पूर्व भाजपा सांसद रामटहल चौधरी आज थाम सकते हैं जदयू का दामन, रांची संसदीय सीट से बेटा रणधीर चौधरी का चुनाव लड़ने की चर्चा तेज

    पूर्व भाजपा सांसद रामटहल चौधरी आज थाम सकते हैं जदयू का दामन, रांची संसदीय सीट से बेटा रणधीर चौधरी का चुनाव लड़ने की चर्चा तेज

    Ranchi-नीतीश कुमार के बाद बेहद खास और भीम संवाद का आयोजन कर जदयू के लिए सियासी जमीन को मजबूत करने में जुटे मंत्री अशोक चौधरी और जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह की मौजदूगी में आज रांची संसदीय सीट से पांच बार के सांसद रहे रामटहल चौधरी जदयू का दामन थाम सकते हैं. इसके साथ ही इस बात की चर्चा तेज हो चुकी है कि अशोक चौधरी की नजर अब बिहार के साथ ही झारखंड में जदयू की जमीन तैयार करने की है. राम टहल चौधरी को जदयू में शामिल करवाना उसी रणनीति का पहला हिस्सा माना जा रहा है, अशोक चौधरी की नजर मुख्य रुप से महतो समुदाय से आने वाले नेताओं पर टिकी है, राम टहल चौधरी तो महज एक बानगी है, आने वाले दिनों में कई और कुर्मी-महतो नेताओं को जदयू में शामिल करवाया जा सकता है. जबकि दूसरी ओर ललन सिंह की नजर सवर्ण जाति के नेताओं पर लगी हुई है. वह ऐसे कद्दावर नेताओं की खोज में है. जिनकी झारखंड की सियासत में अपनी जमीन हो, और अपने बूते चुनाव जीतने की हैसियत रखते हों. और यह पूरी रणनीति इस बात का साफ संकेत हैं कि 2024 के महाजंग से पहले जदयू झारखंड में अपनी पुरानी जमीन को वापस पाना चाहता है.  इस बीच खबर यह भी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के बनैर तले रांची संसदीय सीट से राम टहल चौधरी के बेटे रणधीर चौधरी उम्मीदवार बनाया जा सकता है.

    रांची संसदीय सीट पर कुर्मी मतदाताओं की बड़ी मौजूदगी

    ध्यान रहे कि रांची संसदीय सीट पर कुर्मी महतो मतदाताओं की एक बड़ी आबादी है, और यदि इस संसदीय सीट पर नीतीश कुमार की मौजदूगी होती है, तो कुर्मी महतो जाति के मतदाताओं की गोलबंदी जदयू के पक्ष में तेज हो सकती है. इसके विपरीत यदि रांची संसदीय सीट से तीन तीन बार के सांसद रहे सुबोधकांत सहाय के पास इसकी तुलना में कोई बड़ा सामाजिक जनाधार नहीं है, और इसके साथ ही वह चुनाव हारने के  बाद लगातार उनकी सक्रियता कम होती गयी है, इसके विपरीत अपनी बढ़ती उम्र के बावजूद रामटहल चौधरी लगातार अपने इलाके में सम्पर्क बनाये हुए है. अब देखना होगा कि इंडिया गठंबधन के अंदर इस बात पर कितनी सहमति बन पाती है, लेकिन इसके आसार इसलिए भी नजर आ रहे हैं कि झामुमो के पास ही रांची संसदीय सीट से कोई मजबूत चेहरा नहीं है, एक महुआ माजी थी, जिन्हे शहर का सबसे  सौम्य चेहरा माना जाता था, लेकिन  फिलहाल वह राज्यसभा की सदस्य है, इस हालत में यदि इंडिया गठबंधन रणवीर चौधरी पर अपना दांव लगा दे तो कोई आश्चर्य नहीं होगा.

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