जमशेदपुर (JAMSHEDPUR): झारखंड में अब घायल और बीमार हाथियों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकेगा. दलमा की तराई में डिमना लेक के पास भादूडीह में राज्य का पहला एलीफेंट केयर सेंटर बनकर तैयार हो गया है.इसी माह इसके उद्घाटन की संभावना है. प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा राज्य के पहले एलीफेंट केयर सेंटर का उद्घाटन किया जाएगा. यह करीब 7 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. करीब एक करोड़ की लगत से बना यह सेंटर आधुनिक सुविधाओं से लैस है. यहां हाथियों के इलाज, देखभाल और पुनर्वास की समुचित व्यवस्था की गई है. सेंटर को हाथियों के प्राकृतिक आवास के अनुरूप विकसित किया गया है. इस पहल का उद्देश्य न केवल घायल हाथियों को सुरक्षित जीवन देना है, बल्कि मानव-हाथी संघर्ष को भी कम करना है. यह सेंटर वन्यजीव संरक्षण की दिशा में राज्य के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है. दलमा डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि एलीफेंट केयर सेंटर बनकर तैयार है. इसी माह इसका उद्घाटन किया जाएगा. इसे अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस किया गया है. यहां हाथियों के उपचार की व्यवस्था होगी.

हर सुविधा से लैस होगा एलीफेंट केयर सेंटर
एलीफेंट केयर सेंटर में हाथियों की देखभाल के लिए समुचित और आधुनिक व्यवस्थाएं की गई हैं. यहां उनके लिए पर्याप्त चारा उपलब्ध रहेगा. पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तालाब और वाटर टैंक बनाए गए हैं. हाथियों के स्नान के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है. सेंटर में विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात होगी. डॉक्टर्स हाथियों की नियमित स्वास्थ्य जांच और उपचार करेंगे. इसके अलावा अनुभवी महावतों की भी नियुक्ति की जाएगी. ताकि हाथियों की देखरेख और व्यवहारिक जरूरतों को सही ढंग से संभालने के लिए महावत रखा जाएगा.

राज्य में तीन और एलीफेंट केयर सेंटर की तैयारी
वन विभाग राज्य में हाथियों के संरक्षण को मजबूत करने के लिए तीन और एलीफेंट केयर सेंटर स्थापित करने पर काम कर रहा है. प्रस्ताव के तहत हजारीबाग और लातेहार के बीच दामोदर नदी किनारे एक बड़ा सेंटर बनाया जाएगा. इसके अलावा रांची और गुमला के बीच भी एक और आधुनिक सेंटर स्थापित करने की तैयारी है. वहीं चाईबासा में भी रेस्क्यू सेंटर विकसित किया जाएगा. इन सभी परियोजनाओं के लिए विभाग ऐसे स्थानों की तलाश कर रहा है, जहां पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो, ताकि हाथियों के रहने, इलाज और देखभाल की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके.

बाहरी टीम पर निर्भरता घटेगी
झारखंड में अब तक घायल हाथियों के उपचार और रेस्क्यू के लिए वन विभाग को बाहरी विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ती थी. कई मामलों में दूर-दराज से टीम बुलाने के कारण इलाज में देरी हो जाती थी, जिसका खामियाजा हाथियों को जान गंवाकर चुकाना पड़ता था. हाल के समय में सारंडा और चांडिल क्षेत्रों में ऐसे दुखद उदाहरण सामने आए हैं. इस स्थिति को देखते हुए राज्य में अपने एलीफेंट केयर सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जिससे समय पर इलाज और त्वरित रेस्क्यू संभव हो सके.

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