धनबाद नगर निगम के खिलाफ गुस्से में वार्ड पार्षद 

THENEWSPOST
THENEWSPOST

Digital News Desk • July 1, 2026

धनबाद नगर निगम के वार्ड पार्षद अब खुद नगर निगम की व्यवस्था से नाराज़ नज़र आ रहे हैं.बेकार बांध में पार्षदगण एक जुट हुए. बैठक में 36 पार्षदों ने उपस्थिति दर्ज कराई.पार्षदों का आरोप है कि एक ओर अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है

TNP DESK:जनता की उम्मीदों के साथ चुने गए धनबाद नगर निगम के वार्ड पार्षद अब खुद नगर निगम की व्यवस्था से नाराज़ नज़र आ रहे हैं.बेकार बांध में पार्षदगण एक जुट हुए. बैठक में 36 पार्षदों ने उपस्थिति दर्ज कराई.पार्षदों का आरोप है कि एक ओर अपेक्षित विकास कार्य नहीं हो रहे हैं, तो दूसरी ओर उनकी सुनवाई भी नहीं हो रही है. बैठक में आगे के आंदोलन की रणनीति तैयार की गई. वार्ड 20 के पार्षद और स्थाई समिति सदस्य अशोक पाल ने कहा कि नगर निगम बोर्ड से जो भी प्रस्ताव पारित होते हैं उसे इमलीमेंट किया जाना चाहिए. जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए तय समय सीमा में प्रमाण पत्र निर्गत होना चाहिए तथा त्रुटि सुधार होने चाहिए. उन्होंने एक आरोप यह भी लगाया कि बोर्ड से पारित किया गया था कि प्रत्येक वार्ड को 15 - 15 सफाईकर्मी दिये जायेंगे बल्कि इसके उलट सफाई कर्मियों में कटौती की जा रही है.

 बैठक में मौजूद अन्य पार्षदों ने भी अपनी-अपनी समस्याएं सामने रखीं। उनका कहना था कि निगम बोर्ड की बैठकों में विकास कार्यों से जुड़े कई प्रस्ताव पारित होते हैं, लेकिन उन पर अमल नहीं होने से योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाती हैं. पार्षदों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो शहर के विकास की गति प्रभावित होगी और जनता का भरोसा भी कमजोर होगा.वार्ड 35 की पार्षद एवं स्थाई समिति सदस्य सोनाली का कहना है कि सड़क, नाली, पेयजल, स्ट्रीट लाइट और सफाई जैसी बुनियादी समस्याओं की जानकारी बार-बार निगम अधिकारियों को देने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही। इससे जनता के बीच उन्हें जवाब देना मुश्किल हो रहा है.

बैठक में पार्षदों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आगे आंदोलन तेज करने को बाध्य होंगे। बैठक में इस मुद्दे पर उपस्थित सभी पार्षदों ने एकजुटता भी दिखाई.फिलहाल, नगर निगम के निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की यह नाराज़गी कई सवाल खड़े कर रही है.क्या चुनाव के महज चार महीने बाद ही पार्षदों और नगर निगम प्रशासन के बीच बढ़ती दूरी शहर के विकास कार्यों को प्रभावित करेगी? या फिर निगम प्रशासन पार्षदों की शिकायतों को गंभीरता से लेकर बेहतर समन्वय स्थापित करेगा?