जातीय जनगणना और पिछड़ों की हिस्सेदारी-भागीदारी का जवाब, भाजपा का राम राम! ‘हाय-हल्लो’ पर रोक तो ‘प्रणाम’ से दूरी का फरमान

    जातीय जनगणना और पिछड़ों की हिस्सेदारी-भागीदारी का जवाब, भाजपा का राम राम! ‘हाय-हल्लो’ पर रोक तो ‘प्रणाम’ से दूरी का फरमान

    Patna-लालू-नीतीश की जातीय जनगणना और पिछड़ों-दलितों की सियासी-सामाजिक भागीदारी के सवाल में उलझने के बजाय भाजपा ने राम-राम के गुरुमंत्र के साथ इस मंडलवादी राजनीति का अमंडलवादी खोज निकाल लिया है. 2024 के महासंग्राम पर निकलने से पहले मंडलवादी राजनीति के तमाम सुरमाओं को राम राम के इस प्रबोधन के साथ ही यह संकेत देने की कोशिश की गयी है कि आप भले ही अपने सियासी पिच मनचाहा चौका छक्का की बरसात कर रहे हों, लेकिन अंतिम मुकाबले में हमारा यह राम राम आपके हर सवालों का जवाब होगा. इस राम राम में दलित-अतिपिछडों और पिछड़ों की सामाजिक सियासी भागीदारी के सवालों का जवाब भी होगा और देश में बढ़ती मंहगाई-बेरोजगारी का समाधान भी.

    2024 के महासंग्राम के पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को गुरुमंत्र

    दरअसल, बिहार भाजपा की ओर से अपने तमाम कार्यकर्ताओं को यह निर्देश दिया गया है कि आज के बाद आपको किसी भी हालत में किसी को हाय-हल्लो बोल कर अभिवादन नहीं करना है, प्रणाम से दूर रहना है, और इससे साथ ही एक विधान सभा से कम के कम दस हजार लोगों को अयोध्या ले जाकर रामलला का दर्शन करवाना है. राज्य के करीबन 17 लाख घरों में इस संदेश को अगले पखवाड़े तक पहुंचा देना है, इस काम की मदद के लिए स्थानीय स्तर पर संचालित स्वयं सहायता समूहों, एनजीओ की भी मदद लेनी है. ताकि यह संदेश हर टोले बस्ती तक पहुंचाया जा सके.

    जातीय जनगणना और पिछडों के आरक्षण विस्तार के बाद बदली नजर आने लगी है बिहार की सियासत

    ध्यान रहे कि बिहार में जातीय जनगणना का प्रकाशन और उसके बाद पिछड़ों के आरक्षण विस्तार के बाद यह दावे सामने आ रहे हैं कि 2024 के लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के आगे भाजपा काफी पीछे रहने वाली है. इन तमाम आशंकाओं और कयासबाजियों के बीच भाजपा ने राम राम के नारे के साथ अपनी जमीनी लड़ाई का श्रीगणेश कर दिया है, अब देखना होगा कि यह राम राम का नारा भाजपा को सियासी रुप से कितना मजबूत बनाती है,और महागठबंधन की सियासी हसरतों पर किस हद तक पानी फेरती है.

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