सीएम नीतीश के ‘सेक्स ज्ञान’ के बाद एनसीईआरटी पर बहस तेज! मंत्री अशोक चौधरी का तंज, जो बच्चों के लिए जायज वह विधान सभा में आपत्तिजनक कैसे?

    सीएम नीतीश के ‘सेक्स ज्ञान’ के बाद एनसीईआरटी पर बहस तेज! मंत्री अशोक चौधरी का तंज, जो बच्चों के लिए जायज वह विधान सभा में आपत्तिजनक कैसे?

    Patna-जनसंख्या नियंत्रण के तरीके को लेकर सीएम नीतीश के एक बयान के बाद बिहार और देश की सियासत में भूचाल मचा हुआ है, जहां भाजपा इस बयान को महिलाओं का अपमान बताने की मुहिम में जुट गयी है, वहीं जदयू-राजद के द्वारा सीएम नीतीश का बचाव करने की होड़ लग चुकी है. दोनों ही खेमे के द्वारा एक दूसरे पर वार प्रतिवार का सियासी जंग जारी है.

    आज भी जारी है विधान परिषद के अंदर इस बयान पर हंगामा

    आज शीतकालीन सत्र के चौथा दिन भी विधान परिषद के अंदर हंगामा मचा हुआ है. लेकिन इस हंगामें के बीच भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी ने सीएम नीतीश के बचाव में उस एनसीईआरटी को ही हथियार बना लिया है, जिसका प्रकाशन केन्द्र सरकार के द्वारा किया जाता है. एनसीईआरटी के द्वारा प्रकाशित 12वीं क्लास की जीव विज्ञान की किताब को उछालते हुए अशोक चौधरी ने सवाल खड़ा किया है कि जिस बयान को लेकर सीएम नीतीश को घेरने की साजिश की जा रही है, उन पर महिला विरोधी होने का तोहमत लगाया जा रहा है, वह सब कुछ तो एनसीईआरटी की 12वीं क्लास के जीव विज्ञान की पुस्तक का हिस्सा है, हालांकि उसकी भाषा और प्रस्तुती का अंदाज अलग हो सकता है, लेकिन तथ्य तो वही है. सीएम नीतीश ने तो महज उसी पुस्तक के तथ्य को सामने रखा है, और इसी किताब को पढ़ कर तो हमारे बच्चे आगे बढ़ रहे हैं, परीक्षा पास कर रहे हैं, जीवन में कामयाबी हासिल कर रहे हैं, लेकिन जब उसी तथ्य को विधान परिषद के अन्दर प्रस्तुत किया जाता है तो भाजपा के पेट में दर्द होने लगता है, जो कुछ बच्चों के लिए जायज है, वह विधान सभा और विधान परिषद के लिए आपत्तिजनक कैसे हो गया.

    सीएम का बयान नहीं, पिछड़ों के आरक्षण विस्तार से सदमे है भाजपा

    अशोक चौधरी ने कहा कि यदि भाजपा को इस बात से इतनी ही आपत्ति है तो वह केन्द्र सरकार से इस चैप्टर को हटाने की मांग क्यों नहीं करती. यह स्कूलों में पढ़ाया जाता रहेगा, लेकिन जब इसी तथ्य को  विधान सभा में रखा जायेगा तो हंगामा खड़ा होगा, यह भाजपा के दोहरे मापदंड का प्रमाण है, दरअसल भाजपा को सीएम नीतीश के उस बयान से कोई आपत्ति नहीं है, वह तो पिछड़ों दलितों के आरक्षण बढ़ाने के फैसले से बौखलाई हुई है.

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