गांव के आंगन से ग्लोबल मंच तक… कैसे गुजरात की पहचान बना
नवरात्रि आते ही गुजरात की गलियों से लेकर बड़े-बड़े मैदानों तक गरबा की धूम दिखाई देने लगती है. रंग-बिरंगे चनिया-चोली, पारंपरिक संगीत, तालियों की गूंज और गोल घेरे में थिरकते लोग इस उत्सव को खास बनाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि गांवों के आंगन और मंदिरों से शुरू हुई यह लोकपरंपरा आज दुनिया भर में लोकप्रिय है? आइए जानते हैं गरबा की शुरुआत, धार्मिक महत्व, डांडिया से इसका अंतर और इसे मिली वैश्विक पहचान की कहानी.

















