धनतेरस की रात यम का दीया जलाना क्यों है खास? जानें सही समय, दिशा और इससे जुड़ी मान्यता

  • November 4, 2026 10:19 pm
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दिवाली से पहले धनतेरस के दिन घरों में दीप जलाने की परंपरा है. इसी दिन यमराज के नाम से भी एक विशेष दीपक जलाया जाता है, जिसे यम दीपदान कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दीपक को जलाने से परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है और घर के सदस्यों की लंबी उम्र की कामना पूरी होती है. इसे अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है. आइए जानते हैं यम का दीया जलाने का महत्व, सही समय, दिशा और इसकी पूरी विधि.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यम का दीया जलाने का संबंध परिवार के सदस्यों की लंबी उम्र और उनकी कुशलता की कामना से है. माना जाता है कि धनतेरस की शाम यमराज के निमित्त दीपदान करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. इस परंपरा को यम दीपदान कहा जाता है. दीपक जलाते समय लोग यमराज से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं. हालांकि, इसे धार्मिक आस्था और परंपरा का हिस्सा माना जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य जीवन के प्रति सम्मान और परिवार की मंगलकामना करना है.

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यम का दीया मुख्य रूप से धनतेरस यानी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को जलाया जाता है. इस दिन सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में दीपदान करना शुभ माना जाता है. धार्मिक परंपरा के अनुसार, शाम के समय यमराज के नाम से दीपक जलाकर परिवार की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है. कुछ परिवारों में नरक चतुर्दशी यानी छोटी दिवाली के दिन भी यम दीपदान किया जाता है. इसलिए दीपदान का समय तय करते समय स्थानीय पंचांग और परिवार की परंपरा का ध्यान रखना चाहिए.

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यम दीपदान की परंपरा में दीपक रखने की दिशा का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, यम का दीया घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है. दरअसल, हिंदू धर्म में दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना गया है. इसी वजह से इस दिशा में दीपदान करने की परंपरा प्रचलित है. दीपक रखते समय ध्यान रखें कि वह सुरक्षित स्थान पर हो, जहां हवा से बुझने या किसी के पैर लगने का खतरा न हो. कई घरों में इसे मुख्य द्वार की चौखट के पास रखा जाता है.

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यम दीपदान करने के लिए सबसे पहले मिट्टी का एक दीपक लें. इसमें सरसों या तिल का तेल डालें और रूई की बाती लगाएं. इसके बाद शाम के समय दीपक जलाकर घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखें. कुछ परिवारों में चौमुखा दीपक जलाने की भी परंपरा है. दीपक जलाते समय यमराज का स्मरण करें और परिवार के सभी सदस्यों की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. इस दौरान साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें. विधि में परिवार की परंपरा के अनुसार बदलाव हो सकता है.

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यम दीपदान को हिंदू धर्म में जीवन की रक्षा और परिवार की मंगलकामना से जुड़ी परंपरा माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन यमराज के निमित्त दीप जलाने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. दीपक का प्रकाश अंधकार को दूर करने और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है. इसी भाव के साथ लोग अपने परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं. यह परंपरा हमें अपने परिवार के प्रति प्रेम, जिम्मेदारी और जीवन के महत्व का भी एहसास कराती है. हालांकि, इससे जुड़ी मान्यताएं धार्मिक आस्था पर आधारित हैं.

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यम दीपदान का मूल भाव केवल एक दीपक जलाना नहीं, बल्कि अपने और अपने परिवार के अच्छे स्वास्थ्य, लंबी उम्र और सुरक्षित जीवन की कामना करना है. धार्मिक मान्यताओं में यमराज को मृत्यु का देवता माना गया है. ऐसे में उनके नाम से दीपदान करके लोग अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना करते हैं. यह परंपरा दिवाली के त्योहार में दीपक के महत्व को भी दर्शाती है. दीप जलाकर परिवार के लोग सुख, शांति और मंगल की कामना करते हैं. इस तरह यम दीपदान आस्था, विश्वास और पारिवारिक कल्याण से जुड़ी एक पुरानी परंपरा है.