बरसों बाद सीएम नीतीश को आई अपनी ‘मूर्खता’ की याद, कहा- हमारी बेवकूफी की वजह से सीएम बने जीतनराम मांझी

    बरसों बाद सीएम नीतीश को आई अपनी ‘मूर्खता’ की याद, कहा- हमारी बेवकूफी की वजह से सीएम बने जीतनराम मांझी

    टीएनपी डेस्क (TNP DESK) :  बिहार विधानपरिषद में इस वक्त शीतकालीन सत्र चल रहा है. शीतकालीन सत्र का चौथा दिन काफी हंगामेदार रहा. सुबह से ही भाजपा के द्वारा सीएम नीतीश कुमार के बयान का जोरदार विरोध किया गया. तो वहीं जेडीयू के नेता ने भी भाजपा के विरोध प्रदर्शन का मुंहतोड़ जवाब दिया. इन सब के बीच सीएम नीतीश कुमार औऱ पूर्व जीतनराम मांझी के बीच भी तीखी नोकझोक देखने को मिली है.

    मेरी मूर्खता से बने जीतनराम मांझी सीएम

    दरअसल, विधानपरिषद में आज आरक्षण संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही थी. इसी दौरान पूर्व सीएम मांझी ने कहा कि उन्हें जातीय गणना के आंकड़ों पर भरोसा नहीं है. तभी सीएम ने उन्हें बीच में टोक दिया इसके बाद सदन के अंदर ही मांझी और नीतीश की बहस शुरू हो गई. इसी बीच सीएम नीतीश कुमार ने यह तक कह दिया कि ‘मांझी तो मेरी मूर्खता से सीएम बना था’. नीतीश कुमार यहीं नहीं रुके, उन्होंने कहा कि जीतनराम मांझी राज्यपाल बनना चाहता है, इसीलिए भाजपा के साथ गया है, अब भाजपा वाले इसे राज्यपाल बना देंगे. इसके बाद मामला बिगड़ता देख सत्तापक्ष की तरफ से कुछ विधायक और तेजस्वी यादव ने नीतीश को संभाला. बाद में विजय कुमार चौधरी ने नीतीश को रोका.

    पूर्व सीएम का बयान आया सामने

    इस मामले पर मांझी का बयान भी सामने आया है. जिसमें उन्होंने कहा कि, 'नीतीश कुमार अगर आपको लगता है कि आपने मुझे मुख्यमंत्री बनाया तो यह आपकी भूल है. जब जदयू विधायकों ने लतियाना शुरू किया तो उसके डर से आप कुर्सी छोड़कर भाग गए थे. आप एक दलित पर ही वार कर सकतें है, अगर हिम्मत है तो ललन सिंह के खिलाफ बोलकर दिखाएं जो आपका ऑपरेशन कर रहें थे.'

    एक जमाने में नीतीश कुमार के करीबी नेताओं में से एक थे जीतनराम मांझी

    जब नीतीश कुमार ने इतनी बड़ी बात कह दी है तो आपकों बता दें कि जीतन राममांझी एक जमाने में नीतीश कुमार के सबसे करीबी नेताओं में से एक माने जाते थे.  इसी बीच साल 2014 में लोकसभा चुनाव में जेडीयू को करारी हार मिली थी. जिसके बाद नीतीश कुमार ने अपने सीएम पद से इस्तीफा दे दी थी. उसी दौरान महादलित समाज के जीतनराम मांझी को सीएम पद सौंपा गया था.

    शुरुआत में मांझी को 'रिमोट कंट्रोल सीएम' कहा गया, लेकिन धीरे-धीरे मांझी खुद बड़े फैसले लेने लगे और नीतीश से उनकी दूरियां बढ़ने लगी. धीरे-धीरे स्थिति जब बिगड़ी तो पार्टी ने मांझी को इस्तीफा देने के लिए कहा लेकिन वे मुकर गए. इस प्रकार जीतनराम मांझी के सिर पर मई 2014 से फरवरी 2015 बिहार के सीएम ताज रहा. बाद में जीतन राम मांझी ने यह बयान भी दिया था कि अपनी हार के बाद सीएम नीतीश ने नैतिकता का नाटक रचा था. अपने स्थिति को मजबूत करने के लिए मेरा ढाल बनाया था. पूर्व सीएम मांझी के आरोप जो हो, लेकिन इतना सत्य कि नौ महीनों की इस ताजपोशी के बाद उनकी गिनती बिहार के मजूबत दलित नेताओं में की जाने लगी. और यह दावा किया जाने लगा कि दलितों की एक बड़ी आबादी, खास कर मुसहर जिस जाति से मांझी आते हैं, वह मुसहर जाति का आज वह निर्विवाद रुप से सबसे बड़ा चेहरा है.

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