क्या अब खत्म की कगार पर नक्सलवाद? सारंडा में बड़ी कार्रवाई के बाद बदले हालात

क्या अब खत्म की कगार पर नक्सलवाद? सारंडा में बड़ी कार्रवाई के बाद बदले हालात

चाईबासा (CHAIBASA): कभी नक्सलियों का अभेद्य गढ़ माने जाने वाला जिला पश्चिम सिंहभूम अब नक्सलमुक्त होता नजर आ रहा है. सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के घने जंगल, जहां कभी नक्सलियों की मजबूत पकड़ मानी जाती थी, वहां अब उनकी गतिविधियां लगभग थम सी गई है. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि क्या पश्चिम सिंहभूम में नक्सलवाद अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है? हाल के दिनों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई ने नक्सली संगठन को बड़ा झटका दिया है. पतिराम मांझीउर्फ अनल दा समेत 15 नक्सलियों के एनकाउंटर को संगठन के लिए सबसे बड़ी चोट माना जा रहा है. इस कार्रवाई के बाद न केवल नक्सलियों का मनोबल प्रभावित हुआ, बल्कि उनके नेटवर्क पर भी असर पड़ा. इसी बीच पश्चिम सिंहभूम के कई सक्रिय नक्सलियों के आत्मसमर्पण करने से संगठन की ताकत और कमजोर हुई है. एक करोड़ रुपये के इनामी नक्सली मिसिर बेसरा, असीम मंडल समेत कई बड़े नेताओं के जिले के जंगलों को छोड़कर दूसरे क्षेत्रों में शरण लेने की सूचना है. इससे यह संकेत मिल रहा है कि संगठन अब अपने पुराने प्रभाव वाले इलाकों में खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है. पिछले कई दिनों से सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान के जंगलों में किसी बड़ी नक्सली गतिविधि की खबर सामने नहीं आई है. इससे यह चर्चा तेज हो गई है कि पश्चिम सिंहभूम में नक्सलियों की पकड़ लगभग खत्म हो चुकी है. कई बीच सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन भी जिले के जंगलों में जारी है. कहा जा रहा है कि सुरक्षाबलों का सुरक्षा घेरा तोड़ कर यहां के बचे नक्सलियों भाग निकले है. 

कैसे बैकफुट पर जा रहे नक्सली

सुरक्षाबलों की लगातार घेराबंदी और कार्रवाई से यहां के नक्सली बैकफुट पर जाने को विवश है. सुरक्षाबलों ने नक्सलियों के कई कैंप ध्वस्त किए. यहां कई बड़े नक्सली सुरक्षाबलों ने मार गिराए. यहां नक्सलियों को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब सारंडा में एक साथ 15 नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ. 22 जनवरी को सारंडा के जंगल में सुरक्षाबलों ने 2.35 करोड़ का इनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल दा समेत 15 नक्सलियों का एनकाउंटर हुआ था. अनमोल उर्फ सुशांत, पिंटू लोहारा, समीर सोरेन, बबिता, पूर्णिमा गोप, राजेश मुंडा, सोमवारी पूर्ति समेत अन्य नक्सली भी इस एनकाउंटर में मारे गए थे. अनल दा का एनकाउंटर नक्सलियों के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया. उसे सारंडा में नक्सलियों का मुख्य रणनीतिकार माना जाता था. कोल्हान सारंडा के जंगलों में काफी सक्रिय था. अनल भाकपा (माओवादी) संगठन का सेंट्रल कमेटी मेंबर था.  

चार साल में कार्रवाई बढ़ी

पश्चिम सिंहभूम का सारंडा, पोड़ाहाट और कोल्हान क्षेत्र करीब तीन दशकों तक माओवादी गतिविधियों का सबसे बड़ा गढ़ माना जाता रहा. घने जंगलों और दुर्गम इलाकों का फायदा उठाकर नक्सलियों ने यहां अपनी मजबूत पकड़ बना रखी थी. लेकिन पिछले चार वर्षों में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए लगातार अभियानों ने इस नेटवर्क को गहरी चोट पहुंचाई है. वर्ष 2022 से जून 2026 तक सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट के जंगलों में कुल 23 मुठभेड़ें हुईं, जिनमें 29 नक्सली मारे गए. इस दौरान नक्सलियों के 44 बंकर ध्वस्त किए गए और उनके कई सुरक्षित ठिकानों को खत्म कर दिया गया.नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए अभियान में भारी मात्रा में हथियार और विस्फोटक भी बरामद किए गए. आईईडी के मोर्चे पर भी बड़ी सफलता मिली. वर्ष 2022 से 2023 के बीच गोइलकेरा, टोंटो और चाईबासा के जंगलों में 692 घातक आईईडी बरामद कर निष्क्रिय किए गए. लगातार अभियानों, गिरफ्तारियों, सरेंडर और बड़े कमांडरों पर शिकंजा कसने के बाद अब सवाल उठने लगा है कि क्या पश्चिम सिंहभूम में माओवाद अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है. 

मिसिर -असीम हुए कमजोर

लगातार कार्रवाई और कई नक्सलियों के सरेंडर करने के बाद एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा और असीम मंडल कमजोर हो गए है. सूचना है कि मिसिर बेसरा और असीम मंडल बचे कूचे नक्सलियों के साथ पश्चिम सिंहभूम के जंगलों को छोड़ चुका है. नक्सलियों के बंगाल भाग जाने की चर्चा है. हालांकि इनकी तलाश में जिले के जंगलों में सुरक्षाबलों का सर्च ऑपरेशन जारी है.