‘जब नाश मनुष्य पर छाता है पहले विवेक मर जाता है’ सीता सोरेन के ‘बाप बेटे की जोड़ी’ वाले ट्वीट पर झामुमो का पलटवार

    ‘जब नाश मनुष्य पर छाता है पहले विवेक मर जाता है’ सीता सोरेन के ‘बाप बेटे की जोड़ी’ वाले ट्वीट पर झामुमो का पलटवार

    Ranchi- 2024 का महासंग्राम सिर्फ सड़क-चौराहों पर ही नहीं लड़ी जा रही है, सियासी मैदान से अधिक यह संग्राम सोशल मीडिया पर लड़ा जा रहा है. कल तक सोरेन परिवार की बड़ी बहू के रुप में झामुमो कार्यकर्ताओं के दिलों पर राज करने वाली सीता सोरेन भी दुमका के दंगल के लिए सोशल मीडिया पर एक संग्राम छेड़ती नजर आ रही है. निशाने पर झामुमो का अतीत है और उसका कथित भ्रष्टाचार है. कभी  सीता सोरेन बगैर नाम लिए देवरानी कल्पना पर निशाना साधती है, तो कभी इस बात का दावा ठोंकती हैं कि यदि जुबान खूल गयी तो कई राज बेपर्दा हो जायेगा. लेकिन इस जुबानी जंग में सीता सोरेन को अपने ससुर और दिशोम गुरु पर हमलावर होना भारी पड़ता दिखने लगा. दरअसल जिस दुमका से आज वह जीत का ताल ठोंक रही है. दुमका की जमीन को सोरेन परिवार के लिए उर्वर बनाने में यदि किसी एक शख्स का योगदान है, तो वह दिशोम गुरु शिबू सोरेन हैं. जिस जामा विधान सभा से आज तक सीता सोरेन का सियासी सफर गुजरा है, उसकी भी जमीन दिशोम गुरु ने तैयार की थी. यानि सीता सोरेन ने अब तक का सियासी सफर दिशोम गुरु के विरासत पर पूरा किया है. अपने पैरों पर ख़ड़ा होकर चलने की उनकी यह पहली कोशिश है या फिर वह इसकी कोशिश करती नजर आ रही है. लेकिन अपने पैरों पर चलने की पहली कोशिश के बीच सीता सोरेन वह भूल कर बैठी, जिसके बाद उनके लिए दुमका वाटर लू साबित हो सकता है.

    बाप बेटे की जोड़ी ने झारखंड क लूट का अड्डा बनाकर छोड़ दिया

    और शायद इसका एहसास सीता सोरेन को भी है, और यही कारण है कि अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर “परिवारवादी शहजादे और बाप बेटे की जोड़ी ने झारखंड को लूट का अड्डा बनाकर छोड़ दिया है, लेकिन अब जनता ने ठान लिया है कि इस बार ठगबंधन का पूरी तरह से सफाया हो जायेगा” की हुंकार लगाने वाली सीता सोरेन पर अब पलटती नजर आ रही है.

    झामुमो का आक्रमक पलटवार

    दरअसल जैसे ही सीता सोरेन का यह ट्वीट सामने आया, झामुमो आक्रमक पलटवार सामने आया, झामुमो की ओर से अपने सोशल मीडिया एकाउंट पर लिखा गया कि “व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा अपनी जगह है, देश में और भी राजनैतिक परिवारों में अलगाव हुआ है, आम परिवारों में भी होता है लेकिन इस तरह से शब्दों से कोई कीचड़ नहीं उछालता है। आपकी नाराज़गी पार्टी से हो सकती है, छोटों को भी भला बुरा आप कहिए, हम कुछ नहीं बोलेंगे लेकिन मेरे सिरमौर, झारखण्ड जनक, दिशोम गुरु, आदरणीय बाबा शिबू सोरेन के लिए ऐसे शब्दों का प्रयोग करियेगा तो ख़बरदार‼ आपके सोरेन परिवार से संबंध कुछ सालों का है, लेकिन इस झारखण्ड से बाबा का संबंध झारखण्ड के जन्म से जुड़ा है. मेरी पगड़ी पर हाथ डालने का हक़ न आपको है, न आपके कंधे पर बंदूक़ रखकर चलाने वाले बीजेपी को है. पहले आपको हम सिर्फ़ महत्वाकांक्षी समझते थे लेकिन अब आप नज़रों से भी गिर चुकी है. हेमंत बाबू ने पार्टी के लोगों को आपके ख़िलाफ़ लिखने बोलने से साफ़ मना किया था पर आपकी आज की हरकत देख कर हम अपने आदर्श के आदेश को न मानने पर मजबूर हुए। माफ़ करियेगा हेमंत भइया बाबा के सम्मान से समझौता मंज़ूर नहीं”

    सीता का बचाव

    इस ट्वीट के बाद एक बार फिर से सीता सोरेन सामने आयी, और अपने सोशल मीडिया एकांउट पर लिखा कि अभी अभी पता चला है कि मेरे सोशल मीडिया अकाउंट से एक ट्वीट पोस्ट किया गया है जो असंवेदनशील है और मैं इसके लिए क्षमा प्रार्थी हूं। चुनावी व्यस्तताओं के कारण मैं अपना सोशल मीडिया खुद नहीं चला पा रही हूं, और इसकी जिम्मेदारी एक सोशल मीडिया टीम को दी थी जिसकी तरफ से चूक हुई है। मामले का संज्ञान लेकर उचित कार्यवाही कर दी गईं है।  साथ ही मैं ये कहना चाहती हूं कि जिसने भी मेरी राजनीति को देखा है वे जानते हैं कि मैं बाबा का कितना सम्मान करती हूं पर कुछ लोग इतने मुद्दाविहीन हैं कि इस ट्वीट का राजनैतिक फायदा उठाना चाहते हैं। झारखंड की जनता से आग्रह है कि इनकी भ्रामक बातों में न फंसे”

    सीता सोरेन ने तो माफी मांग ली, लेकिन क्या इस गुस्ताखी के लिए दुमका की जनता माफ करेगी, यह एक बड़ा सवाल है. देखना होगा कि इस वार प्रतिवार के बाद दुमका की सियासत में कौन सा रंग खिलता है. हालांकि सीता के इस ट्वीट पर कल्पना सोरेन की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं आया है, क्या दिशोम गुरु पर इस हमले के बाद भी कल्पना सोरेन अपनी जेठानी पर हमला करने से परहेज करेगी, यह भी देखने  वाली बात होगी.

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