कौन है ‘बिट्टू तबाही’? नदी बचाने निकला 21 साल का ‘हीरो’

  • September 6, 2026 10:35 pm
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नदी की गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन 21 साल के एक छात्र ने खुद पानी में उतरकर सफाई शुरू कर दी. मध्य प्रदेश के सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ की यह मुहिम अब अजनार नदी से निकलकर सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण जगत तक पहुंच चुकी है.

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सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘बिट्टू तबाही’ नाम खूब चर्चा में है. असल में यह नाम मध्य प्रदेश के ब्यावरा के रहने वाले 21 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी का है. बीएससी के छात्र सुरेंद्र ने अजनार नदी की बदहाल स्थिति देखी तो सिर्फ शिकायत करने के बजाय खुद इसे साफ करने का फैसला किया. नदी में प्लास्टिक, बोतलें, जलकुंभी और दूसरी गंदगी जमा थी. उन्होंने पानी में उतरकर सफाई शुरू की. शुरुआत में कुछ दोस्तों ने साथ दिया, लेकिन बाद में उन्होंने अकेले ही अपना अभियान जारी रखा. महीनों की मेहनत ने उनकी इस छोटी-सी पहल को सोशल मीडिया पर बड़ी पहचान दिला दी.

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सुरेंद्र सिंह चौधरी उर्फ ‘बिट्टू तबाही’ मध्य प्रदेश के ब्यावरा के रहने वाले हैं, वह बीएससी की पढ़ाई कर रहे हैं. आम युवाओं की तरह वह भी सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते थे, लेकिन अजनार नदी की हालत ने उन्हें कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया. नदी में बढ़ती गंदगी देखकर उन्होंने तय किया कि बदलाव का इंतजार करने के बजाय खुद शुरुआत करनी चाहिए. इसके बाद उन्होंने नदी की सफाई को अपना मिशन बना लिया. धीरे-धीरे उनके सफाई अभियान के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने लगीं. उनके काम करने के तरीके और लगातार मेहनत ने लोगों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया.

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बिट्टू ने 26 जनवरी 2026 से अजनार नदी की सफाई का अभियान शुरू किया. नदी की स्थिति बेहद खराब थी. पानी में जगह-जगह प्लास्टिक की बोतलें, पॉलिथीन, जलकुंभी और दूसरी गंदगी जमा थी. शुरुआत में कुछ दोस्त उनके साथ सफाई अभियान में जुड़े. सभी ने मिलकर नदी से कचरा निकालना शुरू किया. लेकिन कुछ समय बाद साथ देने वाले लोग कम होते गए और बिट्टू ने अकेले ही काम जारी रखा. वह लगातार नदी में उतरकर गंदगी निकालते रहे. उनका लक्ष्य सिर्फ नदी को साफ करना नहीं था, बल्कि लोगों में यह संदेश पहुंचाना भी था कि सार्वजनिक जगहों और प्राकृतिक संसाधनों की सफाई केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है.

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नदी की सफाई के लिए बिट्टू ने किसी बड़े बजट या संस्था का इंतजार नहीं किया. उन्होंने अपनी जेब से करीब 30 हजार रुपये खर्च किए. सफाई के जरूरी सामान से लेकर डस्टबिन खरीदने और नदी से गंदगी निकालने तक, उन्होंने खुद खर्च उठाया. कई महीनों तक वह लगातार नदी की सफाई में जुटे रहे। प्रदूषित पानी में उतरकर काम करना आसान नहीं था. लगातार नदी में काम करने का असर उनकी सेहत पर भी पड़ा. इसके बावजूद उन्होंने अभियान बंद नहीं किया, उनके लिए यह सिर्फ सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने का काम नहीं था, बल्कि नदी को साफ और लोगों को जिम्मेदार बनाने की कोशिश थी.

