शराब सिंडिकेट पर ED ने कसा शिकंजा, अनवर ढेबर और तीन कंपनियों की संपत्तियां कुर्क

शराब सिंडिकेट पर ED ने कसा शिकंजा, अनवर ढेबर और तीन कंपनियों की संपत्तियां कुर्क

रांची (RANCHI): छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच कर रही ED ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अनवर ढेबर और उससे जुड़ी तीन कंपनियों यानी ओम साई बेवरेजेस प्राइवेट लिमिटेड, डिशिता वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और नेक्सजेन पावर इंजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में जमा राशि, शेयरों और म्यूचुअल फंड निवेशों को कुर्क कर लिया है. ईडी की इस कार्रवाई से भ्रष्टाचार के इस सिंडिकेट पर शिकंजा और कड़ा हो गया है. जांच के अनुसार, इन कंपनियों को अपने मुनाफे का 50 से 60 प्रतिशत हिस्सा जबरन इस अवैध सिंडिकेट को देना पड़ता था, जिसके माध्यम से करीब 51 करोड़ रुपये की अवैध राशि सिंडिकेट तक पहुंचाई गई थी.

इस घोटाले के तार पड़ोसी राज्य झारखंड से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. झारखंड शराब घोटाले की जांच के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को पता चला कि मैनपावर सप्लायर कंपनियां—डिशिता वेंचर्स और ओम साईं बेवरेज लिमिटेड एक सोची-समझी साजिश के तहत काम कर रही थीं. इन कंपनियों ने बाजार में प्रतिस्पर्धा को पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकारी नियमों को ताक पर रख दिया. इन्होंने केवल उन्हीं चुनिंदा सप्लायर्स से शराब का स्टॉक लिया, जिनसे इन्हें पहले से तय मोटा कमीशन मिलता था. इस पूरी प्रक्रिया का एकमात्र मकसद केवल सिंडिकेट का हिस्सा बने सप्लायर्स को नाजायज लाभ पहुंचाना था.

जांच एजेंसी ने अदालत को यह भी अवगत कराया कि इस देशी शराब के अवैध खेल में कमीशन की दरें पहले से तय थीं. सप्लायर्स से प्रति पेटी 300 रुपये से लेकर 600 रुपये तक का भारी कमीशन वसूला जाता था. वसूली गई यह अवैध राशि सिर्फ बिचौलियों की जेब तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका एक बड़ा हिस्सा रिश्वत के रूप में उत्पाद विभाग के शीर्ष अधिकारियों तक पहुंचता था. पूछताछ के दौरान कई आरोपियों ने इस सिंडिकेट के पीछे उत्पाद विभाग के तत्कालीन सचिव विनय चौबे और छत्तीसगढ़ के विवादित अधिकारी अरुण पति त्रिपाठी जैसी प्रभावशाली हस्तियों के नामों का सीधा खुलासा किया है.