इस multi-speciality hospital में मिलती है super-speciality सुविधा, जानिए रांची के ऐसे अस्पताल के बारे में जहां होता है A to Z इलाज


रांची (RANCHI): आज की दौड़ भाग भरी ज़िंदगी में कब किसे अस्पताल के चक्कर काटने पड़ जाएं, यह कोई नहीं जानता. ऐसे में जब अस्पताल का ख्याल आता है तो लोग इस उम्मीद में भी रहते है की हमें बेहतर इलाज भी मिले और जेब पर भी कम भार पड़े. पर सवाल है की आखिर अपने ही राज्य में कौनसा ऐसा अस्पताल है जहां मल्टी-स्पेशालिटी के साथ ही सुपर-स्पेशालिटी अस्पताल की सुविधा भी मिले और जेब पर ज्यादा कर्ज भी ना पड़े.
ऐसे में अगर आप भी कम खर्च में A टू Z इलाज वाले अस्पताल की तलाश में हैं तो झारखंड का सबसे बड़ा अस्पताल रिम्स पहले पायदान पर आता है. रिम्स में इलाज की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को भी गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं. आयुष्मान भारत, मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं के तहत बड़ी संख्या में मरीजों का कैशलेस इलाज किया जा रहा है. राज्य के दूर-दराज इलाकों से आने वाले मरीजों के लिए ओपीडी, आईपीडी, जांच, दवा और ऑपरेशन की सुविधाएं एक ही परिसर में मिल जाती हैं, जिससे बाहर भटकने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि रिम्स आज सिर्फ रांची ही नहीं, बल्कि पूरे झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए भरोसेमंद इलाज का केंद्र बन चुका है.
बताते चलें कि RIMS में पहले से ही सुपर-स्पेशियलिटी क्लिनिक हैं जहाँ मेडिसिन, पीडियाट्रिक (जैसे मिर्गी), सर्जरी (गैस्ट्रो-इंटेस्टाइनल), और पीडियाट्रिक सर्जरी (जैसे ट्यूमर, यूरोलॉजी) जैसी सेवाओं के लिए विशेष डॉक्टर उपलब्ध हैं. साथ ही एक अत्याधुनिक ऑन्कोलॉजी सेंटर भी है, जिसमें आधुनिक रेडिएशन मशीनें हैं और सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग भी है जो गरीब मरीजों को सेवा देता है. इसके अलावा पूर्वी भारत का पहला 14 बेड वाला ट्रॉमा सेंटर भी रिम्स में मौजूद है.
इसके अलावा स्वास्थ्य विभाग की पहल से रिम्स रांची को गंभीर बीमारियों के इलाज का प्रमुख केंद्र बनाया गया है. यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों, प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ, आधुनिक मशीनों और अत्याधुनिक जांच सुविधाओं को चरणबद्ध तरीके से मजबूत किया जा रहा है.
रिम्स रांची में जानलेवा बीमारी के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है. इसके अलावा किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर लीवर रोग, ब्रेन हेमरेज, बाईपास सर्जरी, गंभीर सिर की चोट, प्लास्टिक सर्जरी और न्यूरो से जुड़ी जटिल सर्जरी का इलाज भी रिम्स में संभव हो सकेगा. आंखों की गंभीर बीमारियों जैसे रेटिनल डिटैचमेंट, प्रोलिफेरेटिव डायबिटिक रेटिनोपैथी और पेनेट्रेटिंग केरेटोप्लास्टी का उपचार भी यहां किया जाएगा.
रिम्स में थैलेसीमिया, विस्कॉट एल्ड्रिच सिंड्रोम, सिकल सेल एनीमिया जैसी अनुवांशिक बीमारियों के इलाज पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है. बोन मैरो ट्रांसप्लांट को लेकर राज्य सरकार की तैयारी अंतिम चरण में है, जिससे भविष्य में यह सुविधा भी रिम्स और संबद्ध अस्पतालों में उपलब्ध हो सकेगी.
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