शशश..... स्मार्ट फोन के भी होते हैं कान! भूलकर भी फोन में ऑन ना करें यह सेटिंग नहीं तो दांव पर लग जाएगी आपकी प्राइवेसी


टीएनपी डेस्क (TNP DESK): आज की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अभिन्न हिस्सा बन चुका है. यह हर समय हमारे साथ रहता है और हमारी दिनचर्या से लेकर आदतों तक सब कुछ जानता है. लेकिन बहुत कम लोग यह समझ पाते हैं कि जेब में रखा यही फोन कई मायनों में हमारी गतिविधियों पर लगातार नजर भी रखता है. चाहे आपके पास आईफोन हो या एंड्रॉयड, दोनों ही प्लेटफॉर्म पर यूजर का डेटा अलग-अलग तरीकों से रिकॉर्ड किया जाता है. अगर आप यह मानते हैं कि आईफोन पूरी तरह सुरक्षित है और उससे आपकी निगरानी संभव नहीं, तो आपको सतर्क होने की जरूरत है.
कई बार ऐसा होता है कि हम किसी विषय पर बातचीत करते हैं और थोड़ी ही देर में उससे जुड़े विज्ञापन सोशल मीडिया या दूसरे ऐप्स पर दिखने लगते हैं. यह महज संयोग नहीं होता, बल्कि डेटा एनालिटिक्स और ट्रैकिंग सिस्टम का नतीजा होता है. टेक कंपनियां यूजर्स की पसंद, लोकेशन और व्यवहार के आधार पर उनका डिजिटल प्रोफाइल तैयार करती हैं. यदि आप अपनी प्राइवेसी को लेकर गंभीर हैं, तो स्मार्टफोन की कुछ अहम सेटिंग्स में बदलाव करना जरूरी है.
आपका स्मार्टफोन आपकी लोकेशन का पूरा रिकॉर्ड रखता है. आप कहां जाते हैं, कितनी देर रुकते हैं और किन जगहों पर बार-बार जाते हैं, यह सब डेटा सेव होता रहता है. आईओएस यूजर्स को Settings में जाकर Privacy, फिर Location Services और System Services के अंदर Significant Locations का विकल्प मिलेगा. यहां से लोकेशन हिस्ट्री को डिलीट कर इसे बंद किया जा सकता है. इससे आपकी गतिविधियों की ट्रैकिंग काफी हद तक रुक जाती है.
बहुत से लोग यह नहीं जानते कि उनके फोन का नाम भी उनकी पहचान उजागर कर सकता है. फोन का नाम आसपास मौजूद स्कैनिंग सिस्टम और डिवाइसेज को दिखाई देता है. बेहतर है कि अपने नाम की जगह कोई सामान्य और पहचान छुपाने वाला नाम चुनें, ताकि कोई अजनबी आपकी जानकारी आसानी से न जुटा सके.
माइक्रोफोन और सेंसर भी आपकी निजता के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं. कई ऐप्स जरूरत न होने के बावजूद माइक्रोफोन एक्सेस लेते रहते हैं. इससे आपकी बातचीत से जुड़े संकेत विज्ञापन कंपनियों तक पहुंच सकते हैं. इसलिए प्राइवेसी सेटिंग्स में जाकर केवल जरूरी ऐप्स को ही माइक्रोफोन की अनुमति दें और बाकी को ब्लॉक करें.
सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करते समय भी सावधानी जरूरी है. तस्वीरों के साथ अक्सर लोकेशन से जुड़ा डेटा भी चला जाता है, जिससे आपके घर या मौजूदगी की जगह का पता लगाया जा सकता है. फोटो अपलोड करने से पहले लोकेशन मेटाडेटा को बंद करना समझदारी है.
विज्ञापन आईडी एक तरह का डिजिटल पहचान चिन्ह होती है, जिसके जरिए ऐप्स आपके व्यवहार को ट्रैक करते हैं. इसे समय-समय पर रिसेट करना जरूरी है. साथ ही, ऐप ट्रैकिंग से जुड़ी सेटिंग्स को बंद रखें, ताकि ऐप्स आपकी गतिविधियों पर नजर न रख सकें. इंटरनेट ब्राउजिंग के दौरान भी डेटा संग्रह होता है. बेहतर होगा कि ऐसे ब्राउजर इस्तेमाल करें जो ट्रैकर्स को अपने आप ब्लॉक करते हों. इसके अलावा बैकग्राउंड ऐप रिफ्रेश बंद करने से न सिर्फ बैटरी बचेगी, बल्कि अनावश्यक डेटा शेयरिंग भी रुकेगी.
कीबोर्ड और ईमेल से जुड़ी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. समय-समय पर कीबोर्ड डिक्शनरी रिसेट करें और ईमेल में प्राइवेसी प्रोटेक्शन फीचर को ऑन रखें. सार्वजनिक वाई-फाई नेटवर्क से बचें और सिम कार्ड पर पिन सेट करना न भूलें. थोड़ी सी जागरूकता और सही सेटिंग्स के जरिए आप अपनी डिजिटल पहचान को काफी हद तक सुरक्षित रख सकते हैं. स्मार्टफोन का इस्तेमाल करें, लेकिन समझदारी के साथ.
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