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बिट्टू की मुहिम जैसे-जैसे सोशल मीडिया पर सामने आने लगी, वैसे-वैसे उनकी आलोचना भी हुई. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि वह सिर्फ सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए नदी की सफाई कर रहे हैं. लेकिन बिट्टू ने इन सवालों का जवाब बहस से नहीं, बल्कि अपने काम से दिया. उन्होंने नदी की पहले और बाद की तस्वीरें और वीडियो साझा किए, जिनसे सफाई के बाद हुए बदलाव को दिखाया जा सके. लगातार काम करते रहने से उनकी मुहिम लोगों तक पहुंचती गई. धीरे-धीरे आलोचना के बीच उनकी मेहनत की चर्चा भी बढ़ी और कई लोगों ने उनके प्रयास की सराहना करनी शुरू कर दी.

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बिट्टू की नदी सफाई की कहानी सोशल मीडिया से निकलकर देश की बड़ी हस्तियों तक पहुंची, उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनके प्रयास की सराहना की और उनकी कहानी को प्रेरणादायक बताया. इसके बाद बिट्टू की मुहिम को और ज्यादा पहचान मिली. उनकी कहानी भारत तक ही सीमित नहीं रही. इंग्लैंड के पूर्व क्रिकेटर केविन पीटरसन ने भी उनकी नदी सफाई की पहल की तारीफ की. एक छोटे शहर का 21 साल का छात्र, जो अपनी जेब से नदी की सफाई कर रहा था, अब देश और विदेश में चर्चा का विषय बन चुका था. उनकी कहानी युवाओं की पहल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण बन गई.

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बिट्टू की मुहिम मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव तक भी पहुंची. मुख्यमंत्री ने उनसे मुलाकात की और अजनार नदी की सफाई के उनके प्रयास की सराहना की. बिट्टू के लिए यह मुलाकात इसलिए खास थी क्योंकि जिस अभियान की शुरुआत उन्होंने अकेले की थी, उसकी चर्चा अब सरकार के स्तर तक पहुंच चुकी थी. मुख्यमंत्री ने उनकी मेहनत को युवाओं के लिए प्रेरणादायक बताया. हालांकि बिट्टू का कहना रहा कि उनकी कोशिश किसी एक व्यक्ति या सरकार को श्रेय देने की नहीं, बल्कि लोगों को अपनी जिम्मेदारी समझाने की है. वह चाहते हैं कि सफाई को केवल सरकारी अभियान न मानकर हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे.

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बिट्टू की कहानी अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन द ओशन क्लीनअप तक भी पहुंची. इसके संस्थापक और सीईओ बॉयेन स्लैट ने सोशल मीडिया के जरिए उनके काम की सराहना की और उन्हें अपनी टीम के साथ काम करने का न्योता दिया. एक स्थानीय नदी की सफाई से शुरू हुआ अभियान अब अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण क्षेत्र तक पहुंच गया. यह बिट्टू की मेहनत के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. उनकी कहानी यह दिखाती है कि बदलाव की शुरुआत करने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती. अगर किसी काम के पीछे जुनून और लगातार मेहनत हो, तो एक छोटे शहर से शुरू हुई पहल भी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच सकती है.

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बिट्टू की कहानी सिर्फ सोशल मीडिया पर वायरल होने, सेलिब्रिटी की तारीफ या नौकरी के ऑफर की कहानी नहीं है. असली बात यह है कि एक युवा ने अपने आसपास की समस्या देखी और बदलाव का इंतजार करने के बजाय खुद शुरुआत की. इसी दौरान उनकी मुहिम पर राजनीतिक और सोशल मीडिया बहस भी हुई. लेकिन बिट्टू ने कहा कि उनका मकसद किसी से क्रेडिट लेना नहीं, बल्कि लोगों में सिविक सेंस और जिम्मेदारी की भावना पैदा करना है. अजनार नदी की सफाई से शुरू हुई उनकी पहल आज कई लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी है. उनकी कहानी बताती है—एक व्यक्ति की पहल भी बदलाव की शुरुआत बन सकती है