अंधेर नगरी, चौपट राजा! बाबूलाल ने पूर्व सीएम हेमंत की फ्लैगशीप योजना “आदिवासी समाज के छात्रों के लिए फ्री यूपीएससी कोचिंग” पर बोला बड़ा हमला

    अंधेर नगरी, चौपट राजा! बाबूलाल ने पूर्व सीएम हेमंत की फ्लैगशीप योजना “आदिवासी समाज के छात्रों के लिए फ्री यूपीएससी कोचिंग” पर बोला बड़ा हमला

    Ranchi-पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की प्लैगशिप योजना, जिसके तहत आदिवासी समाज के छात्रों के लिए यूपीएससी की तैयारी के लिए मुफ्त कोचिंग की शुरुआत की गयी थी, बड़ा हमला बोला है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल ने इस योजना को लेकर 'नो रिलेशन, प्योर कॉमर्शियल' का तंज करते हुए लिखा है कि “अंधेर नगरी, चौपट राजा! झारखंड के आदिवासी छात्रों के भविष्य को बर्बाद करने का ठेका ले रखा है झारखंड की सरकार.  राज्य सरकार द्वारा आदिवासी बच्चों के लिए चलाए जा रहे यूपीएससी कोचिंग सेंटर में छात्रों को दी जा रही शिक्षा में कई प्रकार की अशुद्धियां देखी जा रही हैं। 'VIDEO' की स्पेलिंग तक गलत लिखी गई है... यह योजना आदिवासी बच्चों को IAS, IPS बनाने के लिए नहीं बल्कि 'नो रिलेशन, प्योर कॉमर्शियल' व्हाट्सएप चैट के जरिए अवैध रूप से पैसा कमाने के लिए बनाई गई लगती है? दरअसल हेमंत सरकार की योजना आदिवासी समाज के छात्रों के बीच संध लोकसेवा आयोग की ललक पैदा करने की थी, ताकि अधिक से अधिक संख्या में वंचित समाज के लोगों की भागीदारी इस सेवा में बढ़े और वह भी देश की शासन का हिस्सा बन सकें. और इसी आशय के साथ इस समाज से आने वाले छात्रों के लिए फ्री कोचिंग की शुरुआत की गई थी और इसकी जिम्मेवारी डा. रामदयाल मुंडा जनजातीय कल्याण शोध संस्थान को सौंपी गयी थी. जहां चार माह की कोचिंग में छात्रों को इस परीक्षा की बारीकियों को समझाया जायेगा.

    भाजपा का दावा पढ़ाई से ज्यादा अखबारों के विज्ञापन पर खर्च

    हालांकि भाजपा पहले भी इस योजना को कमियां गिनाती रही है, उसका आरोप है कि यह योजना जमीन से ज्यादा अखबारों के विज्ञापन में दिखलायी पड़ती है, सरकार यूपीएससी की कोचिंग देने के नाम पर पैसे की लूट करवा रही है. इस योजना के बावजूद आज भी झारखंड के गरीब बच्चों को यूपीएससी की तैयारी के लिए महँगे कोचिंग संस्थानों में जाना पड़ रहा है. और अब कुछ वीडियो को सामने लाकर यह बताने की कोशिश की जा रही है कि जब “video” की स्पेलिंग ही गलत लिखी जा रही है तो वहां शिक्षा का स्तर क्या होगा? हालांकि एक सच्चाई यह भी है कि जिसे “vedio” को आधार बना  कर बाबूलाल हमला बोल रहें है, उसका वहां प्रशिक्षण प्रदान कर रहे शिक्षिकों की योग्यता से कोई संबंध नहीं है. क्योंकि वीडियो अपलोड करने का काम शिक्षकों का नहीं है, इसके लिए तो दूसरी कर्मी होते हैं, और अक्सर कई बार यह गलती जाती है, महज इसी आधार पर किसी योजना की प्रासंगिकता पर सवाल नहीं खड़ा किया जा सकता, लेकिन इसके साथ ही यह भी जरुरी है कि राज्य सरकार इस योजना की कमियों को दूर कर गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा भी सुनिश्चित करें. जिसके कि आदिवासी समाज के साथ ही दूसरे वंचित समाज के छात्रों देश की इस सबसे लब्धप्रतिष्ठित परीक्षा में शामिल होने का जज्बा पैदा हो सकें, उनके सपने बिखरे नहीं, उनकी जिंदगी में भी विकास की रोशनी पहुंच सके और शायद इसी मकसद के साथ इस योजना की शुरुआत की गयी थी.

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