता है कि सीएम हेमंत को अपने सामने उमड़ते खतरे का एहसास था, और इसी की काट के लिए गांडेय विधान सभा सीट को खाली करवाया था, ताकि विपरित परिस्थितियों में कल्पना सोरेन को इस सीट से मैदान में उतार कर उन्हे  विधान सभा तक पहुंचाया जा सकें, इसकी तीसरी वजह आज कल्पना सोरेन का सीएम हेमंत के साथ विधायकों के साथ मौजूदगी है, क्योंकि आम तौर पर कल्पना सोरेन इस तरह के कार्यक्रमों से दूर रहती है, लेकिन आज की बैठक में उनकी मौजदूगी इन आशंका को बल प्रदान कर रहा है, और वाकई कल्पना सोरेन के नाम पर आज मुहर लग जाती है, तो इसके साथ ही झारखंड को पहली महिला मुख्यमंत्री भी मिलने का रास्ता साफ हो जायेगा. लेकिन इसके साथ ही कल्पना सोरेन को लेकर एक दूसरा तर्क यह भी है कि यदि कल्पना सोरेन के हाथ में राज्य की कमान सौंप दी जाती है, तो सीएम हेमंत पूरी तरीके से संगठन को धारदार बनाने का पूरा वक्त होगा, हालांकि सरकार पर उनकी पकड़ बनी रहेगी, लेकिन इसके साथ ही उनके पास सियासी लड़ाईयों के लिए भी पूरा वक्त होगा.     

     

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